बजट सत्र में मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा

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    • Author, प्रमोद जोशी
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

पिछले कुछ महीनों से लगातार सफलता के शिखर पर पैर जमाकर खड़ी नरेंद्र मोदी सरकार के सामने सोमवार से शुरू हो रहा संसद का बजट सत्र बड़ी चुनौती साबित होगा.

संसद से सड़क तक की राजनीति, देश के आर्थिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अनेक गंभीर सवालों के जवाब सरकार को देने हैं.

पिछले साल जुलाई में पेश किए गए रेल और आम बजट पिछली सरकार के बजटों की निरंतरता से जुड़े थे.

देखना होगा कि वित्त मंत्री का जोर राजकोषीय घाटे को कम करने पर है या वो सरकारी खर्च बढ़ाकर सामाजिक विकास को बढ़ावा देंगे.

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यह मोदी सरकार के हनीमून की समाप्ति का सत्र होगा.

सत्र के ठीक पहले सरकारी दफ्तरों से महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चोरी के मामले ने देश की प्रशासनिक-आर्थिक व्यवस्था को लेकर गम्भीर सवाल खड़े किए हैं. इसकी गूँज इस सत्र में सुनाई पड़ेगी.

STY37453619बजटः आयकर में छूट की सीमा बढ़ेगी?बजटः आयकर में छूट की सीमा बढ़ेगी?मोदी सरकार के पहले पूर्ण बजट से उद्योग जगत और आम लोगों को भारी उम्मीदें. 2015-02-21T17:32:45+05:302015-02-22T09:57:31+05:302015-02-22T09:58:35+05:302015-02-22T12:18:36+05:30PUBLISHEDhitopcat2

संसदीय कर्म के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण और लम्बा सत्र है. दो चरणों में यह 8 मई तक चलेगा.

तब तक संसद के बाहर सम्भवतः कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व परिवर्तन और मोदी सरकार के कामकाज का पहले साल का अंतिम सप्ताह शुरू होगा.

नए भारत की कहानी

मध्यवर्ग की दिलचस्पी आयकर छूट को लेकर होती है. क्या बजट में ऐसी नीतिगत घोषणाएं होंगी, जिनसे इस साल आर्थिक संवृद्धि की गति तेज होगी?

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क्या भारतीय रेलवे तेज आधुनिकीकरण की दौड़ में शामिल होने जा रही है? ऐसे कई सवालों का जवाब इस सत्र में मिलेगा.

भारतीय अर्थव्यवस्था का अपेक्षित उठान इस साल से शुरू होगा. दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं इस समय मंदी की ओर बढ़ रही हैं.

चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट आने लगी है. ऐसे दौर में नए भारत की कहानी इस साल से शुरू होगी.

संयुक्त सत्र की नौबत?

एनडीए सरकार के सामने नौ अध्यादेशों को क़ानूनों में बदलने की चुनौती है.

खासतौर से इंश्योरेंस, भूमि अधिग्रहण और कोल ब्लॉक आवंटन अध्यादेश को कानून की शक्ल नहीं मिली तो सरकार के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी. लगता है कि संसद के संयुक्त सत्र की नौबत आएगी.

STY36738147बजट खर्च नहीं कर पा रहे मोदी के मंत्रीबजट खर्च नहीं कर पा रहे मोदी के मंत्रीबजट खर्च ना करने का अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?2015-01-08T12:48:09+05:302015-01-12T21:15:52+05:302015-01-12T21:15:52+05:302015-01-12T21:15:52+05:30PUBLISHEDhitopcat2

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इसके पहले तीन मौकों पर क़ानून पास करने के लिए संसद के संयुक्त सत्र बुलाए गए हैं.

लगता है कि राजनीतिक टकराव के कारण चौथी बार विधायी कार्य के लिए संसद का संयुक्त अधिवेशन बुलाया जाएगा.

योजना आयोग के बाद का युग

योजना आयोग की समाप्ति और नीति आयोग की स्थापना का देश की आर्थिक संरचना पर क्या प्रभाव पड़ा इसका पहला प्रदर्शन इस सत्र में देखने को मिलेगा. आर्थिक सर्वेक्षण का भी नया रूप इस बार देखने को मिलेगा.

नए मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम ने आर्थिक सर्वेक्षण का रंग-रूप पूरी तरह बदलने की योजना बनाई है. अब सर्वेक्षण के दो खंड होंगे.

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पहले में अर्थ-व्यवस्था की विवेचना होगी. साथ ही इस बात पर ज़ोर होगा कि किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है.

दूसरा खंड पिछले वर्षों की तरह सामान्य तथ्यों से सम्बद्ध होगा.

सदमे में एनडीए, पुरजोश विपक्ष

भाजपा के लिए फिलहाल आसार अच्छे नहीं हैं. इस सत्र में मोदी सरकार के हनीमून की समाप्ति भी दिखाई पड़ेगी.

सत्र शुरू होने के ठीक पहले दिल्ली-विधानसभा चुनाव में मुँह की खाने और बिहार में नीतीश सरकार की वापसी से एनडीए की राजनीति सदमे में है.

सत्र शुरू होने के ठीक पहले शनिवार को मुलायम सिंह यादव के पौत्र का तिलक समारोह राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में था.

STYक्या रफ़्तार पकड़ सकेगी भारतीय रेल?क्या रफ़्तार पकड़ सकेगी भारतीय रेल?नरेंद्र मोदी सरकार का पहला रेल बजट कुछ ही घंटों में संसंद में पेश होने वाला है. लेकिन भारतीय रेलवे की चुनौतियों के बीच बदलाव कैसे संभव होगा? 2014-07-08T08:42:43+05:302014-07-08T09:36:33+05:302014-07-08T10:01:30+05:302014-07-08T10:21:42+05:30PUBLISHEDhitopcat2

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इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जाना जितना मानीखेज है उतना ही महत्वपूर्ण है संसद में मोदी-विरोधी एकता की पटकथा का लिखा जाना.

सरकार को भरोसा है कि वह महत्वपूर्ण विधेयकों को पास करा लेगी, लेकिन उम्मीद नहीं कि विधेयकों को राज्यसभा से पास कराने या संसद का संयुक्त सत्र बुलाने में कांग्रेस पार्टी सरकार से सहयोग करेगी. सपा, बसपा और कुछ अन्य क्षेत्रीय क्षत्रपों के पत्ते अभी बंद हैं.

कांग्रेस की अस्तित्व रक्षा

लोकसभा में निर्बल और राज्यसभा में सबल कांग्रेस अपनी प्रासंगिकता को बनाए रखने के लिए संसद के इस सत्र का इस्तेमाल किस तरह करेगी यह देखना रोचक होगा.

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मोदी-विरोधी एकता में कांग्रेस की भूमिका कितनी होगी यह अब दिखाई पड़ेगा.

इसकी पेशबंदी में ही वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि विपक्ष आर्थिक सुधारों में अड़ंगा डालने की कोशिश कर रहा है.

उनका इशारा कांग्रेस की ओर था, जो सिद्धांततः आर्थिक सुधारों की समर्थक है.

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पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान ही भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के ख़िलाफ़ रैली निकालने का फैसला किया है.

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संसद के बाहर सम्भवतः कांग्रेस इसी दौरान राहुल गांधी को अपने नए अध्यक्ष के रूप में भी चुनेगी.

कांग्रेस की भविष्य की राजनीति और व्यक्तिगत रूप से राहुल की भूमिका भी इस सत्र में नजर आएगी.

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