बांध पर भारतीय मीडिया ग़लत: चीनी मीडिया

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- Author, विकास पांडे
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
चीन में ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे पनबिजली संयंत्र की भारत में हुई आलोचना पर चीनी मीडिया ने भारतीय मीडिया को खरी खोटी सुनाई है.
चीन के सरकारी मीडिया ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने पनबिजली संयंत्र ने काम करना शुरू कर दिया है.
भारत के मीडिया में कुछ जगह चीन के इस कदम को नदी के जल पर नियंत्रण की कोशिश के रूप देखा जाता है. चीन के सरकारी मीडिया और सरकार ने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई है.
उन्होने इसे भारतीय मीडिया संस्थानों की "गलत रिपोर्टिंग" कहा है.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने सोमवार को कहा, "पिछले कुछ अर्से से चीनी पक्ष ने चीन-भारत के मेलजोल और मानवता को ध्यान में रखते हुए भारत को नदी के जल विज्ञान से जुड़े आंकड़े मुहैया कराए हैं. इस तरह से बाढ़ रोकने और निचली धारा वाले इलाकों में आपदाओँ को कम करने में ये अहम भूमिका निभा निभाएगा."

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मीडिया संस्थानों की आलोचना
चीनी अखबारों ने भारतीय मीडिया संस्थानों की तिब्बत के पनबिजली संयंत्र पर तनाव "बढ़ाने" के लिए आलोचना की है.
सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के चीनी संस्करण ने लिखा है कि यारलन जांगबो नदी पर बना जांगमू हाइड्रोपावर स्टेशन पूर्वी तिब्बत के इलाके में बिजली की कमी को खत्म कर देगा.
चीन में ब्रह्मपुत्र नदी को यारलन जांगबो कहा जाता है.
अखबार ने आरोप लगाया है कि भारतीय मीडिया इस बांध को "खतरे" के रूप में देखता है. चीनी मीडिया के मुताबिक भारतीय अखबारों में कहा गया है, "संयंत्र न सिर्फ बाढ़ और भूस्खलन का कारण बनेगा बल्कि यह विवाद की स्थिति में धारा को रोक कर भारत को नियंत्रित भी करेगा."
अखबारों ने आश्वस्त किया है कि परियोजना में पर्यावरण को बचाने के "उच्च स्तरीय" उपायों को लागू किया गया है.
अखबार की एक अलग रिपोर्ट में कई विश्लेषकों ने यह मुद्दा उठाया है कि भारत ने, "मध्यधारा में कई पनबिजली बांध" बनवाए हैं.
चीन में भारतीय मामलों के जानकार कियान फेंग ने अखबार से कहा है, "बांग्लादेश ने बांध बनवाने के लिए भारत की आलोचना की है ऐसे में उसे चीन की आलोचना करने का कोई हक़ नहीं है."
इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय मिडिया चीन की बांध परियोजना के बारे में ग़लत रिपोर्टिंग कर रहा है. उनके अनुसार, "इससे जाहिर है, बीजिंग और दिल्ली के बीच रणनीतिक मामलों में भरोसे की कमी है."
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