'बीजेपी में अलग-अलग सुर, सुनियोजित रणनीति है'

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- Author, नीरजा चौधरी
- पदनाम, राजनीतिक विश्लेषक, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
भारतीय जनता पार्टी नेता गिरिराज सिंह ने जो कहा है वो केवल 'हेट स्पीच' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता बल्कि ये बात उससे भी कहीं आगे जाती है. इसका संबंध भारतीय लोकतंत्र से है.
लोकतंत्र में विभिन्न विचार हों यही उसकी मज़बूती है लेकिन ये कहना कि अगर आप हमारे साथ नहीं हैं तो मुल्क छोड़ दीजिए एक बहुत ही ख़तरनाक़ क़िस्म का बयान है.
बिहार बीजेपी के नेता ने चंद दिनों पहले झारखंड की एक चुनावी सभा में कहा कि जो लोग नरेंद्र मोदी का विरोध कर रहे हैं उन्हें 16 मई के बाद पाकिस्तान जाना होगा.
<link type="page"><caption> भड़काऊ भाषण: गिरिराज सिंह के ख़िलाफ़ एफ़आईआर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/04/140420_bihar_giriraj_fir_ml.shtml" platform="highweb"/></link>
पार्टी की रणनीति
बीजेपी के इस बार के आम चुनाव के चार सूत्र हैं. पहला सूत्र है, मोदी को विकास पुरुष को रूप में पेश करना. उन्हें नए अवतार के रूप में लाया गया.
फिर विकास पुरुष के अवतार को सशक्त नेतृत्व के रूप में पेश किया गया. सशक्त नेतृत्व भाजपा का दूसरा सूत्र है.
<link type="page"><caption> गांधी के सपनों को पूरा करेंगे: राजनाथ</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/01/140118_bjp_national_meeting_election_sp.shtml" platform="highweb"/></link>
यूपीए-2 का नेतृत्व बेहद कमजोर था. न तो कोई जिम्मेदारियां ले रहा था और ना ही स्थितियों को संभाल पा रहा था. देश भर में एक चाह थी कि कोई आए और सब कुछ संभाल ले. उस खाली जगह को नरेंद्र मोदी को सशक्त नेता के तौर पर प्रस्तुत करके भरने की कोशिश की गई है.
तीसरे सूत्र को बहुत खूबी से परदे के पीछे से पिरोया गया और वो है ओबीसी या पिछड़ा कार्ड. भाजपा ने ओबीसी कार्ड खेला, खासकर उत्तर भारत में.
पार्टी ने देश भर में ये प्रचारित किया कि नरेंद्र मोदी मुल्क के पहले ओबीसी प्रधानमंत्री होंगे. बिहार और यूपी के ओबीसी समुदाय को ऐसा कहकर प्रभावित करने की कोशिश की गई. मोदी का चाय बेचने की पृष्ठभूमि भी उसी का हिस्सा है.
बीजेपी का कॉकटेल

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भाजपा का चौथा सूत्र, जो अब साफ तौर से सामने आ रहा है, वो है हिंदू-राष्ट्रवाद का मुद्दा फिर से उछालना.
उत्तर प्रदेश में भाजपा मुज्जफरनगर में हुए दंगों के मुद्दे को भुना कर ध्रुवीकरण कर रही है. इसके अलावा बार बार कुछ लोग, जैसे अमित शाह, बदले की बात कर रहे हैं.
<link type="page"><caption> मोदी के 'संकटमोचक' हैं अमित शाह</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/04/140408_amit_shah_gujarat_election2014spl_ap.shtml" platform="highweb"/></link>
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी अब मंदिर मुद्दे को वापस लाना चाहते हैं.
ऐसा करके हिंदू-मुस्लिम विभाजन की खाई को और चौड़ा करने की कोशिश की जा रही है. बीजेपी जो कॉकटेल पेश कर रही है वो इन सबका हिस्सा है. ये एक सुनियोजित रणनीति है.
<link type="page"><caption> 'ग़ैर-हिंदुत्व और हिंदुत्व' के बीच फंसी भाजपा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/04/140406_bjp_manifesto_sk.shtml" platform="highweb"/></link>
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