एक दंगा जिसने बदल दी बिहार की सियासत

इमेज स्रोत, Pravir
- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, भागलपुर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पच्चीस साल हो गए हैं जब 1989 में अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में बिहार के भागलपुर शहर और इसके आस-पास दंगे शुरू हुए थे.
जानकार मानते हैं कि इसने बिहार के साथ-साथ भारत की राजनीति पर भी गहरा असर छोड़ा.
भागलपुर दंगों ने राजनीति और समाज पर क्या असर डाला, पढ़िए भागलपुर दंगों पर बीबीसी हिंदी की विशेष श्रृंखला की आख़िरी कड़ी में.
मनीष शांडिल्य की रिपोर्ट
भागलपुर का दंगा 1947 के बाद बिहार के इतिहास में सबसे बड़ा दंगा था. इस दंगे ने पुराने राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को झकझोर दिया.
वरिष्ठ पत्रकार सुरूर अहमद दंगे को 'सांप्रदायिक भूकंप' की संज्ञा देते हैं.

इमेज स्रोत, Manish Shandilya
उनके अनुसार इस घटना के कारण ही तब देश से लेकर प्रदेश तक कई नए राजनीतिक समीकरण उभरे और फ़ैसले लिए गए.
वह कहते हैं, "अगर यह दंगा नहीं होता तो शायद लालू प्रसाद यादव बिहार में यादव-मुस्लिम समीकरण नहीं बनाते. शायद तत्कालीन प्रधानमंत्री मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू नहीं करते."
राजनीतिक असर

इमेज स्रोत, Pravir
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता उदय भागलपुर दंगे को एक प्रयोग के रूप में देखते हैं. उनके अनुसार इस प्रयोग के परिणाम अब सामने आ रहे हैं.
उदय कहते हैं, "पिछले दिनों केंद्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी की जीत ने यह साबित कर दिया है कि अल्पसंख्यकों के समर्थन के बिना भी सत्ता हासिल की जा सकती है. ऐसी राजनीति की नींव भागलपुर दंगे के दौरान रखी गई थी और आज उसे विस्तार मिला है."
अस्सी के दशक के अंत में जब ये दंगे भड़के थे तब बिहार में कांग्रेस की सरकार थी. राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र सुमन मानते हैं कि कांग्रेस ने इन दंगों की बड़ी राजनीतिक क़ीमत चुकाई है.

इमेज स्रोत, Other
1989 के भागलपुर दंगे के बाद भारत की बड़ी राजनीतिक घटनाओं में भाजपा द्वारा राम मंदिर अंदोलन चलाना और बाबरी मस्जिद का ध्वंस शामिल है.
नई सोशल इंजीनियरिंग
सुमन कहते हैं, "कांग्रेस ने इन घटनाओं के प्रति जैसा राजनीतिक रुख़ अपनाया, उसने भागलुपर दंगे की पृष्ठभूमि में बिहार में मुसलमानों को बड़े पैमाने पर कांग्रेस से दूर कर दिया."
उनके मुताबिक़ उस समय जिन राजनीतिक दलों ने धर्मनिरपेक्षता को अपना प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बनाया उन्हें मुसलमानों का व्यापक समर्थन मिला.
तब लालू प्रसाद यादव ऐसी राजनीतिक और सामाजिक पहल करने में सबसे आगे रहे थे.

इमेज स्रोत, Manish Shandilya
दूसरी ओर यह भी माना जाता है कि इस दंगे से राज्य और समाज ने कुछ सीखा भी और आज यह सीख उपलब्धि जैसी लगती है.
इस संबंध में भागलपुर के सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफ़ेसर फारुख़ अली का कहना है, "भारत के कुछ दूसरे हिस्सों की तरह सांप्रदायिक ताक़तों की पैठ बिहारी समाज में अब भी नहीं बन पाई है. ऐसा इस कारण मुमकिन हुआ क्योंकि बिहारी समाज ने भागलपुर दंगों से सीख हासिल की है.
राजनीतिक अवसर

इमेज स्रोत, Manish shandilya
भागलपुर दंगों के बाद बिहार में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ है. महेंद्र सुमन इसे बिहार जैसे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानते हैं जहां मुसलमानों की बड़ी आबादी रहती है.
साथ ही उनका कहना है कि भागलपुर दंगों के बाद के दौर में मुसलमानों को राजनीतिक रूप से ज़्यादा मौके मिले हैं.
वह बताते हैं कि बिहार की राजनीति में ऐसा पहले नहीं था.
भागलपुर दंगों ने न सिर्फ राजनीतिक और सामाजिक रूप से देश एवं समाज को प्रभावित किया बल्कि इस घटना ने 90 के दशक में हुए बड़े बदलावों को भी गति प्रदान की.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












