छत्तीसगढ़ः धान की कीमत पर तलवारें खिचीं

छत्तीसगढ़, धान की राजनीति

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    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीद के मामले में राजनीति गरमा गई है.

सरकार अभी तक 1,345 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदती रही है. पिछले साल सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 2,100 रुपए करने का वादा किया था.

समर्थन मूल्य तो बढ़ा नहीं, उल्टे सरकार ने तय कर दिया कि प्रति एकड़ केवल 10 क्विंटल धान ही ख़रीदा जाएगा.

छत्तीसगढ़, धान की राजनीति

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कांग्रेस इस मुद्दे पर महीने भर से लगातार धरना-प्रदर्शन करती रही है. अब पार्टी ने धान खरीद के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस एक नवंबर को राज्य में आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा की है.

बहिष्कार

पार्टी ने राज्य सरकार के आयोजनों में मुख्यमंत्री व दूसरे मंत्रियों के साथ मंच साझा नहीं करने का भी निर्णय लिया है और उनके घेराव का भी ऐलान किया है है.

वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार सरकार ने समर्थन मूल्य पर 4.63 लाख मीट्रिक धान खरीदा था. यह आंकड़ा पिछले साल तक लगभग 80 लाख मीट्रिक टन हो गया था.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव कहते हैं, "सरकार ने किसानों से एक-एक दाना धान ख़रीदने का दावा किया था और चुनावी घोषणा पत्र में धान का समर्थन मूल्य 2100 करने की बात कही थी. लेकिन सरकार इससे मुकर गई."

छत्तीसगढ़, धान की राजनीति, कांग्रेस प्रदर्शन

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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल का तर्क है कि जो सरकार जनभावनाओं के ख़िलाफ़ हो, उसके आयोजन में भागीदारी करना जनता के ख़िलाफ़ जाना है.

'दिखावे की राजनीति'

छत्तीसगढ़, धान की राजनीति, भूपेश बघेल

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राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह विपक्षी दल के इस 'बहिष्कार' को हास्यास्पद मानते हैं. वह कहते हैं कि कांग्रेस विकास का विरोध कर रही है.

रमन सिंह कहते हैं, "जो काम हिंदुस्तान में कहीं नहीं होता, छत्तीसगढ़ में होता है. हिंदुस्तान के सारे राजनीतिक दल केंद्र में एक साथ खड़े होते हैं. प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में आते हैं और मैं तो सबको आग्रहपूर्वक बुलाता हूं. ऐसे में कांग्रेस का बहिष्कार समझ से परे है."

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लेकिन सत्ता और विपक्ष के इन दावों से अलग किसान नेता धान की राजनीति पर दोनों ही दलों को आड़े हाथों लेते हैं.

किसान नेता आनंद मिश्रा का कहना है कि दोनों ही पार्टियां दिखावे के लिए विरोध की राजनीति कर रही हैं. धान उपजाने वाले किसानों की हालत खराब है और वे आत्महत्या की राह पर हैं. इसकी चिंता किसी को नहीं.

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