'समलैंगिकों' पर ये क्या कह दिया मंत्री ने....

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गोवा के खेल मंत्री के समलैंगिकों का 'इलाज' कराने संबंधी बयान की पूरे देश में निंदा हो रही है.
खेल मंत्री रमेश तावड़कर ने बयान दिया था कि राज्य सरकार योजना बना रही है कि समलैंगिको को 'सामान्य' बनाने के लिए उनका इलाज किया जाएगा.
बहुत से लोगों ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर तावड़कर के इस बयान की आलोचना की है.
भारत में समलैंगिको के साथ जिस तरह का बर्ताव किया जाता है वो हाल के दिनों में चर्चा का विषय रहा है.

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समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखे जाने वाले 153 साल पुराने ब्रितानी युग में बने क़ानून को दिल्ली हाईकोर्ट ने ख़त्म कर दिया था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को पलट दिया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले की काफ़ी आलोचना हई थी और कई लोगों ने इसे 'शर्मनाक' बताया था.
समलैंगिकता और सज़ा
क़ानून की धारा 377 के अनुसार समान लिंग में यौन संबंध बनाने को 'अप्राकृतिक अपराध' बताया गया है और इसके लिए 10 साल क़ैद की सज़ा का भी प्रावधान है.
लेकिन इस क़ानून का इस्तेमाल शायद ही कभी सज़ा के लिए किया जाता है.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस क़ानून का इस्तेमाल पुलिस समलैंगिकों को परेशान करने के लिए करती है.
हालांकि रूढ़िवादी भारत में समलैंगिकता के बारे में कोई खुलकर बात नहीं करता है और कई लोग समलैंगिको के यौन संबंधों को ग़ैरक़ानूनी मानते हैं.
तावड़कर का बयान इन्हीं रूढ़िवादी सोच रखने वालों का प्रतिनिधित्व करता है.
पत्रकार बरखा दत्त ने इसपर कहा कि ''मंत्री जी समलैंगिको को नहीं बल्कि आपकी असंवेदनशील सोच को इलाज की ज़रूरत है.''
कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी विवादित बयान पर सवाल उठाए हैं.
सामाजिक कार्यकर्ता समर अनार्य ने मंत्री को 'समलैंगिको से डरने वाला' और 'कट्टर' बताया.
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