गंगा में डुबकी अरविंद केजरीवाल को किस पार लगाएगी

इमेज स्रोत, AP
- Author, अतुल चंद्रा
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ आम आदमी पार्टी नेता <link type="page"><caption> अरविंद केजरीवाल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/03/140316_arvind_kejriwal_banaras_ap.shtml" platform="highweb"/></link> के वाराणसी में उतरने के साथ ही दोनों 'बाहरी' नेताओं के लिए तय हो गया है कि यहां लड़ाई इन्हीं दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच है.
इससे पहले वाराणसी के लोगों ने बाहरी प्रत्याशियों को लेकर यह कहते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी कि शहर के स्थानीय लोगों से उनका जुड़ाव नहीं होता है और उनमें शहर की बेहतरी के लिए कुछ करने की इच्छाशक्ति भी नहीं होती.
हालांकि बहुजन समाज पार्टी ने जो उम्मीदवार उतारा है वो स्थानीय है लेकिन उसके बावजूद उसे इसका कोई लाभ नहीं पहुंच रहा है.
विजय प्रकाश अग्रवाल इसी शहर के निवासी हैं और उन्हें 2009 लोकसभा चुनाव में 65,912 मत मिले थे.
अग्रवाल इस लड़ाई में कहीं नज़र नहीं आते, यहां तक कि बहसों में कोई उनका नाम भी नहीं लेता है.
गत 25 मार्च को बेनिया बाग़ में रैली को संबोधित करते हुए वाराणसी की शाही मस्जिद के इमाम मौलाना हसीन ने शहर के लिए कुछ न करने के लिए कांग्रेस के राजेश मिश्र की आलोचना की थी. यह शहर टूटी-फूटी सड़कों और अस्तव्यवस्त यातायात का प्रतिनिधि उदाहरण बना हुआ है.
<link type="page"><caption> बनारसः मोदी के सामने स्थानीय बनाम बाहरी का पेंच?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/03/140321_varanasi_elections_candidates_vr.shtml" platform="highweb"/></link>
स्थानीय बनाम बाहरी

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
कांग्रेस सांसद राजेश मिश्र स्वयं स्थानीय निवासी हैं और यहां से कांग्रेस के टिकट दावेदारों में से एक हैं.
2009 आम चुनाव में मिश्र को जायसवाल पर बहुत थोड़े मतों से बढ़त मिली थी. इन्हें 66,386 मत मिले थे.
केजरीवाल और मोदी के अलावा समाजवादी पार्टी के कैलाश चौरसिया भी बाहरी प्रत्याशी हैं और मिर्ज़ापुर से आते हैं.
इन तीनों बाहरी प्रत्याशियों में चौरसिया सबसे कमजो़र माने जा रहे हैं.
कांग्रेस की चुप्पी और समाजवादी पार्टी व बसपा के कमज़ोर प्रत्याशी लाए जाने से इस बात को हवा मिल रही है कि वाराणसी में मोदी के ख़िलाफ़ केजरीवाल आपसी सहमति वाले प्रत्याशी हो सकते हैं.
हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बात का जोरदार खंडन किया है कि कुछ दलों के बीच प्रत्याशियों के चुनाव के पीछे कोई आपसी सहमति है.
<link type="page"><caption> मोदी बनाम केजरीवालः काशी में जीत या मोक्ष?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/03/140316_modi_kejriwal_varanasi_analysis_vr.shtml" platform="highweb"/></link>
आपसी सहमति?

इमेज स्रोत, Reuters
कहा जा रहा है कि मोदी के ख़िलाफ़ किसी अन्य पार्टी से मजबूत प्रत्याशी के न होने से केजरीवाल की तरफ अल्पसंख्यकों का झुकाव बढ़ सकता है.
कम से कम तब तक, जबतक कांग्रेस अपने पत्ते नहीं खोलती है.
बेनिया बाग़ में मौजूद भीड़ से तो यह स्वाभाविक सा लगने लगा है, जहां भीड़ में बड़ी संख्या मुस्लिम आबादी की थी.
मौलाना हसीन ने केजरीवाल को 200 मुफ़्तियों के समर्थन का वादा किया. उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री की दिल खोल कर प्रशंसा भी की.
वहीं बनारस के निवासी मुफ़्ती मौलाना अब्दुल बतीन नोमानी ने बताया, ''अरविंद केजरीवाल को लेकर उत्साह है. ऐसा महसूस हो रहा है कि इस बार लोग इनको पसंद करेंगे.''
मौलाना नोमानी वाराणसी को नज़रअंदाज करने के लिए राजेश मिश्र और मुरली मनोहर जोशी के प्रति आलोचनात्मक दिखे.
लेकिन समाजवादी पार्टी के बारे में जो कुछ उन्होंने कहा वह ज़्यादा महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा, ''मुज़फ़्फ़रनगर और बाक़ी सैकड़ों दंगों के बाद समाजवादी पार्टी का असल चेहरा सामने आ गया है.''
केजरीवाल की रैली मैं मौजूद एक मुस्लिम ने कहा, ''इस बार सपा प्रत्याशी की जमानत भी ज़ब्त हो जाएगी.''
मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने के केजरीवाल के सवाल में बेनिया बाग़ में मौजूद करीब 15,000 लोगों की भीड़ ने 'हां' में जवाब दिया.
ध्रुवीकरण

इमेज स्रोत, AFP
और इसके साथ ही मतदाताओं के संभावित ध्रुवीकरण के साथ किन वादों पर लड़ाई लड़ी जाएगी, इसका भी मंच तैयार हो गया.
केजरीवाल की इस रायशुमारी के एक दिन बाद एक समाचारपत्र ने गंगा में डुबकी लगाने और मंदिर दर्शन करने के लिए उन्हें 'एक हिंदू से भी बड़ा हिंदू' के रूप में बताया.
सुबह केजरीवाल ने पूरे जोश के साथ खुद को प्रखर हिंदू होने का प्रदर्शन किया जबकि शाम तक उन्होंने टोपी पहन कर मुस्लिमों को लुभाने की कोशिश की.
यह ऐसी युक्ति है जिसे शायद मोदी को रोकने के लिए सामान्य तौर पर सभी राजनीतिज्ञ इस्तेमाल करते हैं, ताकि किसी विवाद की स्थिति में संतुलन स्थापित किया जा सके.
कहा जा रहा है कि देखना ये होगा कि इस बार वाराणसी के मतदाताओं के साथ उनकी यह चाल कामयाब होती है या केजरीवाल को अगले चुनाव तक इंतज़ार करना पड़ता है, जोकि उनके अनुसार, एक साल के अंदर ही होंगे.
<bold>(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पन्ने पर भी आ सकते हैं और <link type="page"><caption> ट्विटर </caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












