स्मार्टफ़ोन का आदिवासियों में बढ़ता क्रेज़

- Author, शालू यादव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, केरल से
केरल के इड्डुकी ज़िले में चक्कपल्लम नाम के आदिवासी गांव में रहने वाले 51 वर्षीय पलराज आजकल बहुत परेशान हैं.
अपनी मेहनत की कमाई से ख़रीदा उनका सैमसंग स्मार्टफ़ोन खेत में कहीं गुम हो गया है.
वो बताते हैं, "मैंने दो साल पहले अपना पहला स्मार्टफ़ोन ख़रीदा और मुझे उसकी आदत सी हो गई थी. मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूँ, लेकिन स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल करना शुरू किया तो ख़ुद से ही बहुत कुछ सीख गया."
पलराज कहते हैं, "मैं न सिर्फ़ व्हाट्स ऐप पर हूँ, बल्कि आस-पास के इलाक़ों का मैप देखने के लिए भी मैं स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करता हूं."
लेकिन जिस चीज़ के लिए उन्हें अपने स्मार्टफ़ोन की कमी सबसे ज़्यादा खल रही है वो है लॉटरी का रिज़ल्ट.
लॉटरी का रिज़ल्ट

उनके मुताबिक़, "‘स्मार्टफ़ोन आने से पहले लॉटरी का रिज़ल्ट देखने के लिए मुझे अगले दिन अख़बार का इंतज़ार करना पड़ता था, लेकिन अब मैं शाम को ही हर दिन का रिज़ल्ट देख लेता था."
केरल में लॉटरी बेहद लोकप्रिय है और हर दिन हज़ारों लोग अपना भाग्य आज़माने के लिए लॉटरी का टिकट ख़रीदते हैं.
लॉटरी और इंटरनेट को लेकर पलराज की उत्सुकता देखते ही बनती थी. उनसे बात कर ये एहसास बिलकुल नहीं हुआ कि मैं एक 51 वर्षीय आदिवासी पुरुष से बात कर रही हूँ.
जब मैंने उनसे पूछा कि कभी उन्होंने कोई लॉटरी जीती या नहीं, तो एक उदासी भरी मुस्कुराहट के साथ उन्होंने बताया कि वो कभी इतने ख़ुशकिस्मत नहीं रहे.
उन्होंने कहा, "लेकिन कम से कम अब बेचैनी भरी रात नहीं काटनी पड़ती, क्योंकि मैं रिज़ल्ट हर शाम को अपने स्मार्टफ़ोन पर देख सकता हूँ."
शिक्षा की अहमियत

पलराज के गांव में 465 आदिवासी रहते हैं और अब ज़्यादा से ज़्यादा लोग स्मार्टफ़ोन ख़रीद रहे हैं.
पलराज का कहना है कि स्मार्टफ़ोन के आने से उन्होंने ख़ुद को तो शिक्षित किया ही, साथ ही ये भी जाना कि उनके बच्चों के लिए कंप्यूटर शिक्षा कितनी ज़रूरी है.
अपने दोनों बेटों को उन्होंने उच्च-शिक्षा के लिए अच्छे स्कूलों में दाखिला दिलाया और उन्हें अपना स्मार्टफ़ोन भी दिया ताकि वो दुनिया के बारे में खूब जानकारी जुटा सकें.
जब मैंने पलराज से पूछा कि अगला स्मार्टफ़ोन कौन सा लेंगे, तो झट बोले, "ज़ाहिर है कि इस बार पिछले फ़ोन से बेहतर फ़ोन ही खरीदूंगा. मेरा मन तो सैमसंग गैलेक्सी फ़ोन ख़रीदने का है. लेकिन उसके लिए थोड़े पैसे जुटाने होंगे."
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