फ़ेसबुक के डॉट ओआरजी का क्या होगा असर?

इंटरनेट

इमेज स्रोत, Getty

    • Author, प्रशांतो कुमार रॉय
    • पदनाम, वरिष्ठ टेक्नोलॉजी लेखक

मार्क ज़करबर्ग की इंटरनेट डॉट ओआरजी योजना के विस्तार का भारत पर दूरगामी असर होगा.

यह सच है कि इससे आम लोगों को मुफ़्त में इंटरनेट सेवाएं मिलेंगी और उनके पास पहले से ज़्यादा विकल्प होंगे.

इंटरनेट का प्रचार प्रसार बढ़ेगा और ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसका इस्तेमाल कर सकेंगे.

इससे काफ़ी हद तक भेदभाव दूर होगा, असमानता ख़त्म होगी और लोगों को अपना जीवन स्तर सुधारने में मदद मिलेगी.

नेट न्यूट्रैलिटी

इमेज स्रोत, THINKSTOCK

यह भारत जैसे देशों के लिए अच्छा है, क्योंकि यहां अभी भी इंटरनेट सुविधा पूरी आबादी के एक छोटे से हिस्से को ही मिल रही है.

पर यह भी सच है कि यह नेट न्यूट्रैलिटी के बुनियादी सिद्धातों के ख़िलाफ़ होगा.

यह कुल मिला कर सबको एक समान, एक रूप से नेट सुविधाएं देने के आदर्शों का उल्लंघन होगा.

दूरसंचार कंपनियों पर निर्भरता

इससे जो लोग इस आधार पर इसका विरोध कर रहे हैं, वे अपनी जगह सही हैं.

ज़करबर्ग का यह फ़ैसला उनकी अपनी कंपनी फ़ेसबुक के हित में हैं. वे इंटरनेट डॉट ओआरजी का विस्तार कर पाएंगे तो फ़ेसबुक और ज़्यादा लोगों तक पंहुचेगा.

इंटरनेट भारत

इस फ़ैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि यूज़र्स को काफ़ी हद तक इंटरनेट सुविधा देने वाली दूरसंचार कंपनियों पर निर्भर रहना होगा.

दूरसंचार कंपनियां इस सुविधा का इस्तेमाल अपने फ़ायदे में कर सकती हैं. वे कितनी पारदर्शिता रखती हैं, और सबको समान मौका कितना देती हैं, इसकी निग़रानी ज़रूरी हो जाएगी.

ट्राई की भूमिका

मार्क ज़करबर्ग
इमेज कैप्शन, मार्क ज़करबर्ग की कंपनी इंटरनेट डॉट कॉम के विस्तार का भारत पर दूरगामी असर होगा

इसमें भारत की दूरसंचार नियामक संस्था ट्राई की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी. उसे ठोस दिशा निर्देश बनाने होंगे और उनका पालन करवाना होगा.

ट्राइ या तो यह तय करे कि वह सौ फ़ीसदी नेट न्यूट्रैलिटी लागू करे, जो भारत में फ़िलहाल निहायत ही मुश्किल है. दूसरे, वह शत प्रतिशत लाइसेंसिग प्रणाली लागू करे, यह भी मुमकिन नहीं है.

ट्राइ के लिए व्यवहारिक यह है कि वह बीच का रास्ता अपनाते हुए यह सुनिश्चत करे कि पूरी पारदर्शिता रखी जाए और सेवा देने में किसी तरह का भेदभाव न हो.

यदि ट्राई इसमें कामयाब होती है तो इंटरनेट डॉट ओआरजी के विस्तार से भारत को फ़ायदा है.

(बीबीसी संवाददाता प्रमोद मलिक की प्रशांतो रॉय से बातचीत के आधार पर)

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>