मैं कोई बंधुआ मज़दूर तो हूं नहीं: साबिर अली

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- Author, पंकज प्रियदर्शी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जनता दल यूनाइटेड पार्टी के प्रवक्ता और मुस्लिम चेहरा रहे साबिर अली मीडिया में हमेशा पार्टी की नीतियों की वकालत करते नज़र आए.
लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें शिवहर से पार्टी का टिकट भी मिला, पर उन्हें नरेंद्र मोदी की प्रशंसाके आरोपों के चलते पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है.
साबिर अली से इस बारे में हमने पूछा कि आख़िर हुआ क्या तो उन्होंने बताया, "हमने अब तक नरेंद्र मोदी की प्रशंसा नहीं की. हमसे किसी टीवी चैनल वाले ने पूछा कि देश का प्रधानमंत्री कैसा होना चाहिए. जवाब में हमने कहा देश का जो कुशल नेतृत्व कर सके, जो दूरअंदेशी हो, जो भ्रष्टाचार मुक्त हो और जो देश के युवाओं को रोज़गार दे सके. मैंने तो किसी का नाम नहीं लिया था."
ऐसे में उनकी पार्टी ने यह अंदाज़ा कैसे लगाया कि साबिर अली ने नरेंद्र मोदी की ही तारीफ़ की थी.
'सफ़ाई देने का मौक़ा नहीं'
इसके जवाब में उन्होंने कहा, "जब मन में ही खोट हो, तो निष्कर्ष अपने आप निकल आते हैं. दरअसल जनता दल यूनाइटेड को ऐसा मुस्लिम नेता चाहिए जो अपने हक़ की बात न करे, बल्कि टिश्यू पेपर की तरह बस इस्तेमाल हो और मैं कोई बंधुआ मज़दूर तो हूं नहीं."
यह भी माना जा रहा है कि राज्यसभा की सदस्यता दोबारा न दिए जाने से भी साबिर अली असंतुष्ट थे.
साबिर अली के मुताबिक़ पार्टी ने न तो उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया और न अपनी बात रखने का मौक़ा.
उन्होंने पार्टी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा, "जो लोग गिनती के वोट नहीं जुटा सकते, जिनकी कोई जमीनी पकड़ नहीं है, ऐसे लोगों के हाथों में सबकुछ दिया जा रहा है."

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उनका कहना था कि पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाने के लिए यह समय सबसे माकूल है.
भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड की राह अलग होने को साबिर अली ने केवल और केवल नीतीश कुमार काफ़ैसला बताया. उन्होंने कहा, "बीजेपी से अलग होने का फ़ैसला पार्टी नेतृत्व का था और पार्टी नेतृत्व का फ़ैसला सिर्फ़ उन्हीं का फ़ैसला होता है."
नीतीश पर सवाल
तो क्या पार्टी के अंदर राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव की भी कोई राय नहीं चलती. इस पर वह कहते हैं, "जार्ज फर्नांडीस जी का क्या हाल हुआ है, उससे भी बदतर हाल शरद जी का होने वाला है. मैं उनकी काफी इज़्ज़त करता हूं. लेकिन वे बस मोहर की तरह हैं. 40 साल के राजनीतिक जीवन के बावजूद वे पार्टी में मजबूरी में टिके हुए हैं."
कभी भारतीय जनता पार्टी के मुखर आलोचक रहे साबिर अली ने कहा कि बीजेपी और नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी राय बदल रही है.
उन्होंने कहा, "बीजेपी इस देश के बाहर की पार्टी तो नहीं है. यह नेपाल, श्रीलंका या पाकिस्तान की पार्टी तो नहीं है. उसकी भी नीति है और उसकी सरकार रही है."
बीजेपी से शिकायत नहीं

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भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की बात पर साबिर अली ने कहा कि उन्हें किसी पार्टी से कोई गुरेज़ नहीं है, लेकिन वे वहीं जाएंगे जहां अपनी बात रख सकें और उन्हें मान-सम्मान मिले.
माना जा रहा है कि साबिर अली भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं. वे जनता दल यूनाइटेड में रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी से आए थे.
हालांकि इस बार उनका लोकसभा चुनाव लड़ना मुश्किल लग रहा है. जनता दल यूनाइटेड से अब वे नहीं लड़ेंगे और दूसरी पार्टियों ने सभी सीटों के लिए टिकट जारी कर दिए हैं.
इस बारे में साबिर अली कहते हैं कि राजनीति में मौक़े कभी ख़त्म नहीं होते और वे तो अभी युवा हैं, लिहाज़ा मौक़े का इंतज़ार कर लेंगे.
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