यौन शोषण: 'जज' पर महाभियोग चले

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक जज पर एक महिला जज के यौन शोषण के आरोप लगने के बाद उन पर महाभियोग चलाए जाने की मांग की गई है.
ये मांग पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह, वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर और इतिहासकार उमा चक्रवर्ती समेत कई महिला आंदोलनकारियों ने की है.
आरोप लगाने वाली ग्वालियर की महिला जज ने अपने पद से ये कहते हुए इस्तीफा दिया कि उनकी सुनवाई कहीं नहीं हुई.
अब उन्होंने यौन शोषण के आरोपों के बारे में भारत के मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखकर बताया है कि “मुझे अपनी अस्मिता, ख़ुद्दारी और अपनी बेटी के करियर को बचाने के लिए बेहद मजबूरी में शर्मसार होते हुए इस्तीफ़ा देना पड़ा.”
वहीं जिस जज पर आरोप लगाए गए हैं, उन्होंने भी मध्य प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा है. इसमें सभी आरोपों से इनकार करते हुए उन्होंने लिखा है, “अगर ये आरोप सच पाए जाते हैं, तो मुझे फांसी लगा दे दी जाए.”
न्यायपालिका में जजों की सुनवाई नहीं?

न्यायपालिका के क़ायदों में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के किसी भी जज के ख़िलाफ़ यौन शोषण की शिकायत की सुनवाई का प्रावधान नहीं है.
दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए इंदिरा जयसिंह ने कहा, “न्यायपालिका की ज़िम्मेदारी है कि इस केस को एक उदाहरण बनाते हुए महिला जज का इस्तीफ़ा नामंज़ूर कर उन्हें वापस काम पर रखना चाहिए और उस जज पर जांच बैठाकर, फ़ैसला आने तक उन्हें काम से हटाना चाहिए.”
पिछले महीनों में सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व जजों के खिलाफ़ कथित यौन शोषण के मामले सामने आए हैं.
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