जासूसी की जाँच नहीं चाहती महिला

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गुजरात जासूसी कांड में एक दिलचस्प मोड़ आया है, जिस महिला की गतिविधियों पर नज़र रखी जा रही थी उसने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दी है कि केंद्र सरकार को मामले की जाँच कराने से रोका जाए.
मीडिया में इस मामले की चर्चा 'स्नूपगेट' या 'साहेब प्रकरण' के नाम से हो रही है, प्रधानमंत्री पद के भाजपा के दावेदार नरेंद्र मोदी और उनके निकट सहयोगी अमित शाह इस मामले में आरोपों के घेरे में हैं.
महिला और उनके पिता ने सुप्रीम कोर्ट में जो अर्ज़ी दी है उसमें कहा गया है कि किसी भी तरह की जांच कराए जाने से उनकी निजता का उल्लंघन होगा.
अदालत इस मामले पर अगले शुक्रवार को विचार करेगी, सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने कहा कि सभी पक्षों को सुने बिना जाँच रोकने का आदेश देना ठीक नहीं होगा.
जस्टिस रंजना देसाई और जस्टिस एनवी रामन्ना ने इस मामले में गुजरात सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर शुक्रवार तक जवाब माँगा है.
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किया है कि मीडिया महिला का नाम या पहचान ज़ाहिर न करे.
मामला
यह मामला तब सामने आया जब 2009 में फ़ोन पर कई बार हुई बातचीत गुजरात के एक पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जीएल सिंघल ने रिकॉर्ड कर ली.
इस रिकार्डिंग में एक व्यक्ति पुलिस अधिकारी से यह कहते सुना जा सकता है कि 'साहेब' ने एक लड़की की गतिविधियों पर हर पल नज़र रखने को कहा है.
इसके बाद आरोप लगे कि टेप में 'साहेब' गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे और फ़ोन पर पुलिस अधिकारी को निर्देश देने वाले व्यक्ति अमित शाह थे.
जवाब में भाजपा ने कहा था कि महिला के पिता नरेंद्र मोदी के परिचित थे, अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर आशंकित थे और उनके आग्रह पर ही महिला की सुरक्षा के लिए उनकी निगरानी की जा रही थी.
विरोध
दो दिन पहले जब कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं ने इस मामले की जाँच के लिए जज नियुक्त करने की बात कही थी तो भारी हंगामा खड़ा हो गया था, उसके अगले दिन केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार ने इसमामले की जाँचके लिए जज की तलाश बंद कर दी है.
सिब्बल ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा, ''हमारे सहयोगी दलों ने कहा कि यह एक राजनीतिक रंजिश जैसा लगता है. यह ठीक है. हम ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहते कि हमारी सरकार राजनीतिक रंजिश के तहत काम कर रही है.''
पिछले सप्ताह जब सरकार ने जासूसी मामले की जांच के लिए 16 मई से पहले जज नियुक्त करने की घोषणा की थी तो कांग्रेस के सहयोगी दलों ने इसका विरोध किया था, कांग्रेस पार्टी के भी कई नेताओं ने इसे ग़लत बताया था.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस बारे में फ़ोन किया था.
जबकि कांग्रेस के दूसरे सहयोगी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करके कहा था कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के कार्यकाल के अंतिम समय में जांच आयोग बिठाना बिल्कुल ग़लत है.
भाजपा ने कहा था कि जांच आयोग की कोई वैधता नहीं होगी और नई सरकार इस पर पुनर्विचार करेगी.
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