कोयला हड़ताल ख़त्म, पर जीत किसकी?

इमेज स्रोत, AFP
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत में कोयला कर्मचारियों की दो दिन तक चली हड़ताल तो बुधवार को ख़त्म हो गई लेकिन ये कहना मुश्किल है कि समस्या हल हो चुकी है.
कोयला अध्यादेश और खदानों के कथित निजीकरण के विरोध में कोल इंडिया लिमिटेड(सीआईएल) और उसकी सहायक कंपनियों में चली इस व्यापक हड़ताल से लगभग 75 प्रतिशत कोयला उत्पादन प्रभावित रहा.
हालांकि हड़ताल ख़त्म होने से देश में बिजली संकट बढ़ने की आशंका तो समाप्त हुई लेकिन ट्रेड यूनियन नेताओं ने अभी पूरी तरह चैन की सांस नहीं ली है.
बुधवार को यूनियन नेताओं ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से घंटों बात करने के बाद ये फ़ैसला तो लिया लेकिन सरकार से उनकी उम्मीदें भी बढ़ चुकी है.
'जीत तो है लेकिन....'

इमेज स्रोत, Other
ट्रेड यूनियनों के अनुसार बिजली और कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने उनकी सभी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है.
लेकिन पीयूष गोयल के बयान को ग़ौर से देखा जाए तो ऐसा लगता है सरकार ने बिगड़ते हालात को देखते हुए थोड़ा समय ले लिया है.
गोयल ने कहा, "सीआईएल को निजी हाथों में सौंपने का कोई इरादा नहीं है और इसके मालिकाना हक़ को लेकर किसी तरह से भयभीत होने की ज़रूरत नहीं है".
ट्रेड यूनियन नेता इस बयान को अपनी जीत तो मान रहे हैं, लेकिन सजगता के साथ.
अखिल भारतीय मज़दूर संघ कांग्रेस के नेता डीएल सचदेव ने बताया, "मंत्री जी ने लिखित आश्वासन दिया है कि अध्यादेश में जो निजी कंपनियों वाला क्लॉज़ है उस पर एक कमेटी बनेगी जिसमें सभी ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. देखते हैं सरकार अपने वादे पर खरी उतरती है या नहीं. ट्रेड यूनियन फिर से आंदोलन करने के लिए हमेशा स्वतंत्र हैं."

सच्चाई ये भी है कि दशकों बाद हुई इतनी व्यापक हड़ताल के बाद कोयला क्षेत्र और ऊर्जा सेक्टर की सेहत पर पड़ने वाले असर पर सवाल उठने लगे हैं.
इस पूरे प्रकरण में गौर करने वाली बात ये भी रही कि स्वयं भाजपा की क़रीबी ट्रेड यूनियन भारतीय मज़दूर संघ ने भी इस हड़ताल में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.
'अच्छे कदमों का समर्थन'
आर्थिक विश्लेषक परंजॉय गुहा ठाकुरता को लगता है कि सरकार के पास भी ज़्यादा विकल्प नहीं हैं.
उन्होंने कहा, "सरकार अगर कर्मचारी यूनियन के लोगों से ही बात करती है और कोल इंडिया लिमिटेड के कर्मचारियों को ख़ुश नहीं रखती तो इसका असर बिजली उत्पादन और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. अगर कर्मचारी अच्छा वेतन और दूसरे प्रोत्साहन की मांग कर रहे हैं तो उस पर भी विचार होना चाहिए. आख़िर इन पर देश के 80 प्रतिशत कोयले का उत्पादन निर्भर करता है."

इमेज स्रोत, v
केंद्र में आसीन एनडीए सरकार के समक्ष ये हड़ताल एक बड़ी चुनौती बन कर उभरी है.
कोल इंडिया और कोयला उत्पादन मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख़्त रवैया अख़्तियार करने के तुरंत बाद ही सरकार ने इस क्षेत्र पर अपना ध्यान बढ़ा दिया था.
वैसे ट्रेड यूनियनों के लिए श्रमिकों की मांग पर कमेटी का गठन एक बड़ी जीत बताई जा रही है. ट्रेड यूनियन नेता इसे एक नया अध्याय भी क़रार देने से नहीं चूक रहे.
भारतीय मज़दूर संघ के महासचिव वृजेश उपाध्याय ने कहा कि अब कोल इंडिया का निजीकरण नहीं होगा.
उन्होंने कहा, "काफ़ी सकारात्मक सोच दिखी है इस प्रक्रिया में. पहली बात ये है कि बदलाव के समय थोड़ी दिक़्क़त तो होती ही है. दूसरी बात ये है कि लगभग 40 हज़ार ऐसे मज़दूर जिनकी खानों का आवंटन रद्द हो गया था, उनके भविष्य के बारे में भी सरकार ने हमें आश्वासन दिया है. अगर सरकार पीछे हटी तो हम उठ खड़े होंगे और अगर सरकार अच्छे क़दम उठती है तो हम खड़े होकर उनका समर्थन करेंगे".
'असल इम्तेहान बाक़ी'

इमेज स्रोत, AFP
परंजॉय के अनुसार, "कई लोग ऐसा भी कह रहे हैं कि नई सरकार का रुख़ निजीकरण की तरफ़ ज़्यादा है. इसमें कोई दो राय नहीं है."
वो कहते हैं, "इस सरकार की अर्थनीति से जुड़े लोग, उसके सलाहकार चरमदक्षिणपंथी राजनीति में विश्वास करते हैं, खुले बाज़ार की नीति में विश्वास करते हैं. ऐसे लोग पिछली सरकार में भी थे. लेकिन वह महज़ इसका एक हिस्सा भर थे."
फ़िलहाल ट्रेड यूनियनों के तेवर तीखे दिख रहे हैं और क्योंकि इस हड़ताल में लगभग साढ़े तीन लाख मज़दूरों के शामिल होने के अलावा व्यापक स्तर पर कोयले के उत्पादन पर फ़र्क़ भी पड़ा, सरकार ने भी आगे बढ़कर सुलह करना बेहतर समझा.
मामले का असल इम्तेहान तब होगा जब इस प्रस्तावित कमेटी की बैठकें शुरू होंगी.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












