संतों की धरती पर नशे का कैंसर

- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, गुरदासपुर, पंजाब
ये पहली बार था जब मुझे पंजाब जाने का मौक़ा मिला और वो भी ऐन चुनाव के वक़्त. पंजाब के बारे में सुना था.
पंजाबी लोक गीतों का शौक शुरू से ही रहने की वजह से मेरे अंदर भी बड़ा उत्साह रहा कि आखिर पीरों, संतों और फकीरों की ज़मीन को करीब से देखने का मौक़ा मिलेगा.
<italic><link type="page"><caption> (किसानों को कैंसर का खतरा)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2008/05/080519_punjab_univ_research.shtml" platform="highweb"/></link></italic>
खेतों की खुशबू से रूह की गहराई तक सुकून महसूस करना और वो ज़मीन जो हरित क्रांति की गवाह सबसे पहले बनी उसे देखकर मेरा उत्साह बढ़ता रहा.
हरियाणा की सरहद पार करते ही एक अजीब सा अहसास होने लगा. नैशनल हाईवे पर कई जगहों पर मैंने देखा कि पुल और सड़क के निर्माण का काम ठप्प पड़ा हुआ है.
ढाबों पर चाय पीते हुए पता चला कि पंजाब की सरकार ने रेत के दाम बढ़ा दिए हैं.
बीता हुआ सपना

तरणतारण ज़िले के रहने वाले रंजीत सिंह ने बताया कि पहले एक ट्राली रेत जो दो हज़ार रुपए तक मिल जाया करती थी, अब उसकी कीमत 20 हज़ार रूपए हो गई है. बढ़ी हुई कीमतों की वजह से सारे निर्माण कार्य पूरी तरह से रुके पड़े हैं चाहे वो सड़क और पुल हों या फिर निजी मकान.
मगर ये सब कुछ यहीं ख़त्म नहीं होता. संपत्ति कर में भी बढोतरी ने कोढ़ में खाज का काम किया है.
<link type="page"><caption> </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130313_punjab_cancer_sukhman_vd.shtml" platform="highweb"/></link><italic><link type="page"><caption> (माँ को कैंसर हुआ...)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130313_punjab_cancer_sukhman_vd.shtml" platform="highweb"/></link></italic>
लहलहाती फसलें, दूर-दूर तक खेतों का सिलसिला और वहां काम करते लोग. चारों तरफ हरियाली ही हरियाली. सवाल उठता है कि क्या पंजाब के लिए अब यह सब कुछ एक बीता हुआ सपना बनकर रह गया है?
यहाँ का परिदृश्य अब कुछ और ही है. दूर दूर तक वीरानियाँ. ख़ामोशी, उदासी और कसक.
कैंसर के लक्षण

तंदरुस्ती के लिए जाने जानी वाली इस मिटटी में अब कैंसर के लक्षण आम हो गए हैं. अनुमान है कि यहाँ औसत आयु सीमा अब 50 साल तक सिमट कर ही रह गई है.
<italic><link type="page"><caption> (यहाँ न पानी पीना चाहते हैं...)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130312_cancer_punjab_jajjal_ac.shtml" platform="highweb"/></link></italic>
माना जाता है कि भूमिगत जल के प्रदूषित होने की वजह से ऐसा हुआ है. दिनोंदिन कैंसर के मरीजों की संख्या बढती ही चली जा रही है.
अजनाला के सुलतान महल के पास रावी नदी के किनारे बसा है सरहद का गाँव कोट राज़दा. यहाँ के अवतार सिंह बताते हैं कि परिस्थितियाँ इतनी विकट हो गईं हैं कि लोगों में बड़ी बेचैनी है. वो कहते हैं, "पहले लोग पंजाब आते थे तो सेहतमंद होकर वापस जाते थे. आज यहाँ आते हैं तो कैंसर लेकर जाते हैं."
इस गाँव के लोगों की सबसे बड़ी परेशानी है कि उनके खेत रावी नदी के उस पार हैं जहाँ पकिस्तान की सरहद शुरू होती. अपने खेतों को सींचने उन्हें रोज़ नदी पार करनी पड़ती है. यहाँ रावी नदी पर कोई पुल नहीं है और इक्का दुक्का नौकाएं हैं जिसके सहारे वो आते जाते हैं.
नशे का प्रकोप

इस नदी पर पुल नहीं बन सकता क्योंकि ये सरहद है. इस लिए बरसात के दिनों में तो इन किसानों की मुश्किलें और भी बढ़ जाती हैं.
<italic><link type="page"><caption> (रोज 19 को निगलता है पंजाब में कैंसर)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130312_cancer_village_ac.shtml" platform="highweb"/></link></italic>
मगर सुदूर ग्रामीण अंचलों में नशे के बढ़ते प्रकोप ने कई आंगनों को सूना कर दिया है. नौजवान नशे की चपेट में आकर मर रहे हैं या फिर आत्महत्या करने पर मजबूर हैं. बचे लोगों पर कैंसर का खतरा मंडरा रहा है.
मेरा पहला पड़ाव था लुधियाना, जिसे पंजाब की सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी के नाम से जाना जाता है. क्या साइकिल की कम्पनियाँ, क्या कपड़े के कारखाने. यहाँ आकर उद्योग जगत के सिमटने का अहसास होने लगता है.
हालात एक जैसे

आंकड़ों की बात अगर करें तो पूरे पंजाब में पंद्रह हज़ार से ज्यादा उद्योग बंद हो चुके हैं. बाकी के बचे हुए बिजली की अनियमित आपूर्ति और बढ़ी हुई कीमतों से जूझ रहे हैं.
<italic><link type="page"><caption> (अब सांसें देंगी कैंसर का पता)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/03/130306_cancer_sk.shtml" platform="highweb"/></link></italic>
बिजली की अनियमित आपूर्ति की वजह से ही बेरोज़गारी भी बढ़ने लगी है. बठिंडा हो या गुरदासपुर या फिर अमृतसर के आस पास के इलाके, हालात सब जगह एक जैसे ही हैं. लोगों से बात कर इतना तो समझ में आया कि हुक्मरानों ने सिर्फ अपनी ही सोची.
ताक़त वालों ने एक के बाद एक व्यवसायों को अपने अधीन कर लिया और जनता को ऐसे चौराहे पर पहुंचा दिया है जहाँ से उन्हें कुछ सुझाई नहीं देता. मगर संतों, पीरों और फकीरों की इस सरज़मीन के लोगों को फिर भी एक आस है.
वो समझते हैं कि एक दिन हालात फिर बदलेंगे और पंजाब फिर लहलहाते खेतों और खुशहाली के लिए जाना जाएगा क्योंकि बाबा बुल्ले शाह ने कहा था, "चढ़दे सूरज ढलदे वेखे, बुझदे दीवे बल्दे वेखे; हीरे दा कोई मोल ना तारे, खोटे सिक्के चलदे वेखे; जिना क़दर ना कित्ती यार दी 'बुल्लेया' हथ खाली ओ मलदे वेखे."
<italic><bold>(बीबीसी हिन्दी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold></italic>












