राजीव हत्याकांड से जुड़े मामले में याचिका मंज़ूर

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में चार दोषियों को रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के फैसले के खिलाफ केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है.
समाचार एजेंसी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार की तरफ से दायर की गई याचिका पर 27 फरवरी को सुनवाई करेगा.
इससे पहले केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी थी जिसमें राजीव गांधी की हत्या के तीन दोषियों को रिहा करने की बात कही गई थी.
राजीव गांधी की हत्या के तीन अभियुक्तों पेरारिवलन, संथन और मुरुगन की दया याचिका के लंबे समय से लंबित रहने के कारण उनके मृत्युदंड को सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया गया था.
तमिलनाडु सरकार ने राजीव गांधी की हत्या के मामले में सात अभियुक्तों की रिहाई की घोषणा की थी. ये सात अभियुक्त हैं, पेरारिवलन, संथन और मुरुगन , नलिनी, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रविचंद्रन.
जयललिता सरकार ने यह घोषणा तब की थी जब सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्या मामले में तीन दोषियों पेरारिवलन, संथन और मुरुगन की फांसी की सजा को उम्र कैद की सजा में तब्दील कर दिया था.
फैसले पर पुनर्विचार
हालांकि यूपीए सरकार ने उस समय भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद तीनों दोषियों की रिहाई पर रोक लगा दी गई थी.
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा की भी मांग की है.
समीक्षा से जुड़ी याचिका तमिलनाडु सरकार के तीन दोषियों को रिहा किए जाने के फैसले पर शीर्ष अदालत द्वारा रोक लगा दिए जाने के कुछ घंटों के भीतर ही दायर की गई.
रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी नारायणस्वामी ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता से गुजारिश की थी कि वे राजीव गांधी की हत्या के तीन दोषियों को छोड़ने के अपने फैसले पर फिर से विचार करें.
संवाददाताओं से बातचीत करते हुए वी नारायणस्वामी ने कहा है कि पेरारिवलन, संथन और मुरुगन ने राजीव गांधी की हत्या के दोषी हैं. उन्होंने आगे कहा कि देश के एक महत्वपूर्ण नेता की हत्या के मामले में दोषियों को इस तरह से रिहा किए जाने से एक ग़लत मिसाल कायम होगी.
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