ट्विटर ट्रेंड: टीपू सुल्तान हीरो थे या क्रूर शासक?

गणतंत्र दिवस परेड में कर्णाटक की झांकी

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टीपू सुल्तान की मौत को 200 साल से ज़्यादा समय हो गया है लेकिन अगर ट्विटर पर देखिए तो लगता नहीं कि इतना समय निकल गया होगा.

इस साल गणतंत्र दिवस समारोह के बाद से टीपू सुल्तान के बारे में भारत में ट्विटर पर 10 हज़ार से ज़्यादा ट्वीट आ चुके हैं और एक बहस शुरू हो गई है कि उन्हें किस रूप में याद किया जाए.

बहस की शुरुआत गणतंत्र दिवस में कर्नाटक की झांकी से हुई जिसमें हाथ में तलवार लहराते <link type="page"><caption> टीपू सुल्तान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2010/04/100415_tipu_sword_auction_ak.shtml" platform="highweb"/></link> की मूर्ति थी और उसके पीछे उनकी पहचान बन चुके शेर का मॉडल.

दिल्ली से बीबीसी मॉनिटरिंग संवाददाता विकास पांडे कहते हैं, "ज़्यादातर भारतीय टीपू सुल्तान को एक नायक के रूप में देखते हैं लेकिन उनकी विरासत हमेशा विवादों में रही है."

विवादित व्यक्तित्व

भारतीय स्कूलों के पाठ्यक्रम में टीपू सुल्तान को एक बहादुर शासक बताया गया है जिसने 18वीं सदी के अंत में ब्रितानी उपनिवेशवाद से लोहा लिया. उनकी ये छवि 1990 के दशक में राष्ट्रीय टीवी पर दिखाए गए धारावाहिक, 'द स्वोर्ड ऑफ़ टीपू सुल्तान' से और मज़बूत हुई. धारावाहिक में कई नाटकीय दृश्य थे. मसलन टीपू सु्ल्तान को शेरों से लड़ते हुए दिखाया गया है.

टीपू सुल्तान

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गणतंत्र दिवस परेड के बाद से ट्विटर पर पोस्ट की गई कई टिप्पणियों में टीपू सुल्तान को ''देशभक्त'' और ''हीरो'' कहा गया है. लेकिन बहुत सी टिप्पणियां उनकी निंदा भी करती हैं जिनमें उन्हें ''क्रूर'' और ''हत्यारा'' करार दिया गया है.

इस बारे में संदीप बालाकृष्णन ने कई बार ट्वीट किया और वे 'टीपू सुल्तान: द टायरंट ऑफ़ मैसूर' नाम की किताब के लेखक हैं. संदीप कहते हैं, "टीपू सुल्तान के बारे में आम राय इतिहास को खुले तौर पर तोड़-मरोड़ कर बनाई गई है.''

संदीप और कई और लोगों के मुताबिक टीपू सल्तान एक क्रूर शासक थे जिन्होंने कई गांवों को तबाह किया, हिंदुओं के मंदिरों और ईसाइयों के गिरजा घरों को तोड़ा और हज़ारों लोगों को इस्लाम कबूल करने पर मजबूर किया.

लेकिन बहुत से लोग इस तरह की राय को हिंदू राष्ट्रवादियों के टीपू सुल्तान को बदनाम करने की कोशिश के तौर पर देखते हैं.

कर्नाटक में एक विश्वविद्यालय का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने की योजना है और साथ ही इसे रोकने के लिए इंटरनेट पर प्रचार शुरु करने की भी. यानी टीपू सुल्तान से जुड़ा विवाद आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है.

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