नेपाल के लिए दो दिन में जुटाए छह लाख

- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली में पढ़ाई कर रहे नेपाली छात्र अपने देश के भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए दिन रात जुटे हैं.
इनमें से बहुत से लोग पहले अपने परिजनों के बारे में चिंतित थे और अब राहत और बचाव कार्य को लेकर परेशान हैं.
दिल्ली के लक्ष्मीनगर में रहकर सीए की तैयारी कर रहे अधिकतर छात्र नेपाल के लिए मदद इकट्ठा करने में जुटे हैं.
इनका कहा है कि रविवार शाम से शुरू किए गए अभियान में अब तक छह लाख रुपए से ज़्यादा जमा हो चुके हैं.

नहीं पहुंच पाई मदद
दिल्ली में सीए की कोचिंग देने वाले नागेंद्र साह बताते हैं, "शुरुआत में छात्र नेपाल में अपने परिजनों से संपर्क न होने के कारण परेशान थे. लेकिन अब परिजनों की ख़ैर-ख़बर मिल गई है और सभी किसी भी तरह मदद करना चाहते हैं."
नागेंद्र बताते हैं, "इस त्रासदी ने सभी को एकजुट कर दिया है. लोग भी बढ़-चढ़कर मदद दे रहे हैं."

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सीए की तैयारी कर रहीं बर्शा दुलाल और उनके साथियों ने सोमवार को बाराखंभा मेट्रो स्टेशन पर राहगीरों से मदद जुटाई. उन्होंने छह घंटे के भीतर ही 25 हज़ार रुपए जमा कर लिए.
भूकंप आने से एक दिन पहले ही नेपाल से लौटी बर्शा बताती हैं, "भूकंप आने के बाद परिवार से संपर्क नहीं हो पा रहा था. घंटों परेशान होने के बाद बात हो सकी. मेरे परिवार में सब ठीक हैं."
वे बताती हैं, "लेकिन मेरी एक दोस्त का रो-रोकर बुरा हाल था. उसका दो दिनों तक घर पर संपर्क नहीं हो पाया था. वो अपने पिता को लेकर बहुत चिंतित थी. लेकिन अब बात हो गई है."

सीए की तैयारी कर रहे माधव भी बिना कुछ खाए-पिए मदद जुटाने में लगे रहे.
माधव कहते हैं, "हमारा कुछ ग्रामीण इलाक़ों से संपर्क हुआ है. वहाँ अभी कोई राहत सामग्री नहीं पहुँची हैं. हमारा समूह वहीं जाकर मदद करेगा."
'उबर जाएगा नेपाल'
राहत अभियान से लोगों को जोड़ने के लिए <link type="page"><caption> नेपाल अर्थक्वेक रिलीफ़ फंड, नई दिल्ली</caption><url href="https://www.facebook.com/Earthquakerelieffundnewdelhi?pnref=story" platform="highweb"/></link> के नाम से एक फ़ेसबुक पेज भी बनाया गया है. जिस पर लगातार जानकारियां दी जा रही हैं.
मंगलवार को पहला दल राहत सामग्री लेकर नेपाल के नुवाकोट पहुंचेगा.

दिन भर सड़कों पर घूम-घूम कर पैसा जुटाने वाले छात्र रात भर राहत सामग्री पैक करने में लगे रहे.
नागेंद्र बताते हैं, "पहले दल में चिकित्सक और स्थानीय छात्र जा रहे हैं. वो वहाँ जो काम करेंगे उसकी तस्वीरें और वीडियो हमें भेजेंगे ताक़ि हम लोगों को दिखा सकें कि हमारी टीम ज़मीन पर कैसे काम कर रही हैं."
वे कहते हैं, "हम लोग पेशेवर समाजसेवी नहीं हैं. लेकिन इस त्रासदी में फँसे हमारे देशवासियों को हमारी ज़रूरत है. हम सब जितनी मदद कर सकते हैं कर रहे हैं."
'शुक्रिया'
नेपाल के ये छात्र बार-बार भारत और दिल्ली के लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए कहते हैं, "जिस तरह से लोग मदद कर रहे हैं, हमारी उम्मीद बंधी हैं कि नेपाल इस त्रासदी से उबर जाएगा."
आस्था कहती हैं, "जो लोग मदद नहीं दे पाते हैं वे भी दुआ देकर चले जाते हैं."
भारत से जो लोग नेपाल की मदद करना चाहते हैं वे प्रधानमंत्री रिलीफ़ फंड में भी दान दे सकते हैं.
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