जींस पर टिप्पणी कर घिरे गायक येसूदास

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गायक येसूदास के उस बयान पर विवाद खड़ा हो गया है जिसमें उन्होंने कहा था महिलाओं का जींस पहनना भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ है.
येसूदास ने त्रिवेंद्रम में गुरुवार को एक ग़ैरसरकारी संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहा, ''महिलाओं को जींस नहीं पहनना चाहिए और दूसरों को परेशानी में नहीं डालना चाहिए. उन्हें थोड़े संयम के साथ कपड़े पहनने चाहिए और पुरुषों की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए.''
येसूदास ने कहा था, ''जो भी ढंका जा सकता है, उसे ढंका जाना चाहिए. जो छिपाया गया है, हम उसकी प्रशंसा करते हैं, यह हमारी सभ्यता है.''
उनका विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि यह <link type="page"><caption> बयान </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/05/120509_decent_clothes_aa.shtml" platform="highweb"/></link>जानबूझ कर दिया गया है.
महिला संगठनों का विरोध
राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी सीपीएम के महिला संगठनों ने उनके इस बयान की निंदा करते हुए इसे दुखद बताया है. उन्होंने येसूदास से अपना बयान वापस लेने औरमहिलाओं से माफी मांगने की मांग की है.
कांग्रेस के महिला संगठन की अध्यक्ष बिंदु कृष्णा ने इसे अधकचरा और अश्लील बयान बताया.

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जबकि माकपा के महिला संगठन आल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमेंस एसोसिएशन की अध्यक्ष टीएन सीमा ने कहा कि इसमें विकृति की बू आती है. उन्होंने कहा कि इस बयान से राज्य में लैंगिक समानता की उपलब्धियों को नुक़सान पहुँचा है.
कृष्णा ने कहा, ''ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्ति के मुंह से इस तरह की बात सुनना चौंकाने वाला है. आज के आधुनिक समय और सभ्य समाज में कोई भी व्यक्ति इसे स्वीकार नहीं करेगा.''
सेलिब्रेटी का बयान
बिंदु कृष्णा ने कहा कि सेमिनार महिलाओं पर ड्रेस कोड लागू करने के विषय पर नहीं था. येसूदास अपना भाषण खत्म कर कुर्सी पर बैठ चुके थे. लेकिन वो एक बार फिर माइक पर आए और इस तरह का भड़काऊ बयान दिया.

राज्य सभा सदस्य टीएन सीमा ने कहा,'' जब एक सेलिब्रेटी इस तरह का बयान देता है तो बहुत से लोग उस पर ध्यान देते हैं. आपको याद रखना चाहिए कि महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की लड़ाई में केरल का लंबा इतिहास है.''
सीमा ने बीबीसी से कहा, '' अतीत में हम इस तरह के बयान मोहन भागवत जैसे लोगों के मुँह से सुनते आए हैं. लेकिन अगर यह सांस्कृतिक रूप से प्रतिष्ठित व्यक्ति का नज़रिया है तो, वास्तव में चौकाने वाला है.''
इस सेमिनार का आयोजन इंडो-अरब कल्चर सेंटर ने महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर आयोजित किया था.
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