साबिर अली के शामिल होने पर भाजपा में बवाल

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शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए जदयू के निष्कासित नेता साबिर अली ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से यह ग़ुजारिश की है कि पार्टी में उनकी सदस्यता तब तक के लिए टाल दी जाए जब तक कि वे अपने ख़िलाफ़ लगे आरोपों से बेदाग़ न हो जाएं.
भाजपा में उनकी सदस्यता को लेकर विवाद हो गया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ साबिर अली ने दावा किया है कि अगर चरमपंथी यासीन भटकल के साथ उनके रिश्ते की बात साबित होती है वह हमेशा के लिए राजनीति छोड़ देंगे.
अली ने कहा, "मैंने धर्मेंद्र प्रधान को एक पत्र लिखकर कहा है कि वे फ़िलहाल मेरी पार्टी सदस्यता टाल दें. मैंने अपने ऊपर लगे आरोपों की जांच के लिए एक समिति बनाने के लिए कहा है. अगर ये आरोप सच साबित होते हैं तो मैं हमेशा के लिए राजनीति छोड़ दूंगा."
नक़वी-साबिर आमने सामने
अली ने भाजपा नेता मुख़्तार अब्बास नक़वीको इन आरोपों को साबित करने की चुनौती देते हुए कहा है कि उन्होंने अपने सपने में भी भटकल को नहीं देखा है और उनके बारे में उन्हें अख़बारों से ही जानकारी मिली है.
उनका कहना था, "मैं उनसे इस बात को साबित करने को कहा है. अगर वह ऐसा नहीं कर पाते हैं तो उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए. मैं भी ऐसा करने के लिए तैयार हूं."
अली के पार्टी में शामिल होने के ख़िलाफ़ नक़वी ने अपनी आवाज़ बुलंद की थी और उन्हें भटकल का दोस्त बताते हुए यह व्यंग्य किया था कि अब दाउद इब्राहिम भी पार्टी में शामिल हो सकते हैं.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी अली के पार्टी में शामिल होने पर ऐतराज़ जताया है और इस वजह से भाजपा प्रमुख राजनाथ सिंह का विरोध भी किया था.
संघ भी नाराज़
आरएसएस के राष्ट्रीय प्रवक्ता राम माधव ने ट्वीट किया, "साबिर अली के पार्टी में शामिल होने की बात से भारी असंतोष पैदा हुआ है. इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ पार्टी के आम कार्यकर्ताओं और लोगों की भावनाओं से पार्टी नेतृत्व को अवगत कराया गया है."
नक़वी पार्टी के उपाध्यक्ष और पार्टी के जाने-माने मुस्लिम चेहरा हैं और उन्होंने भाजपा में अली के शामिल होने के क़दम को बड़ी भूल बताया और उसमें उन्होंने सुधार की मांग की.
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि साबिर अली की सदस्यता पर फ़ैसला बिहार इकाई की सिफ़ारिश पर किया गया था और इस मसले पर जो भी कार्रवाई होनी होगी वह सभी तथ्यों की जांच-पड़ताल के बाद ही की जाएगी.
भाजपा ने मुसलमानों को लुभाने के लिए अली को पार्टी में शामिल करने का फ़ैसला किया था.
नक़वी ने कहा था, "आज जो भी हुआ है उससे मुझे दुख पहुंचा है और मैंने अपने ग़ुस्से से पार्टी को वाक़िफ़ कराया है. जब भी पार्टी कोई ग़लत फ़ैसला करती है उसे उस फ़ैसले को बदलकर उसमें सुधार करना चाहिए."
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