राजीव हत्याकांडः दोषियों की रिहाई पर रोक

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को राजीव गांधी हत्याकांड मामले में दोषी चार लोगों की रिहाई के तमिलनाडु सरकार के फ़ैसले पर रोक लगा दी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार और चार कैदियों को उनके रिहाई के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार की दलील के मद्देनज़र नोटिस जारी किया है.
पिछले हफ़्ते सात में से तीन दोषियों मुरुगन, संथान और पेरारिवलान की रिहाई पर यह कहते हुए रोक लगा दी गई थी कि राज्य सरकार के फ़ैसले में प्रक्रियात्मक खामियां रह गई हैं.
मुरुगन, संथान और पेरारिवलान को शीर्ष अदालत से 18 फ़रवरी को फांसी की सजा आजीवन कारावास में बदलने से बड़ी राहत मिली थी. इसके अलावा जिन चार दोषियों की रिहाई की मांग तमिलनाडु सरकार कर रही थी वो थे नलिनी, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रविचंद्रन.
जस्टिस पी सथाशिवम की अगुवाई वाली तीन जजों की एक बेंच ने राज्य सरकार को मौत की सज़ा प्राप्त तीन दोषियों की सज़ा उम्रकैद में बदलने के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है और केंद्र सरकार से कहा है कि अन्य चार के मामले में रिहाई के ख़िलाफ़ पुनः याचिका दायर कर सकते हैं.
क़ानूनी प्रक्रिया
बेंच ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के सज़ा को माफ़ करने के अधिकारों का हनन नहीं किया गया है लेकिन राज्य सरकार को क़ानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा.
बेंच ने तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो हफ़्तों के अंदर जवाब मांगा है.
बेंच ने यह भी कहा कि मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने से जेल से कैदियों को रिहा होने का रास्ता साफ़ नहीं हो जाता है. जेल से रिहाई के लिए कानून में निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन करना होता है.

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दोषियों को भी दो हफ़्ते के अंदर नोटिस पर जवाब देने को कहा गया है और छह मार्च की सुनवाई के पहले दाखिल करने को कहा गया है.
इससे पहले तमिलनाडु सरकार के कैदियों को छोड़ने के फैसले के ख़िलाफ़ रोक लगाने के लिए केंद्र शीर्ष अदालत की शरण में गया था.
सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरन ने यह कहते हुए फ़ैसले को रोकने की दलील थी कि राज्य सरकार को कैदियों को रिहा करने की अनुमति तब तक नहीं देना चाहिए जब तक शीर्ष अदालत के द्वारा फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की समीक्षा याचिका पर कोई निर्णय नहीं ले लिया जाता.
फांसी की सज़ा को आजीवन कारावास में बदलने का आधार दया याचिका में देरी को बनाया गया है.
शीर्ष अदालत के द्वारा फांसी की सज़ा को आजीवन कारावास में बदलने के बाद जयललिता सरकार ने पिछले बुधवार को सातों दोषियों को रिहा करने का फ़ैसला लिया था.
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