कश्मीरः सिखों को अब भी नहीं भूली वो रात

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, कश्मीर से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
भारत प्रशासित कश्मीर के छत्तीसिंह पुरा में 21 मार्च, 2000 को 35 सिखों की हत्या रात के घुप अंधेरे में की गई. जिस दिन सिखों की हत्या हुई उस दिन अमरीका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आए हुए थे.
इस समय अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत के दौरे पर हैं. यहाँ के सिख अब भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.
30 वर्षीय रविंदर पाल सिंह छत्तीसिंह पुरा गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के सेक्रेटरी हैं. रविंदर के कई रिश्तेदार उस दिन मारे गए. रविंदर का कहना है, "हम 1984 का दर्द अभी भूले भी नहीं थे कि साल 2000 में ये घटना हो गई."
रविंदर कहते हैं, "जब भी कोई बड़ा विदेशी नेता भारत आता है तो हम दहशत में आ जाते हैं. उस दिन भी क्लिंटन आए थे और हमें निशाना बनाया गया. अब आज ओबामा आए हैं तो फिर हम ख़ौफ़ में अपने दिन रात काट रहे हैं."
आज तक नहीं उबर सके

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रविंदर उस रात को याद करते हुए कहते हैं, "मैं अपने घर में था कि बाहर गोलियों की आवाज़ आई और जब गोलियों की आवाज़ थम गई तो हम बाहर आ गए और देखा कि एक जगह 17 सिखों को और दूसरी जगह 18 सिखों को गोलियों मार दी गई थीं."
वो कहते हैं, "हम जब भी इस गुरुद्वारे के पास पहुंचते हैं तो साल 2000 की घटना की याद आ जाती है. हम उस दुःख से आज तक नहीं उबर सके हैं."
25 वर्षीय जितेंद्र सिंह के बैंक कर्मचारी पिता की भी उसी दिन हत्या हुई थी. जितेंद्र कहते हैं, "मैं तो बहुत छोटा था. मैंने तो अपने पापा का उस दिन चेहरा भी नहीं देखा. मैंने अगले दिन सुबह पापा के सिर्फ जूते देखे जो खून में लथपथ थे"
वो कहते हैं, "ये पंद्रह वर्ष हमने रो-रो के गुज़ारे हैं. हर समय हम यही सोचते हैं कि पापा होते तो कैसा होता. कोई त्योहार होता है तो हमें रोना आ जाता है."
हत्यारों का सुराग नहीं

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जितेंद्र इस बात से व्यथित हैं कि उनके पिता के हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिला.
वो कहते हैं, "मेरे पापा की हत्या किसने की इसका पता आज तक नहीं चला...मेरी ही तरह यहाँ के दर्जनों बच्चे उस रात अनाथ हो गए."
जितेंद्र के परिवार में उनका एक भाई और उनकी माँ हैं. जितेंद्र की माँ गोल्डी कौर अपने पति की मौत के सदमे से टूट चुकी हैं.
गोल्डी ने बीबीसी को बताया, "पिछले 15 साल मुश्किल से कटे हैं. अपने पति के बिना अकेले अपने बच्चों को मैंने कैसे पाला इसे मेरा दिल ही जानता है."
गोल्डी कहती हैं कि उस रात उन पर जैसे क़यामत ही टूट पड़ी थी.
सरकार से शिकायत

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रविंदर सिंह को भी शिकायत है कि 35 सिखों के हत्यारों का भारत सरकार अभी तक पता नहीं कर सकी है.
रविंदर के मुताबिक़ उस घटना के बाद सिखों को आर्थिक तौर पर भी काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा.
साल 2000 की घटना के बाद कई सिखों ने कश्मीर छोड़ने का इरादा कर लिया था जिसकी वजह से अपनी ज़मीनों को बहुत कम दामों में बेच दिया था.
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