अफ़ग़ानिस्तान: लड़ाके भर्ती कर रहा है आईएस

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- Author, डेविड लॉयन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, काबुल
चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) अफ़ग़ानिस्तान में अपने लिए लड़ाके नियुक्त कर रही है. पहली बार इसके ठोस सबूत मिले हैं.
हेलमंद प्रांत के पूर्व तालिबानी कमांडर मुल्ला अब्दुल रऊफ़ ने इस्लामिक स्टेट के प्रति अपनी वफ़ादारी की घोषणा की है.
सानगीन ज़िले के सैय्यदुद्दीन सांगीनवाल ने बीबीसी को बताया कि नया चरमपंथी समूह तालिबान की जगह लेने की कोशिश कर रहा है और तालिबान के सफ़ेद झंडे को इस्लामिक स्टेट के काले झंडे से बदलने की कोशिश कर रहा है.
सैय्यदुद्दीन सांगीनवाल के मुताबिक़ दोनों गुट की इस झड़प में अब तक 20 लोग मारे गए हैं.
संघर्ष की तैयारी
इलाक़े में तैनात अफ़ग़ान सेना के डिप्टी कमांडर जनरल महमूद ने पिछले कुछ दिनों में दोनों गुटों में झड़प की पुष्टि की है.
महमूद ने बीबीसी को बताया कि इस्लामिक स्टेट का गुट इलाक़े में समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है और संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार है.

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इस्लामिक स्टेट नेता मुल्ला अब्दुल रऊफ़ तालिबान के वरिष्ठ कमांडर रहे हैं और अमरीकी सेना द्वारा 2001 में गिरफ़्तार किए जाने के बाद ग्वातनामो बे जेल में छह साल बिता चुके हैं.
कहा जा रहा है कि तालिबानी नेता मुल्ला उमर से मतभेद के बाद उन्होंने अलग राह चुनी है.
रऊफ़ निमरोज़ प्रांत के गवर्नर आमिर मोहम्मद के दूर के रिश्तेदार हैं. मोहम्मद पहले कह चुके हैं कि ग्वातेनामो बे जेल ले जाने से पहले रऊफ़ अपना पांव गंवा चुके थे.
गवर्नर मोहम्मद पहले कह चुके हैं कि अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण पश्चिम प्रांत फ़राह में इस्लामिक स्टेट ने नियुक्ति शुरू की थी पर पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद उन्हें भगा दिया था.
सक्रियता

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मोहम्मद ने कहा, "एक दिन वे लोग अल-क़ायदा के नाम पर लड़ते हैं, फिर तालिबान के नाम पर और अब इस्लामिक स्टेट के नाम पर. ये एक ही लोग और इनका काम भी एक है."
तालिबान के लिए इलाक़े में आंतरिक संकट बढ़ रहा है. पाकिस्तानी तालिबान के एक पूर्व प्रवक्ता का ऑनलाइन वीडियो आया है जिसमें वे कह रहे हैं कि इलाक़े में इस्लामिक स्टेट के कई कमांडर सक्रिय हैं और पाकिस्तानी तालिबान से इनका एका है.
हालांकि उनके दावे की अब तक स्वतंत्र जांच नहीं हो पाई है पर वीडियो में कई तस्वीरें ऐसी हैं जिसमें अफ़ग़ानिस्तान के कई कमांडर दिखाई पड़ रहे हैं और वो कह रहे हैं कि उन्होंने इस्लामिक स्टेट का दामन थाम लिया है.
इस वीडियो में लड़ाके ये कह रहे हैं कि अब उनके नेता मुल्ला उमर नहीं, बल्कि इस्लामिक स्टेट के नेता अबू बक़र अल बग़दादी हैं.

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कई साल में यह पहला मौका है जब तालिबानी नेतृत्व को गंभीर चुनौती मिल रही है.
संकट
मुल्ला उमर को सार्वजनिक तौर पर अंतिम बार 2001 में देखा गया था.
तालिबानी लड़कों ने अफ़ग़ान सेना को निशाना बनाने का सिलसिला जारी रखा है. हालांकि अफ़ग़ान जमीन पर विदेशी सैन्य अभियान 2014 में ख़त्म हो चुका था.

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इन सबके बीच अफ़ग़ानिस्तान के वारडक प्रांत में खोरासान समूह द्वारा लड़ाकों के भर्ती की जानकारी भी मिली है.
खोरासन अफ़ग़ानिस्तान का प्राचीन नाम है और माना जा रहा है कि ये गुट कट्टर मुस्लिमों द्वारा चलाया जा रहा है.
मुश्किल
बीते सितंबर में सीरिया में हुए एक हवाई हमले के बारे में अमरीका ने कहा था कि ये हमला खोरासान नाम के समूह द्वारा किया गया है और ये समूह इस्लामिक स्टेट का सहयोगी है.
लेकिन अभी तक यह तय नहीं है कि अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया वाला खोरासान एक ही समूह है.

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हालांकि इन सबसे एक बात साफ़ है कि अफ़ग़ानिस्तान में नए तरह का संकट बढ़ रहा है.
हाल ही में एक वॉलीबॉल मैच के दौरान आत्मघाती हमला हुआ था. ऐसे हमले तालिबान ने अतीत में कभी नहीं किए.
अगर ऐसे में अफ़ग़ानिस्तान में मुल्ला उमर की पकड़ कमज़ोर होती है और इस्लामिक स्टेट देश में जगह बनाने में कामयाब होता है तो राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी की सरकार की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं.
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