अग्निपरीक्षा में पास लालू-नीतीश की जोड़ी

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- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, हाजीपुर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
बिहार विधानसभा के उपचुनाव में जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के महागठबंधन ने एनडीए पर जीत हासिल की है.
यह महज़ इत्तफ़ाक़ है कि सोमवार को पिछड़ी जातियों को सरकारी नौकरी में आरक्षण की सिफ़ारिश करने वाले बीपी मंडल की जयंती है और इन नतीजों से बिहार में पिछड़ी जातियों के रहनुमा समझे जाने वाले लालू और नीतीश शायद और ताकतवर होकर उभरेंगे.
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राजद-जदयू-कांग्रेस गठबंधन को 10 में से जहां छह सीटों पर जीत मिली है वहीं एनडीए के खाते में केवल चार सीटें मिल पाईं.
भाजपा को अपनी चार पुरानी सीटों छपरा, भागलपुर, जाले और मोहिउद्दीनगर पर हार का सामना करना पड़ा है.
छपरा सीट पर तो भाजपा तीसरे स्थान पर खिसक गई. उसने छपरा, मोहिउद्दीनगर को राजद के हाथों गंवाया, भागलपुर सीट पर उसे कांग्रेस से हार मिली और जाले पर जनता दल यूनाइटेड से.
छपरा और भागलपुर से विधायक रहे जर्नादन सिगरीवाल और अश्विनी चौबे लोकसभा के लिए चुने गए हैं.
हालांकि भाजपा ने जदयू से मोहनियां और राजद से बांका सीट छीनी है. भाजपा ने इन दोनों सीटों के अलावा नरकटियागंज और हाजीपुर में भी जीत हासिल की.
राजद तीन, जदयू दो

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जिन 10 सीटों पर उपचुनाव हुआ उनमें से तीन सीटें राजद के विधायकों के इस्तीफ़े के कारण खाली हुई थी.
इनमें से गठबंधन के तहत राजद की परबत्ता सीट जदयू के खाते में चली गई थी. वहीं बांका सीट पर उसे हार का सामना करना पड़ा और राजनगर की अपनी पुरानी सीट बचाने में राजद कामयाब रहा.
उपचुनाव वाले दस सीटों में से जदयू के पास पहले केवल मोहनियां की सीट थी. मोहनियां की सीट भाजपा के हाथों गंवाते हुए जदयू जाले और परबत्ता की सीटें जीतने में कामयाब रहा.
कांग्रेस ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा था और वह भागलपुर जीतने में कामयाब रही.

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कांग्रेस और भाजपा के बाद भागलपुर सीट पर मतदाताओं ने नोटा (नन ऑफ़ द अबव) विकल्प को चुना.
वाम मोर्चा जाले विधानसभा सीट के अलावा कहीं भी मज़बूत उपस्थिति जताने में कामयाब नहीं रहा.
संकेत और संदेश
लालू और नीतीश ने कांग्रेस को साथ लेकर भाजपा विरोधी जो राजनीतिक मोर्चा बनाने का प्रयोग किया है वह अपनी पहली चुनावी परीक्षा में सफल साबित हुआ दिखता है.
लालू-नीतीश की सफलता अब बाकी उत्तर और पूर्व भारत की राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है.

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इस उपचुनाव में जीत ने इन दोनों नेताओं के पिछड़ी जातियों के बड़े नेता होने की फिर पुष्टि की है.
साथ ही लालू-नीतीश की जीत ने यह भी साबित किया है कि बिहार में एनडीए को लोकसभा चुनावों में मिली जीत के पीछे अहम वजह 'मोदी लहर' के अलावा वोटों का बिखराव भी थी.
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