राष्ट्रीय 'अकेला' गठबंधन हो सकता है सत्ता में

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- Author, अविनाश दत्त
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड छाप वोटर ही नहीं, एक और बात है जो इन लोकसभा चुनावों को पिछले चुनावों से अलग बनाती है. परिणाम चाहे जो हों अगली सरकार बिना अकेलों के न बन सकती है न चल सकती है.
भारत में चुनावों के मेले में कई दल अपने-अपने नेता के पक्ष में लहर होने का दावा कर रहे हैं.
सोशल मीडिया के प्रेमी हर ईवीएम पर फ़ेसबुक और ट्विटर के चलते तहरीर चौक बनता देख रहे हैं. युवाओं में भविष्य का सपना संजोने वाले युवा लहर की बात कर रहे हैं.
इनमें से हर लहर मज़बूत है. लेकिन एक लहर ऐसी है जो किसी तूफ़ान से कम नहीं.
ये लहर है अकेलों की
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी, ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल के सर्वेसर्वा नवीन पटनायक, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके सुप्रीमो जे जयललिता और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती, इनमें से किसी ने शादी नहीं की है.
भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी भी कुंवारे समझे जाते थे लेकिन बुधवार को वडोदरा लोकसभा सीट के लिए अपने नामांकन पत्र के साथ दिए गए हलफ़नामे में उन्होंने पत्नी के नाम वाले स्थान पर जशोदाबेन लिखा. मोदी कई सालों से अपनी पत्नी के साथ नहीं रहते. और भी घोषित 'अकेले' हैं.
ये सभी 'अकेले' ना केवल अपनी-अपनी पार्टी का चेहरा हैं बल्कि अपनी-अपनी पार्टी के लगभग सर्वेसर्वा भी.

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इन 'अकेलों' के नेतृत्व वाली पार्टियां वो हैं जिनके बिना लोकसभा चुनावों की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
सबसे ताक़तवर
आज की तारीख़ में 'अकेलों' का गठबंधन बनना लगभग असंभव दिखता हो लेकिन राजनेता राजनीति में 'असंभव' शब्द का इस्तेमाल नहीं करते.
ये तमाम 'अकेलों' के नेतृत्व वाली पार्टियां भले ही एक साथ न हों लेकिन इन पार्टियों के बिना कोई भी सरकार बनना नामुमकिन है.
राहुल, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, जयललिता और मायावती किंग भले ना बनें लेकिन किंग मेकर तो बनेंगे ही.
वैसे ये अकेले भी अपनी क़ीमत पहचानते हैं और अपने 'अकेले' होने का लाभों की चर्चा जनता के सामने कर ही लिया करते हैं. चाहे राहुल गांधी या फिर मायावती वे लोगों को बता ही देते हैं कि उनके पास जनता के लिए जीने के अलावा कोई भी कारण नहीं है.
पहली बार भारतीय राजनीति के आसमान पर इतने अधिक 'अकेले' चमक रहे हैं भारतीय चुनावी राजनीति के अब तक के सबसे ऊँचे उठने वाले 'अकेले' हैं भारतीय जनता पार्टी के ही अटल बिहारी वाजपेयी.
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