कश्मीर: बाढ़ का पानी घटा, लाखों अब भी फँसे हैं

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भारत प्रशासित कश्मीर में छह दिन पहले आई बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे कम हो रहा है.
सेना और दूसरी सहायता एजेंसियों ने एक लाख 10 हज़ार से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया है.
अब भी पांच लाख से ज़्यादा लोग राज्य के अलग-अलग इलाक़ों में फंसे हुए हैं और राहत सामग्री का इंतज़ार कर रहे हैं.
मृतकों की संख्या बढ़ेगी
सेना भी मान रही है कि अभी भी कई इलाक़ें हैं जहां तक वो नहीं पहुंच सकी है.
इस बीच बाढ़ में मरने वालों की संख्या का सही आकलन नहीं हो पा रहा है.

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कम के कम 200 लोगों के मारे की पुष्टि हो चुकी है और आशंका है कि ये संख्या अधिक भी हो सकती है.
पुलवामा से श्रीनगर पहुंचे इरशाद अहमद बट ने बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली से अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, ''हमारी गर्भवती बहन चार दिन श्रीनगर अस्पताल में भर्ती हुईं थीं. उनके साथ उनके शौहर और उनकी मां थी. हम उन्हीं को ढूंढने श्रीनगर आए थे लेकिन अभी तक उनका कुछ नहीं पता चल सका है.''
उधर राहत कार्यों की धीमी रफ़्तार के आरोपों के बीच केंद्रीय गृहसचिव अनिल गोस्वामी गुरूवार को स्वंय श्रीनगर पहुंचे और राहत कार्यों का जायज़ा लिया.
'सरकार थी ही नहीं'
राज्य सरकार की लगातार हो रही आलोचना का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने भारत के निजी टीवी चैनल एनडीटीवी से बातचीत करते हुए कहा कि पहले कुछ घंटों तक तो जम्मू-कश्मीर में कोई सरकार ही नहीं थी.
उमर का कहना था,''मेरी राजधानी (श्रीनगर) चली गई थी. मेरी सरकार पूरी तरह जलमग्न हो गई थी. मेरे पास पहले 36 घंटों तक कोई सरकार नहीं थी. मैंने उसके बाद एक कमरे में छह अधिकारियों के साथ सरकार का काम फिर शुरू किया.''
लेकिन एक अच्छी बात है कि घाटी में टेलीफ़ोन लाइन बहुत हद तक बहाल हो गई हैं.
टेलीफ़ोन लाइनें बहाल
बीएसएनएल के निदेशक अनुपम श्रीवास्तव ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि कश्मीर घाटी में 90 मोबाइल टावरों ने दोबारा काम करना शुरू कर दिया है.

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श्रीवास्तव के अनुसार बीएसएनएल ने राहत शिविरों में पीसीओ स्थापित करेगी जहां मुफ़्त सेवाएं दी जाएंगी.
निजी टेलीफ़ोन कंपनियों ने भी अपने नेटवर्क को बहाल करने का दावा किया है.
नौसेन के मरीन कमांडोज़ को श्रीनगर में पानी के बीच रास्ता बनाने का काम सौंपा गया है ताकि बाढ़ में फंसे लोगों को निकाला जा सके.
बिजली की कमी
लेकिन बिजली की हालत में अभी भी कोई सुधार नहीं हुआ है.
श्रीनगर के अहमद अस्पताल ने कहा कि बिजली नहीं होने के कारण मरीज़ों का इलाज नहीं हो पा रहा है.
उनका कहना था,''पूरा अस्पताल सिर्फ़ दो जेनसेट की मदद से चल रहा है. कहीं से कोई मदद नहीं आ रही है. अस्पताल में पानी भी नहीं हैं. हमलोग बेडशीट फाड़कर सर्जरी के लिए उसका इस्तेमाल कर रहे हैं.''
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