पति नहीं रहा, तो हुनर बना जीने का सहारा

- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
फ्रिज और अलमारी जैसे घरेलू सामान हों या बाइक और कार जैसी गाड़ियां.
यह जब बेरंग होने लगती हैं तो इन पर ‘हीट पेंटिंग’ के ज़रिए रंग चढ़ाया जाता है. लेकिन क्या जहां रंगाई होती है वहां कभी आपको कोई महिला पेंटर मिली है?
महिला 'हीट पेंटर'

बिहार के दरभंगा शहर के लाल बाग इलाक़े में एक दुकान पर 'हीट पेंटिंग' के ज़रिए मोटर साइकिल पर रंग चढ़ाती हैं वजीफ़न ख़ातून.
शौहर साबिर की मौत के बाद वजीफ़न 'हीट पेंटिंग' के पेशे में आ गईं. चालीस वर्षीय वजीफ़न बताती हैं कि पेशे की बारीकियां उन्होंने साबिर से ही सीखी थीं.
वजीफ़न अपने परिवार की ज़िम्मेवारियां निभाने के लिए यह काम कर रही हैं.
वे कहती हैं, ‘‘मैं हमेशा ही अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी. मेरी सोच थी कि किसी पर बोझ नहीं बनना चाहिए.’’
अपनों के ताने

वजीफ़न को मायके में अपनी इस सोच को ज़मीन पर उतारने का मौका नहीं मिला.
ऐसे में 1990 में निकाह के बाद पति का सहयोग करने लगीं और धीरे-धीरे यह काम सीखने लगीं.
भारतीय समाज में महिलाओं को ऐसे काम करते हुए आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता है.
वह कहती हैं, ‘‘शुरुआत में बाहर वालों ने तो कुछ नहीं कहा, पर परिवार के ही कुछ लोग पति को बीबी से काम कराने का ताना दिया करते थे.’’
पुरुष सहयोगी

2007 में हुई साबिर की असमय मौत के बाद वजीफ़न का हुनर उनका सहारा बन गया.
इसने उन्हें पांच बच्चों की ज़िम्मेवारी निभाने का हौसला दिया. इतना ही नहीं, जो लोग पहले ताने दिया करते थे, उन्हें भी अपनी ग़लती का अहसास हुआ. वजीफ़न का काम आगे बढ़ा और उन्होंने अपनी मदद के लिए एक सहयोगी भी रख लिया है.
क्या एक महिला के मातहत काम करने का ताना सुनना पड़ता है, इस पर वजीफ़न के सहयोगी शहजाद कहते हैं, ‘‘उन्हें मेरा काम पसंद हैं. हमारा रिश्ता मालकिन और मज़दूर का है. हमारे बीच यही तालमेल है.’’
सपना और संदेश

वजीफ़न अपने बच्चों के लिए बड़ा सपना देखती हैं. वे अपनी बेटियों को कंप्यूटर कोर्स कराना चाहती हैं. लेकिन चौथी में पढ़ने वाली उनकी बेटी नाज़रीन डॉक्टर बनना चाहती हैं.
वजीफ़न का मानना है कि महिलाओं को कभी ख़ुद को छोटा नहीं समझना चाहिए. यह नहीं सोचना चाहिए कि कोई काम उनसे नहीं हो सकता.
वे कहती हैं, ‘‘महिलाओं को अपनी हिम्मत और हौसला बनाए रखना चाहिए. एक महिला की हिम्मत से दूसरी महिला की हिम्मत बढ़ती है.’’
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