बिहार: तूफ़ान में 65 मरे, 2000 घायल

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बिहार में मंगलवार की रात आए चक्रवाती तूफ़ान में कम-से-कम 65 लोग मारे गए हैं.
ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक 65 मृतकों के अलावा 2000 लोगों के घायल होने की ख़बर है.
पूर्णिया में सबसे ज़्यादा नुकसान होने की ख़बरें आ रही हैं.
बिहार के कोसी और दरभंगा डिवीजन के दस से अधिक जिले तूफ़ान से प्रभावित हुए हैं.
राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ़ोन पर नीतीश कुमार से नुकसान की जानकारी ली.
पढ़िए विस्तार से
पूर्णिया

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तूफ़ान का सबसे ज्यादा असर पूर्णिया जिले पर पड़ा है. ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक यहाँ अब तक 42 लोगों के मारे जाने की सूचना है.
जिले के पारसमणि गांव के मुकेश कुमार साह ने मंगलवार रात के मंजर के बारे में बताया, ‘‘करीब नौ बजे अचानक आंधी के साथ बारिश शुरु हो गई. बिजली भी चमक रही थी.’’
पूर्णिया के बाद मधेुपरा जिला तूफ़ान से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. जिले में सात लोग तूफ़ान से हताहत हुए हैं.
गेहूं की अच्छी पैदावार नहीं होने के कारण किसान पहले ही परेशान थे. और अब तूफ़ान ने उनसे मक्के की फसल का भी आसरा छीन लिया है.
मधेपुरा
मधेपुरा के स्थानीय पत्रकार रुपेश कुमार के अनुसार जिले के सदर और मुरलीगंज प्रखंड में सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ है.
रुपेश कहते हैं, ‘‘लगभग बीस मिनट में ही तूफ़ान ने तबाही मचा दी. जिले के कई महादलित टोले पूरी तरह से उजड़ गए हैं.’’
कटिहार

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मोहम्मद समशेर कटिहार जिले के गोपीनगर पंचायत के मुखिया हैं. समशेर के मुताबिक उनके इलाके में हल्की बारिश के साथ तूफ़ान ने मंगलवार रात 11 बजे के क़रीब दस्तक दी.
समशेर के मुताबिक तूफ़ान का जबरदस्त असर लगभग अगले चालीस मिनट तक रहा. साथ ही वे यह भी बताते हैं कि तूफ़ान थमने के बाद गर्म भट्ठी से निकलने जैसी गर्म हवा चली.
कोई चेतावनी नहीं
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से कहा गया है कि उसे इस तूफ़ान की कोई पूर्व सूचना नहीं थी. लेकिन बीते कुछ सालों से इस मौसम में हर साल तूफ़ान आते हैं.
पर्यावरण के जानकार रणजीव बताते हैं, ‘‘2001 से ऐसे तूफ़ान आने शुरु हुए. शुरुआत में खगड़िया जिले में तूफ़ान के साथ ओले भी गिरे थे. 2008 से ऐसे तूफ़़ान ज्यादा आ रहे हैं.’’
राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारवालों को मुआवज़ा देने की घोषणा कर दी गई है. जान-माल और फ़सल को हुए नुक़सान का पता लगाने के लिए टीमें भी बना दी गई है.
इन सबके बीच प्रशासन के सामने पहली चुनौती प्रभावित इलाकों में बिजली, टेलीफोन और यातायात को सामान्य करना है.
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