कौन संभालेगा गुजरात में मोदी की कुर्सी?

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- Author, अंकुर जैन
- पदनाम, अहमदाबाद से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
आम चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी नेता नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की अटकलें तेज़ हो गईं हैं. दूसरी तरफ़ इस बात पर भी चर्चा होने लगी है कि अगर मोदी प्रधानमंत्री बन जाते हैं तो गुजरात का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा.
गुजरात में नरेंद्र मोदी का उत्तराधिकारी कौन होगा, इस दौड़ में जिन नामों की चर्चा है उनमें सबसे प्रमुख नाम, अमित शाह, आनंदीबेन पटेल, नितिन पटेल और सौरभ पटेल के माने जा रहे हैं. इनके अलावा कुछ नए चेहरे भी ऐसे हैं जिनके नामों पर चर्चा हो रही है.
नरेंद्र मोदी और भाजपा 16 मई को आने वाले नतीजों में अपनी जीत तय मान कर चल रहे हैं और गुजरात भाजपा की एक टीम और कुछ इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां 16 मई के जश्न की तैयारियों में जुट गई हैं.
जश्न की तैयारी
गुजरात भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया, "हमने भारत के कई शहरों में जश्न की तैयारी शुरू कर दी है. लेकिन अहमदाबाद में सबसे बड़ा जश्न होगा. साबरमती रिवरफ्रंट पर एक भव्य मंच के निर्माण का काम शुरू हो गया है. परेश रावल और स्मृति ईरानी को भी तैयारियों में लगाया गया है. उन्हें बॉलीवुड के सितारों और आर्टिस्टों को अहमदाबाद लाने का काम सौंपा गया है.''
उन्होंने बताया कि जहां भाजपा की हर जीती हुई सीट पर उम्मीदवार का विजय जुलूस निकलेगा, वहीं अहमदाबाद में कलाकारों के साथ के विजय उत्सव बनाया जाएगा.
लेकिन मोदी की जीत के लिए बन रहे मंडप में तोरण बांध रहे लोग अब मोदी की नहीं बल्कि गुजरात में उनकी कुर्सी संभालने वाले की चर्चा में मशगूल हैं.
मोदी 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने केशुभाई पटेल से कुर्सी हासिल की थी. अब मोदी की कुर्सी कौन लेगा, इस पर बहस शुरू हो गई है.
सोमवार देर शाम तक मोदी के बंगले पर चली बैठक में भी गुजरात के नए मुख्यमंत्री के नाम पर भी चर्चा हुई.
पिछले कई दिनों से नेताओं में राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनने की होड़ लगी हुई है.
अमित शाह

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मुख्य मुक़ाबला मोदी के सेनापति अमित शाह, उनकी क़रीबी माने जाने वाली राज्य की राजस्व मंत्री आनंदीबेन पटेल, राज्य के वित्त, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री नितिन पटेल और ऊर्जा और खनिज मंत्री सौरभ पटेल के बीच है.
इन चारों नेताओं ने अपने समर्थकों को अपने लिए समर्थन जुटाने का काम सौंप दिया है.
टिकट आबंटन का मामला हो या मंत्रालय बाँटने का निर्णय, अमित शाह और आनंदीबेन के बीच इसको लेकर मनमुटाव रहे हैं. इसे लेकर बीजेपी के भीतर कुछ लोग मान रहे है कि शाह आनंदी के नाम पर मोहर लगने में रोड़े डाल सकते हैं.
वैसे तो क़द में अमित शाह मोदी के बाद सबसे बड़े नेता हैं. लेकिन पार्टी के भीतर आनंदीबेन ज़्यादा स्वीकार्य चेहरा हैं.
आनंदीबेन पटेल

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हालांकि पार्टी के अंदर कई राय है. लेकिन आनंदीबेन पटेल सबसे बड़ी दावेदार बनकर उभरी हैं.
आनंदीबेन मोदी के बेहद नज़दीक मानी जाती हैं. मोदी जब चुनाव प्रचार में जुटे थे तब आनंदी, नितिन और सौरभ ही सरकार के अहम फ़ैसले ले रहे थे.
टीचर से नेता बनी आनंदी की राजनीति हमेशा से अपने सीनियर नेता के प्रति वफादारी वाली रही है. कुछ महीनों पहले उनके पति मफतभाई पटेल के आम आदमी पार्टी में शामिल होने की बात कही थी लेकिन बाद में उन्होंने इससे इनकार किया था.
आनंदीबेन मोदी के साथ 90 के दशक से काम कर रही हैं. वो केशुभाई पटेल की सरकार के समय से ही गुजरात सरकार में मंत्री हैं.
तीस साल तक स्कूल अध्यापक रहीं आनंदीबेन भाजपा से राज्यसभा सदस्य भी रही हैं.
राज्य के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने कहा, "गुजरात में मोदी का सबसे बड़ा वोट बैंक पटेल समाज है. मोदी एक पटेल नेता को हटा कर मुख्यमंत्री बने थे. अब उन पर यह दबाव है कि गुजरात में उनका उत्तराधिकारी पटेल ही हो. वहीं शाह पर लगे कई आरोपों की वजह से वो इस दौड़ से बाहर होते दिख रहे हैं."
वो कहते हैं, "मोदी के बाद सरकार के कामकाज को समझने का सबसे ज़्यादा अनुभव आनंदीबेन को है. उनकी छवि भी साफ़ है."
गुजरात भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो आनंदीबेन के नाम पर मोहर लग चुकी है.
भाजपा के एक नेता ने कहा," मोदी अगर एक महिला को मुख्यमंत्री बनाते हैं तो उनकी छवि और सुधरेगी. फिर आनंदीबेन उनकी विश्वासपात्र भी हैं."
सौरभ पटेल

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मोदी की टीम में सबसे पढ़े लिखे मंत्रियों में से एक हैं सौरभ पटेल. उन्होंने अमरीका से एमबीए किया है और वह अंबानी परिवार के रिश्तेदार हैं. उनकी शादी धीरूभाई अंबानी के भाई रमणीक भाई की बेटी और मुकेश और अनिल की चचेरी बहन के साथ हुई है.
इस रिश्ते पर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने सवाल भी उठाएं हैं क्योंकि वह मोदी के कैबिनेट में ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स, खान एवं खनिज, कुटीर उद्योग, नमक उद्योग, मुद्रण, स्टेशनरी, योजना, पर्यटन, नागरिक उड्डयन और श्रम एवं रोज़गार मंत्री हैं.
इस बार मोदी ने उन्हे अपनी वडोदरा सीट पर प्रचार की ज़िम्मेदारी सौंपी थी.
सौरभ पटेल के उद्योगपतियों, व्यापारियों और कुछ प्रभावशाली आध्यात्मिक संस्थाओं के साथ रिश्ते हैं और काम करने की सरल शैली के चलते वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर उभरे हैं.
नितिन पटेल

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उत्तर गुजरात से आने वाले नितिन पटेल 1985 से गुजरात भाजपा में सक्रिय हैं. गुजरात के वित्त, चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री नितिन ज़मीनी नेता हैं और उत्तर गुजरात में उनकी पकड़ मज़बूत है.
उनका कॉटन जिनिंग और तेल का व्यापार है. माना जा रहा है कि नितिन के मोदी और अमित शाह दोनों से अच्छे रिश्ते और सामाजिक कार्यकर्ता जैसी छवि के चलते वह मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल दूसरे लोगों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.
भीकूभाई दलसानिया
हालांकि इस दौड़ में पिछले दरवाज़े से दाखिल होने वाले भी कई लोग हैं जिनमें भीकूभाई दलसानिया पहले नंबर पर हैं.
आरएसएस प्रचारक रहने के बाद बीजेपी में आए दलसानिया इस समय गुजरात पार्टी के संगठन सचिव है.
जब 2001 में मोदी मुख्यमंत्री बने थे तब उन्होंने भी पिछले दरवाज़े से भाजपा में एंट्री ली थी.
दलसानिया 2001 से पार्टी की पकड़ गुजरात में मज़बूत बनाने का काम रहे हैं. उन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी की रणनीति और चुनाव प्रचार के काम को बखूबी संभाला है.
आरएसएस का आशीर्वाद
लेकिन मोदी के इरादे क्या हैं, उसका पार्टी अभी केवल अनुमान ही लगा सकती है.
मोदी की जगह कौन लेगा, इसका फ़ैसला क्या मोदी ख़ुद करेंगे या इसके लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की मंजूरी लेनी होगी?
गुजरात में पिछले क़रीब दो दशक में हर भाजपाई मुख्यमंत्री को आरएसएस का आशीर्वाद हासिल था. अगर इस बार भी ऐसा है तो माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर से कोई नया चेहरा (जो आरएसएस से हो) गुजरात के मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल हो सकता है.
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नितिन पटेल कहते हैं, "भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ही तय करेगा कि मोदी की जगह गुजरात में कौन लेगा. पर जो भी होगा वह मोदी के विकास कार्यों को गुजरात में आगे ले जाने वाला होगा."
इसके लिए आरएसएस का समर्थन ज़रूरी होगा, इस सवाल पर पटेल कहते हैं, "गुजरात में मोदी के कार्यकाल में किसान संघ हो या मज़दूर संघ सब मज़बूत हुए हैं. मोदी का निर्णय इन सबको मान्य होगा."
हालांकि मोदी हो या केशुभाई या फिर शंकर सिंह वाघेला, गुजरात की राजनीति के इन दिग्गजों को आरएसएस का आशीर्वाद हासिल था.
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