हाथी, चंदन निशाने परः क्या लौट आए 'वीरप्पन'?

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
जब डाकू वीरप्पन ज़िंदा थे तो दक्षिण भारत के दो राज्यों में उनका 'आतंक' हुआ करता था.
उनकी मौत को अब कोई नौ साल हो चुके हैं लेकिन मालूम पड़ता है कि दक्षिण भारत के राज्यों में चंदन की लकड़ी और हाथी दाँत की तस्करी करने वाले वीरप्पन का भूत अब तीन राज्यों में मंडरा रहा है.
अगर कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों की सीमा से लगे इलाक़ों में क़ीमती दाँत के लिए हाथी मारे जाते हैं तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच जाता है.
उसी तरह अगर आंध्र प्रदेश के दो ज़िलों में रक्त चंदन(एक ख़ास क़िस्म का चंदन) के पेड़ों की कटाई होती है तो वन विभाग के अधिकारियों की चिंताएं बढ़ने लगतीं हैं.
वारदात चाहे कोई भी हो, शक़ की सुई वीरप्पन के गिरोह के बचे हुए लोगों पर चली जाती है.
<link type="page"><caption> (वीरप्पन के साथियों को फिलहाल फांसी नहीं)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130220_veerappan_aide_execution_pa.shtml" platform="highweb"/></link>
इसकी वजह भी है क्योंकि जिस तरह से हाथियों के दाँत निकाले जाते हैं या फिर पेड़ों की कटाई की जाती है वो वीरप्पन के 'अंदाज़' की यादें ताज़ा कर जाती है.
एक वक़्त था, जब सरकारी अफ़सर उनसे दहशतज़दा रहते थे.
सत्यमंगलम के जंगल
चेन्नई स्थित वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के क्षेत्रीय उपनिदेशक वेंकटेश मूर्ति कहते हैं, "अपराध को अंजाम देने का तरीक़ा वीरप्पन से बहुत मिलता-जुलता है."
उन्होंने कहा, "फ़िलहाल हम पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि वीरप्पन के गिरोह के कुछ पुराने लोग फिर से सक्रिय हो गए हैं. पुलिस की तफ़्तीश जारी है लेकिन निश्चित रूप से ये चिंता का एक विषय है."
<link type="page"><caption> (वीरप्पन की फ़िल्म में असली डाकू)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/02/130212_rajkumar_veerappan_ks.shtml" platform="highweb"/></link>

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कहा जाता है कि कर्नाटक और तमिलनाडु से लगे सत्यमंगलम और नागराहोल के पहाड़ी जंगलों में वीरप्पन ने चंदन के हज़ारों पेड़ काट लिए थे और उन्होंने पुलिस और वन विभाग के भी कई लोगों को मारा था.
वीरप्पन ने हाथी दाँत के लिए कई हाथियों का भी शिकार किया था.
चंदन तस्कर वीरप्पन ने कन्नड़ फ़िल्मों के अभिनेता राजकुमार को अग़वा कर लिया था और कर्नाटक सरकार के साथ समझौते के बाद ही राजकुमार की रिहाई हो पाई थी.
इसके बाद वीरप्पन ने राज्य के एक पूर्व स्वास्थ्य मंत्री की हत्या कर दी थी.
हाथी दांत
तक़रीबन 18 सालों की दहशत और जंगलों में हुकूमत के बाद 18 अक्तूबर, 2004 को वीरप्पन तमिलनाडु पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) के साथ राज्य के धर्मपुरी ज़िले में एक मुठभेड़ में मारे गए थे.
<link type="page"><caption> (वीरप्पन की पत्नी टीवी सीरियस से नाराज)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2007/10/071010_veerappan_serial.shtml" platform="highweb"/></link>
धर्मपुरी के सरकारी अस्पताल में 19 अक्तूबर को जब उनका शव देखने वालों के लिए रखा गया था तो हज़ारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़े थे.
पिछले कुछ महीनों के दौरान हाथी जिस तरीक़े से मारे गए हैं और उनके दाँत निकाले गए हैं, ठीक उसी तरह से वीरप्पन अपनी गतिविधियों को अंजाम देते थे.
कर्नाटक के चीफ़ वाइल्ड लाइफ़ वॉर्डन विनय लूथरा कहते हैं, "वीरप्पन की गतिविधियों के ख़त्म होने के बाद हाथियों की हत्या का ये पहला मामला है. गिरफ़्तार किए गए छह संदिग्ध लोगों के पास से हाथी के दाँत भी बरामद किए गए हैं. मामले की जाँच की जा रही है."
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार

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आंध्र प्रदेश में रक्त चंदन के पेड़ों पर छाए ख़तरे ने युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. दिसंबर के मध्य में तस्करों ने वन विभाग के दो अधिकारियों को मार दिया.
पुलिस और वन विभाग की एक बड़ी टीम ने इसके बाद अवैध कटाई और तस्करी के आरोप में 100 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार कर लिया.
<link type="page"><caption> (सुनवाई के सुप्रीम कोर्ट का इनकार)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130216_virappan_aides_execution_sm.shtml" platform="highweb"/></link>
इनमें से ज़्यादातर लोग पड़ोसी कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य से थे.
रक्त चंदन के पेड़ ज़्यादातर नेल्लूर ज़िले में और रायलसीमा क्षेत्र के चित्तूर, कडप्पा और कुर्नूल ज़िलों में फैले शेषालचलम के पहाड़ों में पाए जाते हैं. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इनकी क़ीमत बहुत अधिक आँकी जाती है.
आंध्र प्रदेश के मुख्य वन संरक्षक एसबीएल मिश्र कहते हैं, "अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी क़ीमत क़रीब 25 लाख रुपये प्रति टन है."
उन्होंने कहा, "इसकी तस्करी के ख़िलाफ़ हम लगातार छापामारी करते रहते हैं. हमारे कर्मचारियों को पुलिस विभाग की ओर से हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है क्योंकि तस्करों से लड़ते वक़्त उन्हें अपनी जीवन रक्षा की भी ज़रूरत रहती है."

मिश्र ने कहा, "अब हम तस्करों के बड़े गिरोहों से निपट रहे हैं. इनकी तादाद 100 से 150 के बीच है. पेड़ों को काटने का तरीक़ा वीरप्पन के गिरोह की शैली से बहुत अलग नहीं है. पुलिस इस बात की संभावना का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वीरप्पन के गिरोह के कुछ पुराने सदस्य नया गैंग बनाकर चंदन की लकड़ी की कटाई तो नहीं कर रहे हैं."
लेक्चरर गिरफ्तार
ये मामले ऐसे नहीं लगते कि निरक्षर आदिवासी या स्थानीय गाँव वाले वीरप्पन की पुरानी कहानियों से प्रेरित होकर हाथियों पर हमला करते हैं या फिर रक्त चंदन के पेड़ों की कटाई करते हैं.
व्यानाड के जंगलों में और केरल के पल्लकड में तीन ऐसी ही घटनाएँ हुई हैं. मूर्ति कहते हैं, "लेकिन ऐसा हो सकता है कि कुछ आदिवासियों ने लालच की वजह से ऐसा किया हो."
<link type="page"><caption> (फिल्म अभिनेता राजकुमार का निधन)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2006/04/060412_rajkumar_died.shtml" platform="highweb"/></link>

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उन्होंने कहा, "ये कहना सही नहीं होगा कि अवैध शिकार की घटनाएँ किसी एक गिरोह की वजह से हो रही हैं. पिछले महीने तमिलनाडु के धर्मपुरी ज़िले में एक हाथी को मार दिया गया था."
मू्र्ति ने कहा, "पुलिस ने दो लोगों की गिरफ़्तारी के बाद हाथी दाँत बरामद कर लिया. गिरफ़्तार किए गए लोगों में से एक व्यक्ति कॉलेज का लेक्चरर था. केवल लालच के कारण ही वह ऐसी गतिविधि में शरीक हुआ होगा."
लेकिन सरकारी अफ़सरों के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण ये है कि इन घटनाओं के पीछे किसी 'दूसरे वीरप्पन' का हाथ नहीं होना चाहिए. मूर्ति कहते हैं, "हम उसकी जैसी किसी और बुराई को फिर से नहीं झेल सकते."
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