दशरथ मांझी से बहुत प्रेरणा मिलती हैः आमिर

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- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, गहलौर, गया से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
मशहूर अभिनेता और टेलीविज़न कार्यक्रम 'सत्यमेव जयते' के प्रस्तुतकर्ता आमिर ख़ान 25 फ़रवरी को पहुंचे बिहार के गया में गहलौर घाटी. इसके बाद से दिवंगत दशरथ मांझी, उनका परिवार और ‘ग़रीबों का ताजमहल’ यानी की गहलौर घाटी का काटा गया हिस्सा एक बार फिर चर्चा में है.
<link type="page"><caption> दशरथ मांझी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2014/02/140219_mumbai_dairy_aa.shtml" platform="highweb"/></link> यानी कि वह शख़्स जिन्होंने अपने दम पर पहाड़ का 360 फ़ीट लंबा और 30 फ़ीट चौड़ा हिस्सा काट कर रास्ता बनाया था.
गांव में ख़राब चिकित्सा सेवाओं के चलते दशरथ मांझी की पत्नी की मौत हो गई थी जिसके बाद उन्होंने गहलौर के पास पहाड़ी को काट पास के क़स्बों से गांव की दूरी कम करने का फ़ैसला किया था.
इस काम में मांझी को 22 साल लगे.
‘ग़रीबों का ताजमहल’
<link type="page"><caption> आमिर ख़ान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/06/120606_amir_apology_ak.shtml" platform="highweb"/></link> के चर्चित शो 'सत्यमेव जयते' का दूसरा सीज़न दो मार्च से शुरू हो रहा है.
ऐसा बताया जा रहा है कि इस बार ‘सत्यमेव जयते’ के पहले एपिसोड की शुरूआत आमिर दशरथ मांझी के गांव से करेंगे.

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आमिर ने अनोखे अंदाज़ में लगभग दस मिनट लंबी प्रेस-कॉन्फ़्रेंस की. इसके लिए उन्होंने वही पक्का रास्ता चुना जो दशरथ मांझी के पहाड़ काटने के कारण संभव हो सका था.
नीले रंग की जींस और पुलओवर में गहनौर पहुंचे आमिर की एक झलक पाने के लिए हज़ारों की भीड़ कार्यक्रम स्थल के आस-पास जमा हुई थी. बड़ी संख्या में लोग पहाड़ी पर भी चढ़े हुए थे.
आमिर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "दशरथ मांझी इस बात की बहुत बड़ी मिसाल हैं कि एक अकेला आदमी चाहे तो क्या नहीं कर सकता. उन्होंने यह भी कहा कि मांझी के जीवन से उन्हें बहुत हिम्मत मिलती है."
आमिर ने ये भी कहा कि वे दशरथ मांझी के योगदान को शाहजहां के निर्माण से ज़्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं.

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नहीं गए मांझी के घर
मंगलवार को आमिर ने दशरथ मांझी के बेटे, बहू, बहन और पोती से मुलाक़ात की. कहने को तो आमिर दशरथ मांझी के परिवार से मिलने आए थे लेकिन आमिर उनसे मिलने उनके घर नहीं गए.
गहलौर पहाड़ी के पास ही दशरथ मांझी की समाधि बनाई गई है. उसी समाधि के पास स्टार इंडिया की ओर से बनाए गए पंडाल का एक हिस्सा बैठक के लिए तैयार किया गया था.
आमिर ने गहलौर घाटी पहुंचकर सबसे पहले मांझी को श्रद्धांजलि दी और फिर उस पंडाल में जाकर मांझी के परिवारों से मिले.
आमिर ने कहा कि वो दशरथ मांझी के घर इसलिए नहीं गए क्योंकि हज़ारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई है.
शो नहीं देख पाएंगे
दशरथ मांझी आमिर ख़ान के शो 'सत्यमेव जयते' का हिस्सा तो बनेंगे लेकिन उनका परिवार यह शो नहीं देख पाएगा. ग़रीबी में गुज़र-बसर कर रहे इस परिवार के पास टीवी नहीं है.

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<link type="page"><caption> दशरथ मांझी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2014/02/140219_mumbai_dairy_aa.shtml" platform="highweb"/></link> के बेटे भागीरथ मांझी ने बताया कि उन्होंने 'सत्यमेव जयते' जैसे किसी कार्यक्रम का नाम भी नहीं सुना है.
वहीं मांझी की बहू बसंती देवी ने बताया कि मुलाक़ात के दौरान उन्होंने आमिर से अपनी ग़रीबी दूर करने के लिए मदद मांगी और जवाब में आमिर ने ‘हफ़्ते-आठ दिन के अंदर’ मदद देने का आश्वासन भी दिया.
क्या उन्होंने आमिर से टीवी भी मांगा? इसके जवाब में बसंती ने कहा कि अलग से टीवी तो उन्होंने नहीं मांगा लेकिन अपनी ग़रीबी बता दी तो वे सब समझ गए होंगे.
दशरथ मांझी का ग़रीब परिवार इंदिरा आवास में रहता है.
गांव के सरकारी स्कूल में मध्याह्न भोजन योजना के रसोइये के रूप में मिलने वाले पैसे से वे जीवन बसर करते हैं.
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