गणतंत्र दिवस परेड में दिखेगी महिला शक्ति

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- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत में जब अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाली परेड में बतौर अतिथि शामिल होंगे तो उन्हें भारत में महिला सशक्तिकरण की एक झलक भी देखने को मिलेगी.
इस बार महिला सशक्तिकरण को ही गणतंत्र दिवस की परेड का 'थीम' बनाया गया है.
यह पहला मौक़ा होगा जब गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान सेना के तीनों अंग- यानी थल सेना, नौ सेना और वायु सेना का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला अधिकारियों के दस्ते की शिरकत होगी.
पूरी टुकड़ी
भारतीय सेना में महिलाओं की भर्ती 1927 से ही हो रही है, लेकिन इनकी सेवाओं को चिकित्सा और प्रशसनिक विभागों तक ही सीमित रखा गया था.
<link type="page"><caption> (गणतंत्र दिवस: ताकत और संस्कृति की झांकी)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/01/140126_65th_republic_day_photogallery_sr.shtml" platform="highweb"/></link>

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<link type="page"><caption> </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/01/140126_65th_republic_day_photogallery_sr.shtml" platform="highweb"/></link>वर्ष 1992 में इन्हें पहली बार 'शार्ट सर्विस कमीशन' में रखे जाने का सिलसिला शुरू किया गया. लेकिन, इनकी सेवा कुछ ख़ास क्षेत्रों तक ही सीमित रही.
साल 2008 में महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन दिया गया. इसके बावजूद उन क्षेत्रों से इन्हें अलग रखा गया था जहां शत्रु के साथ सीधे संघर्ष की संभावना रहती है.
वर्ष 2009 से सेना में महिला अधिकारियों की संख्या बढ़ने लगी और 2011 में इसमें 67 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई. अब सेना के तीनों अंगों में करीब तीन हज़ार महिलाएं हैं..
गणतंत्र दिवस की परेड के आयोजन की देखरेख करने वाले रक्षा मंत्रालय के निदेशक न्युंग एस लेम्बा आव का कहना था कि भारत सरकार ने यह पहले ही तय कर लिया था कि इस बार सेना की पूरी की पूरी महिला टुकड़ी परेड में शामिल होगी.
इस टुकड़ी में तीनों अंगों की 154 महिला अधिकारी शामिल होंगी जिनका नेतृत्व सेना की वायु रक्षा कोर की कैप्टेन दिव्या अजीथ करेंगी.

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फिलहाल महिला टुकड़ी के सदस्य परेड के अभ्यास में लगे हुए हैं.
<link type="page"><caption> (मरीन ड्राइव पर पहली गणतंत्र परेड)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2014/01/140126_mumbai_republic_day_pix_sdp.shtml" platform="highweb"/></link>
परेड के आयोजन से जुड़े अधिकारियों का कहना इसके अलावा पहली बार सेना की अपनी झांकी भी दिखाई जाएगी जिसमे महिला सैनिकों के उस दल को दर्शाया जाएगा जो एवेरेस्ट पर्वत पर पहुंचा था.
सही समय
सेना के सेवानिवृत जनरल अफसर करीम ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि पहले गणतंत्र दिवस की परेड में महिला सैनिकों की अलग से टुकड़ी इसलिए नहीं थी क्योंकि इनकी संख्या काम थी.
पिछले कुछ सालों में इनकी संख्या बढ़ी है और इसलिए यह पहला मौक़ा है जब इनकी टुकड़ी को परेड में शामिल किया गया है.
करीम कहते हैं, "ऐसा कहना ग़लत होगा कि सिर्फ अमरीकी राष्ट्रपति की मौजूदगी की वजह से गणतंत्र दिवस की परेड में सेना की महिला टुकड़ी को शामिल किया गया है. चूंकि अब महिलाओं की संख्या फ़ौज में बढ़ रही है इसलिए यह फैसला लिया गया है."

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सामरिक मामलों के विशेषज्ञ मारूफ रज़ा के अनुसार अब वक़्त गया है जब भारत दुनिया के सामने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करे और ओबामा की मौजूदगी से अच्छा अवसर भला और क्या हो सकता है.
<link type="page"><caption> (गणतंत्र दिवसः तंत्र से अलग गण की एक परेड)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/01/140125_da_rday_special_parade_rd.shtml" platform="highweb"/></link>
रज़ा कहते हैं कि एक सेना के अधिकारी को तैयार करने में एक साल से ज़्यादा का वक़्त लग जाता है जबकि ओबामा को अतिथि बनाने का प्रस्ताव कुछ ही महीने पहले का है.
हालांकि सेना में आमने-सामने की लड़ाई में महिलाओं को तैनात करने का सिलसिला शुरू हो गया है मगर यह वर्ष भारत के लिए महिला सशक्तिकरण का इसलिए भी है क्योंकि अर्धसैनिक बलों में नियुक्त की गई महिलाएं नक्सल प्रभावित संघर्ष के इलाक़ों में तैनात हो रही हैं.
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