बंदरों को भगाने के लिए इंसान बने 'लंगूर'

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भारतीय संसद और दूसरी सरकारी इमारतों पर बंदरों की धमाचौकड़ी रोकने के लिए 40 लोग तैनात किए गए हैं जो लंगूरों के भेस में उनसे निपट रहे हैं.
लाल चेहरे वाले मकाक बंदरों को डराने के लिए ये लोग काले चेहरे वाले लंगूरों की तरह आवाज़ें निकालते हैं.
बगीचों और दफ़्तरों में उछलकूद करते और खाने के लिए लोगों पर हमला करते हज़ारों मकाक बंदर दिल्ली की गलियों में घूमते हैं.
पहले संसद भवन से बंदरों को दूर रखने के लिए असली लंगूरों का इस्तेमाल होता था.
लेकिन पशु अधिकारों के लिए काम करने वालों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद अब इस काम के लिए इंसानों को प्रशिक्षित किया गया है.
लंगूरों की नक़ल

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शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने संसद को बताया, "बंदरों और कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कई कोशिशें हो रही हैं. इन तरीक़ों में प्रशिक्षित लोगों के ज़रिए बंदरों को डराना शामिल है जो ख़ुद लंगूर के भेस में रहते हैं."
दिल्ली नगरपालिका के अधिकारियों के मुताबिक़ इस ‘बेहद क्षमतावान’ ग्रुप के लोग बंदरों और लंगूरों की तरह चीखते हैं और पेड़ों के पीछे छिपकर उन्हें भगाते हैं.
दिल्ली में आवारा बंदरों की बड़ी तादाद काफ़ी वक़्त से समस्या रही है.
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