गठबंधन को लेकर लालू से कोई बात नहीं: शरद यादव

शरद यादव
इमेज कैप्शन, वर्ष 2009 में 20 सीटें जीतने वाली जद (यू) दो सीटों में सिमट गई है
    • Author, राजेश जोशी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

जनता दल यूनाइटेड अध्यक्ष शरद यादव ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में इन ख़बरों का खंडन किया है कि उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से किसी धर्मनिरपेक्ष गठबंधन को लेकर बातचीत की है.

इससे पहले रिपोर्टों में शरद यादव के हवाले से कहा गया था कि वो बिहार में एक ‘धर्मनिरपेक्ष गठबंधन’ बनाने के लिए लालू यादव के साथ अपने असहमतियां ख़त्म करने के लिए तैयार हैं.

बीबीसी हिन्दी के दिनभर कार्यक्रम में शामिल हुए शरद यादव ने कहा, “यह बात झूठ है. हमने यह बात कही है कि हम रविवार को चार बजे बैठक करेंगे और नया नेता चुनेंगे. नीतीश ने जो त्याग का काम किया है, वह पार्टी ने तय किया है.”

शरद यादव ने पार्टी में किसी भी टूट-फूट से इनकार किया और कहा कि कोई भी विधायक पार्टी छोड़कर नहीं जाएगा.

आम चुनाव में बिहार में जेडीयू की करारी हार के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफ़े ने पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में 20 सीटें जीतने वाली जेडीयू इस आम चुनाव में दो सीटों तक सिमट गई है.

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा से मिलने वाली चुनौतियों पर शरद यादव ने कहा, “हमारे सामने पेश चुनौतियों से निपटने के लिए ही नीतीश ने यह क़दम उठाया है.”

बग़ावत

नीतीश कुमार

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इमेज कैप्शन, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को इस्तीफ़ा दे दिया.

<link type="page"><caption> नीतीश कुमार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/05/140517_nitish_resigns_aj.shtml" platform="highweb"/></link> के खिलाफ़ बहुत पहले से ही पार्टी में बग़ावत के सुर उभर रहे थे. पार्टी नेता नीतीश कुमार पर दूसरों के विचारों को नज़रअंदाज़ करने के आरोप लगाते रहे हैं.

जिस तरह लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने सिद्धांतों की दुहाई देते हुए <link type="page"><caption> भाजपा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/05/140517_narendra_modi_state_governments_tb.shtml" platform="highweb"/></link> से 17 साल पुराना गठबंधन ख़त्म करने का फ़ैसला किया, इस पर पार्टी के भीतर सवाल उठाए गए थे.

नीतीश के आलोचक सवाल पूछते हैं कि उनके सिद्धांत कहां गए थे, जब साल 2002 में गुजरात दंगों में 1000 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और मारे जाने वाले ज़्यादातर मुसलमान थे. तब भी वो भाजपा के साथ बने रहे लेकिन अब ऐसा क्या हो गया?

कुछ टीकाकारों के अनुसार नीतीश खुद को भावी प्रधानमंत्री के तौर पर देखते थे, तो कुछ के अनुसार वो अपने मुसलमान मतदाताओं को लेकर कुछ ज़्यादा ही संवेदनशील थे. मगर यह कहना ग़लत नहीं होगा कि नीतीश कुमार और उनके साथी लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से सन्न हैं.

उनके साथी चुनाव से पहले भाजपा से अलग होने के फ़ैसले पर तीखे शब्दों में सवाल उठा रहे थे और पार्टी फ़ोरम में विचार करने की बात कर रहे थे. इन सभी बातों के बीच शनिवार शाम ख़बर आई कि नीतीश कुमार ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

निराशा

लालू यादव

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इमेज कैप्शन, लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है.

नीतीश कुमार की आवाज़ में निराशा थी, चेहरा उतरा हुआ था, शब्द धीरे से निकल रहे थे. नीतीश ने बताया कि उन्होंने विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश नहीं की है और वैकल्पिक सरकार बनने का रास्ता खुला हुआ है.

लेकिन सवाल यह है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों पर उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा क्यों दिया?

जब नीतीश से पूछा गया कि अगर रविवार को होने वाली विधायक दल की बैठक में उन्हें दोबारा नेता चुन लिया जाता है, तो वह क्या करेंगे, तो इसका उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया.

उधर, जेडीयू प्रमुख शरद यादव ने कहा कि नीतीश कुमार दोबारा पद स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने भाजपा से संबंध तोड़ने के फ़ैसले को सही ठहराया.

उधर राष्ट्रीय जनता दल इस्तीफ़े को एक राजनीतिक क़दम बता रही है.

इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा, "ये सिर्फ़ राजनीतिक प्रदर्शन के आधार पर इस्तीफ़ा नहीं है. मेरा मानना है कि शायद उनका दल कुछ अंतर्विरोधों से जूझ रहा था, जिसके चुनाव के बाद ज़्यादा प्रकट होने की संभावना थी. संभवतः यह नीतीश कुमार का पहले से निर्धारित फ़ैसला हो सकता है."

नीतीश कुमार के इस्तीफ़े के बाद अब ये भी सवाल उठ सकते हैं कि जिन राजनीतिक दलों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है, उसके नेता अब क्या क़दम उठाते हैं.

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