'जनता परिवार' में एका का खाका

- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी के लिए
जनता परिवार का विलय फिर खबरों में है. जनता परिवार का विलय यानी देश के छह क्षेत्रीय दलों का एक झंडा और एक निशान के नीचे आना.
ये दल हैं समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल यूनाइटेड (जदयू), जनता दल सेक्यूलर, भारतीय राष्ट्रीय लोकदल और एक कम चर्चित दल समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय).
भारत के चार राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और हरियाणा में ये दल प्रमुख राजनीतिक ताकत हैं. विलय को अंजाम तक पहुंचाने के लिए ये दल रविवार 5 अप्रैल को एक बार फिर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के घर जुटेंगे.
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एक ओर सपा नेता मुलायम सिंह यादव और जदयू नेता नीतीश कुमार ने कहा है कि छह पार्टियों के विलय की प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं.
वहीं जदयू के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी के मुताबिक प्रस्तावित नए दल के लिए दो नाम भी तय कर लिए गए हैं.
त्यागी के अनुसार ये दो नाम हैं, समाजवादी जनता दल या समाजवादी जनता पार्टी. पिछले दिनों मीडिया से बातचीत में उन्होंने ये नाम बताए. साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि विलय में अब कोई पेंच नहीं है.
‘वक्त लगेगा’

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इस बीच परसों बुधवार को जब लालू पटना से दिल्ली आए तो उन्होंने भी विलय की बात दोहराई. हालांकि लालू ने कहा कि इसमें वक्त लगेगा.
क्या विलय एक सप्ताह में हो जाएगा? बुधवार को यह पूछे जाने पर लालू ने पत्रकारों से अपने अंदाज़ में कहा, ‘विलय छूमंतर से नहीं होगा. हडबड़ी किस बात की है.’’
भाजपा ने कराया मेल

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जनता परिवार के विलय की चर्चा पिछले साल नवंबर में शुरु हुई थी. तब आम चुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी हार के बाद बिखरे हुए जनता दल परिवार के नेता दिल्ली में मिले थे.
फ़रवरी के पहले तक इस पर लगभग हर दिन नीतीश कुमार और लालू यादव की पार्टी के बयान भी आते थे.
लेकिन फरवरी के पहले सप्ताह के बाद विलय प्रकिया थम सी गई थी. जदयू नेतृत्व के खिलाफ़ बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के बगावत के बाद ऐसा हुआ. लेकिन एक बार विलय की चर्चा ज़ोर-शोर से हो रही है.
‘देश के लिए एकजुट’

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विलय की पहल क्यों की गई, इस पर जदयू के बिहार इकाई के प्रवक्ता निहोरा प्रसाद यादव कहते हैं, ‘‘भारत की मूल भावना के खिलाफ केंद्र सरकार काम कर रही है. ऐसे में देश के बारे में चिंता करने वाले समाजवादी विचारधारा के पुराने लोग देश बचाने के लिए एकजुट हो रहे हैं.’’
विलय के लिए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को अधिकृत किया गया है. इन दलों के 15 सदस्य लोकसभा और 30 सांसद राज्यसभा में हैं.
सूत्रों के मुताबिक नए दल का चिह्न चक्र या साइकिल हो सकता है. साथ ही मुलायम सिंह यादव लोकसभा और शरद यादव राज्य सभा में दल की अगुवाई कर सकते हैं.
नीतीश ज़्यादा इच्छुक

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विलय की शुरुआती चर्चा से ही ऐसा माना जाता रहा है कि नीतीश कुमार इसको लेकर सबसे ज्यादा इच्छुक हैं. लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने ही आगे बढ़कर बिहार में राजद से समर्थन मांगा था.
इस बीच पिछले दिनों खबरें आई कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चाहता है कि बिहार में जदयू और भाजपा फिर साथ आए. हालाँकि भाजपा ने इसका खंडन किया था.
माना जा रहा है कि इसके बाद अब तक विलय को टालने वाले लालू और मुलायम ने इसे हरी झंडी दिखा दी. जानकारों के मुताबिक अब साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के पहले विलय हो जाएगा.
विलय तो छह दलों का होना है. लेकिन इसके लिए सबसे ज़्यादा जदयू और राजद ही सक्रिय दिखाई देते हैं.
इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार कहते हैं, ‘‘आम चुनाव में भाजपा ने बिहार में जदयू और राजद दोनों के आधार में सेंधमारी की है. ऐसे में दोनों दलों को लगा कि अगर वे साथ नहीं आए तो भाजपा को रोकना मुमकिन नहीं होगा.’’
अजय के मुताबिक इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में ये दल साथ आए और अब इन्हें लगता है कि इसे अगर जनता परिवार का चेहरा मिल जाए तो ये गठबंधन और व्यापक होगा.
पहली परीक्षा बिहार चुनाव

दूसरी ओर विलय की ओर आगे कदम बढ़ाते हुए लालू प्रसाद यादव ने यह भी कहा कि विलय के बाद और भी धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ गठबंधन होगा.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनता परिवार की कोशिश है कि विलय के बाद कांग्रेस और दूसरे दलों को साथ लेते हुए आगामी चुनावों में भाजपा को दमदार चुनौती दी जाए.
ऐसे में दावों के मुताबिक जनता परिवार अगर एक जुट हुआ तो इनकी पहली परीक्षा साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में होगी.
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