बग़दादी ने अमरीका में खाता खोला

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
नया साल आप सबको मुबारक. वाशिंगटन में इस नए साल में एक नई-नवेली रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस ने कैपिटल हिल की चाभी ले ली है.
कॉलेज के फ़र्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स की तरह कांग्रेस में पहली बार चुनकर आए सदस्य आंखें फाड़े कभी बाथरूम तो कभी कैंटीन तलाशते नज़र आते हैं.
लेकिन इन छोटी-छोटी मुश्किलों से उत्साह में कोई कमी नहीं है. इन फ्रेशर्स या जिन्हें हम कॉलेज के ज़माने में फ़च्चा कहते थे, उनकी कमान कांग्रेस के दिग्गज मिच मैकॉनल के हाथों में है लेकिन वो भी पहली बार सिनेट में बहुमत के नेता बने हैं.
क्लास के नए-नए मॉनिटर की तरह आते ही उन्होंने अपनी धाक जमाने की क़वायद शुरू कर दी है.
नया कैलेंडर

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शपथ लिए हुए मुश्किल से चौबीस घंटे भी नहीं हुए थे कि मॉनिटर साहब ने एलान कर दिया कि रिपब्लिकंस के आते ही अमरीकी अर्थव्यवस्था की रफ़्तार तेज़ हो गई है.
दरअसल उसी दिन पिछले साल की तिमाही के कुछ आंकड़े सामने आए थे और मैकॉनल साहब ने मौक़े पर चौका लगा दिया. बिचारे ओबामा कैसे कुढ़ रहे होंगे इसका अंदाज़ा आप लगा ही सकते हैं.
वैसे भी नई-नवेली कांग्रेस नए साल में उनकी राह में रोड़े अटकाने के नए-नए तरीके तलाशेगी क्योंकि अगली मंज़िल तो अब 2016 के राष्ट्रपति चुनाव हैं.
नए साल में आपने भी अबतक अपने घरों में मिठाईवाले, परचूनवाले या फिर हमदर्द दवाखाने की इश्तहार वाला कैलेंडर किसी कोने में टांग दिया होगा.
वाशिंगटन में भी नया कैलेंडर आ गया है जो पिछले ग्यारह सालों से नैशनल काउंटरटेररिज़्म सेंटर या राष्ट्रीय आतंकवादी विरोधी सेंटर की तरफ़ से जारी होता है.
उनकी वेबसाइट या हमारे दफ़्तर में फ़िलहाल उसकी कॉपी नहीं आई है लेकिन मीडिया के कुछ नामीगिरामी हस्तियों तक पहुंच गई है.
खुला रेट

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उनसे पता चला है कि पहले पन्ने पर इस बार भी अल-क़ायदा नरेश अयमन अल ज़वाहिरी ही विराजमान हैं और उनपर इनाम भी पच्चीस मिलियन डॉलर ही है.
लेकिन इस कैलेंडर में पहली बार अपना खाता खोला है इस्लामिक स्टेट के प्रमुख अबू बकर अल-बग़दादी ने. बधाई हो बग़दादी साहब.
लेकिन उनपर इनाम है बस दस मिलियन डॉलर यानी लगभग 60 करोड़ रुपए का. अब इन्होंने इतने लोगों का क़त्ल करवाया है, किसी को जन्नत भेजा है तो किसी को जहन्नुम और सिर्फ़ दस मिलियन डॉलर(लगभग 60 करोड़ रूपए)?
ये रेट तो हाफ़िज सईद जैसों का है जो खुलेआम दिखते हैं और फिर भी अमरीका कहता है कि पकड़वाने वाले को दस मिलियन डॉलर (लगभग 60 करोड़ रुपए) मिलेंगे.
आजकल हर जगह कटौती का माहौल है तो लगता है कि बग़दादी भी उसी की चपेट में आ गए हैं. ज़वाहिरी अभी भी पुराने रेट पर ही हैं इसलिए बचे हुए हैं.
पहले जैसा ही

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वैसे कैलेंडर है काम की चीज़, दुनिया भर के चरमपंथियों की जनमपत्री के साथ-साथ कहां-कहां बम धमाके हुए, आजकल किस तरह के बम फ़ैशन में हैं ये सब उसमें छपा हुआ है. और क़ीमत सिर्फ़ बीस डॉलर—कुछ दिन में बाज़ार में आ जाएगा तो ख़रीद लीजिएगा.
बाक़ी तो नए साल में सबकुछ फ़िलहाल पहले जैसा ही नज़र आ रहा है.
भारत-पाकिस्तान उसी उत्साह से एक दूसरे पर गोलियां और गालियां बरसा रहे हैं, अमरीका पहले जैसी ही मासूमियत के साथ दुनिया को सही राह दिखाने में लगा हुआ है, भारतीय टीम विदेशी पिचों पर हमेशा की तरह मैच गंवा रही है, किम कारदाशियां इंटरनेट तोड़ने के बाद अब कुछ और तोड़ने की सोच रही हैं, इमरान ख़ान साहब का पता करना होगा कि इन दिनों भी धरने पर ही रात गुज़ारते हैं या शाम को घर लौटने लगे हैं.
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