सरकार पेश करेगी तेलंगाना विधेयक, जगन का सोनिया पर निशाना

जगनमोहन रेड्डी

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तेलंगाना के गठन को लेकर भारतीय राजनीति गर्माती दिख रही है. एक ओर वाईएसआर कांग्रेस नेता जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के विभाजन पर विरोध जताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की आलोचना की है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार हर हाल में तेलंगाना के गठन का प्रस्ताव लोकसभा में पारित कराने के मूड में है.

सरकार लोकसभा में इस प्रस्ताव को मंगलवार को पेश कर सकती है.

बीते गुरुवार को भी सरकार ने इस विधेयक को टेबल करने की कोशिश की थी, जिस दौरान सीमांध्र के कांग्रेसी सांसदों के प्रदर्शन और विरोध के चलते इस पर बहस नहीं हो सकी थी. लोकसभा में एक सांसद ने पेपर स्प्रे (काली मिर्च के स्प्रे) छिड़क दिया था, जिसके चलते कई सांसदों की तबीयत भी बिगड़ गई थी.

लोकसभा में वैसी स्थिति दोबारा नहीं हो पाए, इसके लिए सरकार अपनी ओर से पूरी तैयारी में जुटी है.

संसदीय मामलों के मंत्री कमलनाथ और गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे इस सिलसिले में विपक्षी राजनीतिक दलों से भी लगातार संपर्क में हैं.

सरकार की तैयारी

इसी सिलसिले में शिंदे केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के साथ भारतीय जनता पार्टी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और वेंकैया नायडू से मिले. ये मुलाकात करीब 40 मिनट तक चली.

भारतीय जनता पार्टी वैसे तो तेलंगाना के गठन का समर्थन कर रही है लेकिन साथ में यह भी लगातार कह रही है कि सीमांध्र के लोगों की समस्याओं को भी सुने जाने की जरूरत है.

उधर वाईएसआर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए सोनिया राज्य का बंटवारा करा रही हैं.

जगन मोहन रेड्डी ने बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ <link type="page"><caption> तेलंगाना मुद्दे</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130810_jagan_resign_nn.shtml" platform="highweb"/></link> पर जंतर-मंतर पर धरना दिया. धरने के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया.

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जगन ने सत्ताधारी पार्टी पर आरोप लगाया कि राज्य के बंटवारे के पीछे कांग्रेस का राजनीतिक स्वार्थ है और ऐसा करने के पीछे सोनिया गांधी का एकमात्र उद्देश्य राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना है.

उनके मुताबिक तेलंगाना के गठन से कांग्रेस को तेलंगाना में टीआरएस की मदद से कुछ सीटें जीतने की उम्मीद है.

'इतालवी राष्ट्रीय कांग्रेस'

सोनिया गांधी के इतालवी होने का ज़िक्र करते हुए जगन मोहन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को "इतालवी राष्ट्रीय कांग्रेस" कहा. उन्होंने कांग्रेस पर बरसते हुए कहा, "अंग्रेजों ने भी हमारा उतना बुरा नहीं किया होगा, जितना बुरा सोनिया गांधी ने मेरे आंध्र प्रदेश के साथ किया है."

वे मानते हैं कि तेलंगाना राज्य बनाए जाने का विरोध करते हुए कांग्रेस सांसद का संसद में पेपर स्प्रे छिड़कना कांग्रेस की ही साजिश थी, ताकि सीमांध्र के सांसद निलंबित हो जाएं.

<link type="page"><caption> जगन मोहन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130108_jagan_reddy_of.shtml" platform="highweb"/></link> ने आरोप लगाते हुए कहा, "संसद में हुए शोर-शराबे के पीछे कांग्रेस का हाथ है. यह साजिश उन्होंने ही रची थी. ये जानते हुए कि उनका भविष्य लगभग शून्य है, इन लोगों ने यह सारा कारनामा किया. चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं और उनकी कारगुजारियों के कारण मेरे राज्य की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है."

प्रदर्शन

पिछले दिनों इस मुद्दे को लेकर कुछ सांसदों के निलंबन के बारे में वह कहते हैं, "सत्तारूढ़ दल की मंशा है कि वह बिना किसी बहस के तेलंगाना का निर्माण करने वाले विधेयक को पारित कर दे."

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वाईएसआर कांग्रेस नेता ने कहा, "मैं भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी सहित हर उस व्यक्ति का समर्थन करूँगा जो आंध्र प्रदेश की एकता को बनाए रखने की मुहिम में मेरा साथ देगा."

जगन ने अलग-अलग राजनीतिक दलों से मुलाकात की और उनसे आंध्र प्रदेश को एकीकृत रखने के लिए उनका समर्थन मांगा.

वाईएसआर कांग्रेस नेता जगन मोहन रेड्डी और सीमांध्र के सरकारी कर्मचारी तेलंगाना विधेयक के विरोध में शहर में जगह-जगह प्रदर्शन करेंगे और सरकार से आग्रह करेंगे कि वह इससे जुड़े फैसले को वापस ले.

सीमांध्र क्षेत्र के कई केंद्रीय मंत्रियों ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की और पृथक तेलंगाना राज्य बनाने के फैसले के बाद क्षेत्र के लिए एक पैकेज की ख़ातिर भाजपा का समर्थन मांगा.

इसके बाद संवाददाताओं से बात करते हुए लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा, "भाजपा तेलंगाना के गठन के पक्ष में हैं मगर हम उन समस्याओं को अनदेखा नहीं कर सकते जो सीमांध्र से उठ रहे हैं, या भविष्य में उठेंगे."

उन्होंने कहा, "इसलिए जब राज्य का विभाजन हो तो ये देखना बहुत जरूरी है कि दोनों प्रदेशों की जनता इससे पूरी तरह से संतुष्ट हो."

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