कोई नई बात नहीं नेताओं के घर में जासूसी

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अंग्रेजी अख़बार में छपी एक खबर के अनुसार सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के घर अवैध रूप से सीक्रेट हाई पावर लिसनिंग डिवाइस बरामद हुई है.
इस ख़बर पर विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस और एनसीपी ने जांच की मांग की है लेकिन गृह मंत्रालय ने इससे इनकार कर दिया है.
लेकिन राजनीति के गलियारों में जासूसी एक पुराना मुद्दा है.
कुछ पर एक नज़र डाली हमारे संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने.
सबसे पहला मामला
वरिष्ठ पत्रकार पंकज वोहरा के अनुसार भारतीय सियासत में सबसे पहला जासूसी का मामला प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दफ़्तर में जासूसी का था, "यह बात है 1985 की. इस पर बहुत हंगामा हुआ था. 10 से ज़्यादा लोग गिरफ्तार किए गए थे लेकिन बाद में इस पर पर्दा डाल दिया गया."
लेकिन इससे भी पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी बहू और आज की भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के घर पर जासूसी करवाई थी.

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सीबीआई के एक दिवंगत वरिष्ठ अधिकारी एमके धर ने यह स्वीकार किया था कि इंदिरा गांधी के कहने पर उन्होंने जासूसी करवाई थी.
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के पर आरोप लगाया था कि वीपी सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में उनके खिलाफ ख़ुफिया 'लिसनिंग डिवाइस' लगवाया था.
वीपी सिंह सरकार ने इसका खंडन किया था लेकिन चंद्रशेखर उनसे हमेशा नाराज़ रहे.
जासूसी के कई मामलों पर रिपोर्टिंग करने वाले वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय कहते हैं, "लाल कृष्ण आडवाणी जी ने यूपीए शासन के दौरान ये आरोप लगाया था कि उनकी जासूसी हो रही है".

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इस पर संसद में काफी हंगामा हुआ और इसकी जांच करने की मांग की गई. लेकिन सरकार ने आडवाणी के आरोपों का खंडन किया और कहा जांच की ज़रूरत नहीं.
रक्षामंत्री एके एंटनी के दफ़्तर की जासूसी की ख़बर मार्च 2012 में जब सामने आई तो इस पर हंगामा हो गया. यह बात उस समय सामने आई, जब मिलिट्री इंटेलिजेंस के कुछ अफसर रक्षा मंत्री के दफ्तर का रुटीन चेक कर रहे थे.

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यह इस बात का संकेत था कि सरकार और सेना के बीच आपसी भरोसे की कमी है. रक्षा मंत्रालय की इस बात के लिए आलोचना की गई कि जांच मिलिट्री इंटेलिजेंस से क्यों नहीं कराई गई.
जून 2011 में उस समय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के दफ्तर में जासूसी का मामला सामने आया था. इसकी जांच के भी आदेश जारी किए गए लेकिन जासूसी के अन्य मामलों की तरह इस छानबीन का भी कोई नतीजा नहीं निकला.
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