जब नाग पंचमी के दिन दंगल में उतरे पहलवान

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- Author, रोहित घोष
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
कानपुर में नाग पंचमी के दिन दंगल आयोजित किए जाने की पुरानी परंपरा रही है.
गुरुवार को नाग पंचमी के दिन कानपुर के कई अखाड़ों में कुश्ती की प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं.
<italic><link type="page"><caption> (सुशील कुमार ने रचा इतिहास)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2010/09/100912_wrestling_sushilkumar_ap.shtml" platform="highweb"/></link></italic>
कानपुर के इतिहासकार मनोज कपूर कहते हैं कि जब अंग्रेज़ कानपुर में आ कर बसे थे तो शहर का विकास शुरू हुआ.

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अंग्रेजों ने यहां मिलें लगाईं जिनमें कानपुर के आस-पास के गाँवों के लोगों को काम मिला और वे लोग यहीं आकर बस गए.
<italic><link type="page"><caption> (गुरु-चेले का नया रिश्ता)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/11/101109_sushil_engagement_ar.shtml" platform="highweb"/></link></italic>
चूंकि कुश्ती गाँवों में प्रचलित थी तो कानपुर में आकर बसे लोगों ने यहाँ भी अखाड़े खोल लिए.

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यही कारण है कि कानपुर के पुराने इलाक़े जैसे कि लाठी मोहाल, कुली बाज़ार इलाक़ों में ज्यादातर अखाड़े हैं जहाँ बाहर के लोग सबसे पहले आकर बसे.
<italic><link type="page"><caption> (भारत में कुश्ती के रंग)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2012/02/120217_wrestling_picture_gallery_sa.shtml" platform="highweb"/></link></italic>
कुछ अखाड़े गंगा किनारे जैसे सत्ती चौरा घाट और भगवत दास घाट में भी है.

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लेकिन सवाल उठता है कि नाग पंचमी और दंगल का क्या संबंध है?
PGLकुश्ती के अखाड़े में पहलवानों का मेलाकुश्ती के अखाड़े में पहलवानों का मेलाकुश्ती में ताकत और होश दोनों की ज़रूरत होती है. स्विट्ज़रलैंड में हुई कुश्ती प्रतियोगिता में 300 से भी ज्यादा पहलवान शिरकत कर रहे थे. देखिए.2013-09-02T20:49:44+05:302013-09-04T14:51:36+05:30PUBLISHEDhitopcat2
मनोज कपूर कहते हैं कि आज से सौ डेढ़ सौ साल पहले मनोरंजन के कोई साधन तो थे नहीं.

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नाग पंचमी त्योहार के कारण छुट्टी का दिन होता था और त्योहार भी इतना बड़ा नहीं कि लोग सारा दिन व्यस्त रहे.
जैसे कि होली या दिवाली में के दिन होता है. अब सारा दिन करें तो क्या करें? तो दंगल आयोजित करवाए जाने लगे.

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दंगलों का आकर्षण बढ़ाने के लिए बड़े इनाम रखे जाने लगे.
एक समय था जब हज़ारों लोग कुश्ती मुक़ाबलों को देखने के लिए के लिए उत्सुक होते थे.

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लेकिन बदलते समय के साथ लोगों की दिलचस्पी दंगलों में काम होने लगी है.
पहले रेडियो फिर टीवी लोगों के मनोरंजन का साधन बन गए. कई अखाड़े बंद हो गए.
लेकिन जो अखाड़े बचे हैं, उनमें आज भी नाग पंचमी के दिन रौनक़ लौट आती है.
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