चर्चित नेताओं की हार, कौन बनेगा सीएम?

- Author, नीरज सिन्हा
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
झारखंड विधानसभा चुनाव में पहली दफा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ है.
इसके साथ ही झारखंड में भाजपा सरकार बनाने की तैयारी में जुट गई है.
चुनाव में भले ही भाजपा को विजय मिली हो लेकिन अर्जुन मुंडा समेत पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ़ के कई बड़े नेता चुनाव हार गए हैं. जिससे राज्य की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है.
ऐसे में इस बात को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
पढ़ें लेख विस्तार से

झारखंड में भाजपा गठबंधन के बहुमत पाते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार किसी गैर आदिवासी विधायक के मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है.
मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास और वरिष्ठ नेता सरयू राय का नाम तेजी से उछलता दिखाई पड़ रहा है.
रघुवर दास जमशेदपुर पूर्वी सीट से लगातार पांचवीं बार चुनाव जीते हैं. वे सरकार में उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं.
सरयू राय दूसरी बार जमशेदपुर पश्चिम से चुनाव जीते हैं. इससे पहले वे 2005 में चुनाव जीते थे.

81 सदस्यों वाली झारखंड विधानसभा में पूर्ण बहुमत के लिए 41 का आंकड़ा जरूरी है. भाजपा और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) गठबंधन को कुल मिलाकर 42 सीटें मिली हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की हार के बाद के बावजूद भाजपा में मुख्यमंत्री आदिवासी नेताओं की उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं.
हिन्दी दैनिक प्रभात खबर के वरिष्ठ संपादक अनुज कुमार सिन्हा कहते हैं, "मुख्यमंत्री कौन होगा, अब नियाहत भाजपा आलाकमान के फैसले पर निर्भर करता है."
देखना है कि भाजपा किस किस्म का जोखिम उठाती है.
गठबंधन

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भाजपा ने इस बार आजसू और लोक जनशक्ति पार्टी(लोजपा) के साथ गठबंधन किया था. भाजपा 72, आजसू पार्टी 8 और लोजपा एक सीट पर चुनाव लड़ी थी.
भाजपा को 37 और आजसू को पांच सीटों पर जीत मिली है. लेकिन आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो चुनाव हार गए हैं.
जेएमएम के अमित महतो ने उन्हें हराया. इसी तरह खरसावां सीट पर अर्जुन मुंडा को झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के दशरथ गगराई ने चुनाव हराया है.
आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी तीसरी बार और कमलकिशोर भगत, रामचंद्र सहिस दूसरी बार चुनाव जीतने में सफल रहे हैं.
हेमंत बोले

इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि जनादेश का वे सम्मान करते हैं. वे कहते हैं कि दुमका सीट से वे भले ही चुनाव हारे हैं, लेकिन झारखंड उन्होंने जीता है.
जेएमएम को 19 सीटों पर जीत मिली है. सोरेन ने मीडिया से कहा है कि जेएमएम विपक्ष में बैठना पसंद करेगा.
हेमंत सोरेन संथालपरगना की दो सीटें- दुमका, बरहेट से चुनाव लड़े थे. दुमका में भाजपा की लुइस मरांडी से वे चुनाव हार गए हैं, लेकिन बरहेट में उन्होंने भाजपा के हेमलाल मुर्मू को शिकस्त दी है.
हेमलाल मुर्मू 2009 का चुनाव जेएमएम के टिकट से जीते थे. इससे पहले 2004 में जेएमएम के टिकट से ही लोकसभा का चुनाव जीते थे.
इस बार लोकसभा चुनाव से पहले वे भाजपा में शामि हुए थे. भाजपा ने उन्हें लोकसभा का चुनाव भी लड़ाया था, लेकिन वे जेएमएम के प्रत्याशी से हार गए थे.
आठ मंत्री हारे

इस चुनाव में हेमंत सोरेन सरकार के आठ मंत्री भी चुनाव हार गए हैं. इनमें राजद की अन्नपूर्णा देवी, सुरेश पासवान शामिल हैं. इन दोनों को भाजपा ने हराया है.
जेएमएम कोटा से मंत्री हाजी हुसैन अंसारी, लोबिन हेंब्रम को भी भाजपा उम्मीदवारों से हार मिली है.
सरकार में शामिल कांग्रेस के मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह, गीताश्री उरांव, बन्ना गुप्ता और केएन त्रिपाठी भी चुनाव हार गए हैं.
जेएमएम के मंत्री जयप्रकाश भाई पटेल और चंपाई सोरेन चुनाव जीतने में सफल रहे हैं.
बाबूलाल दोनों सीट से हारे

झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी गिरिडीह और राजधनबार सीट से चुनाव हार गए हैं.
राजधनबार में उन्हें भाकपा माले के राजकुमार यादव और गिरिडीह में भाजपा के निर्भय शाहबादी ने चुनाव हराया है.
हालांकि बाबूलाल मरांडी के आठ विधायकों को जीत मिली है.
राजद, जदयू को करारा झटका

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इस बार के चुनाव में झारखंड से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल-यू (जदयू) का सूपड़ा साफ हो गया है.
पिछले चुनाव में राजद के पांच विधायकों को जीत मिली थी, जबकि जदयू से दो उम्मीदवार जीते थे. राजद के प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह भी गढ़वा सीट से चुनाव हार गए हैं.
इसी तरह जदयू के प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो बाघमारा से चुनाव हार गए हैं. इन दोनों नेताओं को भाजपा के उम्मीदवारों ने हराया है.
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