फ़िल्म रिव्यूः कितनी डरावनी 'अलोन'!

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- Author, मयंक शेखर
- पदनाम, फिल्म समीक्षक
फिल्म: अलोन
निर्देशक: भूषण पटेल
कलाकार: बिपाशा बसु, करण सिंह ग्रोवर
रेटिंग: * *
मैं गया था एक हॉरर फ़िल्म देखने, इसलिए मैं आपको बता देना चाहता हूँ कि मुझे फ़िल्म में सबसे खिझा देने वाली बात लगी इसमें दिखाया गया रोमांस.
इस फ़िल्म में दो सियामी जुड़वा बहनें हैं, जन्म से ही उनका शरीर जुड़ा हुआ है. इन जुड़वा बहनों में से एक से एक लड़के को प्यार हो जाता है जिसकी कमर अपनी बहन से जुड़ी हुई है.
वह लड़का अपने स्केचबुक के कोने से उसे देखता है और उसकी तस्वीर बनाता है. लड़के को उस लड़की के शरीर से किसी जुड़वा के जुड़े होने का अंदाज़ा नहीं होता है.
जैसे-जैसे रोमांस बढ़ता जाता है हालात मुश्किल होते हैं. वैसे सच कहें तो हम थोड़ी बचकानी बात कर रहे हैं.
जब मैं पांच साल का था तब मुझे भी अपनी अंग्रेज़ी शिक्षिका से प्यार हो गया था और इसका कोई मतलब नहीं है.
हैरान करने वाली बात

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इस फ़िल्म में आख़िर हैरान करने वाली बात क्या है?
दो पैरों वाली जुड़वा बहनों (अंजना, संजना) के किरदार में सांवली और सुंदर बिपाशा बसु नज़र आती हैं.
इस फ़िल्म के हीरो करण सिंह ग्रोवर के साथ एक बहन का प्यार बरक़रार रहता है जिससे दूसरी बहन को जलन होती है.
कमर से जुड़े होने के कारण दोनों बहनों को रोज़मर्रा के कामकाज में भी परेशानी होती होगी.
मैं सोच रहा हूं कि आख़िर हीरो अपनी प्रेमिका से प्रेम संबंध कैसे बनाएगा, क्योंकि जब वो एक बिपाशा के साथ होगा तो उससे जुड़ी हुई दूसरी बिपाशा क्या करेगी?
मुझे माफ़ कर दें, लेकिन मैं सचमुच बेहद हैरान हो रहा हूं कि क्या यह अब तक के सभी वास्तविक और काल्पनिक इतिहास में बेहद अजीब और खीझ दिलाने वाली त्रिकोणीय प्रेम कहानी है.
शीर्षक का मतलब

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मुझे इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि आख़िर इस फ़िल्म का शीर्षक 'अलोन' क्यों है और शायद फ़िल्मकारों को भी इसका अंदाज़ा नहीं है क्योंकि उन्होंने भी इसी शीर्षक से बनी थाई हॉरर फ़िल्म की नक़ल की है.
यह फ़िल्म भी बॉलीवुड की महेश/मुकेश भट्ट ब्रांड की हॉरर फ़िल्म है जिसमें डरावनी चीज़ों के साथ ही सेक्स (जितने की सेंसर बोर्ड अनुमति दे दे), हैरान करने वाली सेटिंग, लोकेशन (कोट्टायम) और सूफ़ी गाने डालने की ज़रूरत पड़ती है.
इस फ़िल्म का विषय कुछ ख़ास नहीं है. ज़्यादातर डरावनी फ़िल्मों में किसी को आत्मा के होने का अहसास होता है जबकि दूसरे लोग इस बात पर यक़ीन नहीं करते.
सबसे अहम बात यह है कि बिपाशा का बिस्तर उड़ने लगता है और फ़िल्म का वह हिस्सा काफ़ी असरदार है जब वह एक कुत्ते के साथ भिड़ती हैं.
घबराहट और हंसी

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मैंने हॉल में अपने आसपास हंसने की आवाज़ें सुनीं जिससे घबराहट और हंसी दोनों का अंदाज़ा मिलता है.
हाल आधा भरा हुआ था. कोई भी अकेला नहीं था. यह फ़िल्म रिव्यू बॉक्स ऑफ़िस के आंकड़े का अंदाज़ा नहीं लगता सकती क्योंकि इसका मक़सद यह कभी नहीं था.
लेकिन मुझे इस बात का संदेह है कि निर्माता फ़िल्म के नतीजों से नहीं डरेगा.
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