रामपाल: गिरफ़्तारी के समय क्या था माहौल..

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, आश्रम के पास से
अंधेरा घना होते ही आश्रम के पास सब कुछ शांत लग रहा था. रिपोर्टर, कैमरामैन और यहां तक की पुलिस वाले भी अपना सामान समेटने में लगे थे. उन्हें उम्मीद थी कि गुरुवार सुबह अभियान फिर शुरू होगा.
लेकिन आश्रम की ओर जाने वाली सड़क पर अचानक गतिविधिया बढ़ गईं. सायरन बजाते हुए एंबुलेंस हमारे पास से गुजरी. पुलिस की गाड़ियां और बसें उसके पीछे लगी थीं.
कुछ क्षण बाद ही यह ख़बर फैल गई कि स्वयंभू संत रामपाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके गिरफ्तारी की पुष्टि की.
'बाबा ने ख़ुद गिरफ़्तारी दी'
हालांकि अधिकारी उन्हें गिरफ्तार करने का दावा कर रहे थे. लेकिन उनके अनुयायियों के संपर्क में जो लोग थे, उनका कहना था कि बाबा ने स्वयं गिरफ्तारी दी है.

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उनके समर्थकों के मुताबिक आश्रम के बाहर इंतज़ार कर रहे पुलिस अधिकारियों से मिलने के लिए क़रीब नौ बजे रामपाल आश्रम के मुख्य द्वार से पांच लोगों के साथ बाहर.
पुलिस अधिकारी स्थानीय नेताओं के ज़रिए उन पर आत्मसमर्पण का दबाव बना रहे थे. अंतत: उन्होंने किया भी वही.
मेडिकल जांच के लिए पुलिस चुपके से उन्हें एक एंबुलेंस से अस्पताल ले गई. गुरुवार को उन्हें चंडीगढ़ की अदालत में पेश किया जाएगा.
गांववासी ख़ुश

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उनके गिरफ्तारी की ख़बर आने के बाद ग्रामीण सड़क पर उतर आए. वो पुलिस के समर्थन में नारे लगाने लगे. ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई की तारीफ़ की.
आश्रम के आसपास के ग्रामीणों ने इस स्वयंभू संत के बारे में बहुत कुछ देखा-सुना है. वो इस नाटक का अंत चाहते थे.
कुछ गांव वालों ने मुझसे कहा कि आश्रम के पास जमा भारी भीड़ रोज़ सरकार का मज़ाक बना रही थी. इस स्वयंभू संत के पास हथियारबंद लोगों की एक बड़ी निजी सेना थी.
शाम को ग्रामीणों के एक समूह ने पुलिस बैरीकेड के बाहर पार्क की गईं आश्रम की कारों और बसों में जमकर तोड़फोड़ की, इससे वहाँ मौज़ूद किसी व्यक्ति को आश्चर्य नहीं हुआ.

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ये इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि ग्रामीण स्वयंभू संत और उनके आश्रम को पसंद नहीं करते हैं. उनमें से कई लोगों ने मुझे बताया कि वो चाहते थे कि बाबा गिरफ्तार हों.
बाबा की गिरफ्तारी की ख़बर पाकर वो बहुत ख़ुश थे.
भक्तों को मुक्त कराने का काम
हालांकि दिन में इस बात के संकेत नहीं मिल रहे थे कि पुलिस स्स्वयंभू बाबा को गिरफ्तार कर पाएगी.
उनके सैकड़ों भक्त आश्रम से बाहर आए. लेकिन स्वयंभू बाबा और उनके हथियारबंद लोगों का कोई सुराग नहीं था. पुलिस एक और दिन वहां डंटे रहने की तैयारी कर रही थी.
एक अधिकारी ने मुझे बताया था कि वो आश्रम में नहीं घुसेंगे, क्योंकि इससे वहाँ झड़प हो सकती है. इससे आश्रम में फंसे हुए भक्तों को नुक़सान पहुंच सकता है.
पुलिस का काम अभी ख़त्म नहीं हुआ है. हो सकता है कि पुलिस स्वयंभू बाबा के हथियारबंद दस्ते को बाहर निकालने और बाबा के समर्थकों की ओर से ढाल के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे भक्तों को मुक्त कराने के लिए आश्रम में प्रवेश करे.
ऐसे में गुरुवार भी एक लंबा दिन हो सकता है.
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