नरेंद्र मोदी से मिलीं अमरीकी राजदूत पॉवेल

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जब भारतीय आम चुनाव को कुछ ही महीने रह गए हैं, भारत में अमरीका की राजदूत नैंसी पॉवेल ने भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है.
ये मुलाक़ात गांधी नगर में गुजरात के मुख्यमंत्री के निवास पर हुई. अमरीका गुजरात के मुख्यमंत्री को अब तक वीज़ा देने से भी मना करता रहा है.
हालांकि अमरीकी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राजदूत की मुलाक़ात का वीज़ा नीति पर कोई असर नहीं होगा.
अमरीकी दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमरीका भारत में आने वाली अगली सरकार के साथ काम करना चाहता है.
यह बैठक आगामी राष्ट्रीय चुनावों के पहले भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं से अमरीकी मिशन की पहुंच का हिस्सा है.
माना जा रहा है कि आने वाले आम चुनावों में नरेंद्र मोदी की जीत की संभावना को ध्यान में रखते हुए अमरीका ने बातचीत की पहल की है. इससे पहले ब्रितानी उप विदेश मंत्री और भारत में ब्रिटेन के राजदूत नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात कर चुके हैं.
अमरीका ने 2002 के गुजरात दंगों की पृष्ठभूमि में नरेंद्र मोदी को वीज़ा देने से इनकार कर दिया था.
हालांकि अभी <link type="page"><caption> अमरीका</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/01/140128_us_pandit_missing_dp.shtml" platform="highweb"/></link> केवल अपने प्रतिनिधि की मोदी से मुलाकात पर सहमत हुआ है.
बदलाव

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अमरीका का कहना है यह मुलाकात भारत में राजनीति और कारोबार जगत के लोगों से संपर्क बढ़ाने की कोशिश से ज्यादा कुछ नहीं है.
इससे पहले भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने गुजरात दंगों की तुलना यहूदियों के नरसंहार से करते हुए मोदी से अमरीकी राजदूत की मुलाकात पर सवाल उठाए थे.
अमरीका के अलावा मोदी को लेकर यूरोपीय संघ का रुख़ भी कड़ा रहा था.
हालांकि उनके रुख़ में हाल में लचीलापन आया है और ब्रितानी और यूरोप के दूसरे राजनयिकों ने गुजरात के मुख्यमंत्री से मेलजोल बढ़ाया है.
पिछले कई सालों से बीजेपी और मोदी टीम अमरीका और ब्रिटेन में लॉबी कर रही है.
कुछ अमरीकी कांग्रेस सदस्य और उद्योग जगत के लोगों ने भी अमरीकी रुख को बदलने की वकालत की है.
आरोप
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि मोदी ने गुजरात में साल 2002 के हुए दंगों में उदासीन रवैया अपनाया था.
ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहते रहे हैं कि जाँच में भी उनके ख़िलाफ़ कोई आरोप साबित नहीं हुआ है.
अमरीका ने आव्रजन व राष्ट्रीयता अधिनियम के तहत उनका पर्यटन व कारोबारी वीजा भी रद्द कर दिया था.
इस अधिनियम के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन के लिए जिम्मेदार विदेशी सरकारी अधिकारियों को अमरीका की यात्रा के लिए अयोग्य ठहराए जाने का प्रावधान है.
शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद से भारत और अमरीका के रिश्ते लगातार मज़बूत हो रहे हैं और इसे अधिकांश अमरीकी सांसदों का समर्थन हासिल है.
लेकिन कुछ अमरीकी मानवधिकार संस्थाएं और सांसद नरेंद्र मोदी के साथ नज़दीकियों के ख़िलाफ़ हैं.
जानकारों का मानना है कि पॉवेल की मोदी के साथ मुलाक़ात से यह संदेश जाएगा कि अमरीका उन्हें वीज़ा जारी करने को तैयार है.
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