ब्याह के बाद पूछेगी सरकार ससुराल में सब ठीक..

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- Author, राजेश चतुर्वेदी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
व्यापम घोटाले में विपक्ष के आरोपों से घिरे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल इंजीनियरिंग के अपने पिटारे से फिर नई पुड़िया निकाली है.
उनका एलान है कि राज्य सरकार बेटियों की शादी कराने के बाद उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगी. बाबुल की तरह उनकी सुध ली जाएगी.
'कुशलक्षेम सम्मेलन' आयोजित कर ब्याहता बेटियों से सरकार यह जानेगी कि ससुराल में उन्हें कोई तकलीफ़ तो नहीं है.
राज्य के सामाजिक न्याय विभाग ने इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है.
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सामाजिक न्याय विभाग के सहायक निदेशक अरुण जोशी ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना साल 2006 से शुरू हुई है. यानी इस बार दसवां साल था.
अब तक राज्य सरकार तीन लाख 25 हजार लड़कियों की शादी करा चुकी है और उसके खज़ाने से 440 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.
पहले साल तक सरकार हर शादी पर पांच हज़ार रुपये खर्च करती थी. लेकिन 2009 में सरकार ने इस राशि को बढ़ाकर साढ़े सात हज़ार रुपये कर दिया.
इसके बाद भी बेटियों की शादी पर खर्च होने वाली राशि में इज़ाफा किया गया. अभी इस मद में सरकार ने 25 हज़ार रुपये का प्रावधान कर रखा है.
सामूहिक विवाह

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तीन हज़ार रुपये आयोजक को दिए जाते हैं, बाक़ी 22 हजार रुपये कन्या के होते हैं.
इसमें उसके नाम पर 10 हज़ार रुपये की फिक्स डिपॉज़िट, पांच हज़ार का सामान मसलन पायल, बिछुआ वगैरह और सात हज़ार रुपये उसके खाते में जमा कर दिए जाते हैं. ताकि वह अपनी मर्ज़ी से चाहे जहां, यह राशि खर्च कर सके और उसे पैसे के लिए किसी का मुंह न ताकना पड़े.
सामाजिक न्याय विभाग के मंत्री गोपाल भार्गव कहते हैं, "पिछले दिनों सागर के गढ़कोटा में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में हमने बीते 13 आयोजनों में ब्याही गईं बेटियों के परिवार को आमंत्रित किया था."
कन्याओं की शादी

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वहां उनसे कुशलक्षेम पूछी तो सीएम ने एलान कर दिया कि अब बड़े पैमाने पर सम्मेलन कर पूरे प्रदेश की बेटियों को बुलाकर उनका हालचाल जानेंगे.
सागर का गढ़ाकोटा कन्याओं की शादी के लिए पूरे प्रांत में जाना जाता है. मंत्री गोपाल भार्गव इसी कस्बे से आते हैं और बेटियों की शादी कराने के मामले में विख्यात हैं.
पिछले 13 आयोजनों में 14 हज़ार कन्याओ की शादी करा चुके हैं. इस बार उनके गृह कस्बे गढ़कोटा में 1351 जोड़ों ने एक दूसरे का जीवन भर साथ निभाने की कस्में खाईं.
सोशल इंजीनियरिंग

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इनमें खुद उनका बेटा अभिषेक और बिटिया अवंतिका भी शामिल हैं. भार्गव ने इस आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी गढ़कोटा आने का न्यौता दिया था.
हालांकि मोदी इस आयोजन में नहीं आ सके लेकिन उनका शुभकामना संदेश जरूर आया, जिसमें लिखा था 'वेल डन.'
राज्य में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस भी शिवराज की सोशल इंजीनियरिंग के इस फंडे से हैरान हैं. उनकी दिक्कत ये है कि वे इसका विरोध भी नहीं कर सकते.
फिर चाहे वह कन्याओं के लिए चलाई जा रही लाड़ली लक्ष्मी योजना हो या बुजुर्गों को तीर्थाटन कराने का उपक्रम.

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हालांकि खुद शिवराज सिंह चौहान का मानना है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना को शुरू करवाने में उन्हें खासी दिक्कत हुई थी.
सूबे की नौकरशाही इस योजना से सहमत नहीं थी और उसका रवैया ठीक नहीं था. लेकिन वह ज़िद पर डटे रहे और योजना चल निकली.
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