अंडमान दुर्घटना: नहीं बताया गया लाइफ़ जैकेट का इस्तेमाल?

इमेज स्रोत, Zubair Ahmed
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, संपादक, लाइट ऑफ़ अंडमान, साप्ताहिक पत्रिका
अंडमान निकोबार में पोर्ट ब्लेयर के पास एक नाव पलटने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई है. हालांकि 29 लोगों को बचा लिया गया है.
मारे गए पर्यटकों में ज़्यादातर तमिलनाडु के कांचीपुरम और मुंबई के रहने वाले थे.
जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक़ तक़रीबन ढाई बजे यह नाव नॉर्थ बे आइलैंड से चली थी. पंद्रह मिनट बाद यह हादसा हुआ. नाव में तकनीकी गड़बड़ी थी जिससे पानी भर रहा था.
नाव में सवार पर्यटकों को यह भी नहीं बताया गया था कि लाइफ़ जैकेट कैसे इस्तेमाल करना है.
जब नाव डूबनी शुरू हुई तो उसके बाद कुछ लोगों को लाइफ़ जैकेट मिली. लेकिन उन्हें भी इसका इस्तेमाल नहीं पता था. तब तक जो उम्रदराज लोग थे वो डूब चुके थे.
चालक दल ने सात-आठ लोगों को बचाया. वहाँ आस-पास जो मछुआरे और नाविक थे, वो भी बचाव के लिए आए.
हादसे की सूचना मरीन रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन कमांड को चार बजे मिली जबकि दुर्घटना पौने तीन बजे हो चुकी थी.
यानी सूचना मिलने और प्रशासन से मदद मिलने में बहुत देर हो चुकी थी. इसी कारण हादसे में इतने लोग मरे हैं.
तेज़ लहरों वाला समुद्र
यह भी पता चला है कि इस नाव की क्षमता अधिकतम 30 लोगों की थी लेकिन हादसे के वक़्त इसमें तक़रीबन 45-50 लोग सवार थे.
एक हफ़्ते पहले ही इस नाव की जाँच हुई थी. नाव ने फिटनेस टेस्ट पास किया गया था जबकि इसमें तकनीकी ख़राबी थी.
कई बार नावों में क्षमता से ज़्यादा लोगों को भर लिया जाता है जबकि यहाँ तेज़ लहरों वाला समुद्र है जिसमें ऐसा हादसा बार-बार हो सकता है.
यहाँ कई ऐसे इलाक़े हैं जहाँ तक़रीबन 10-12 हज़ार लोग नाव से सफ़र करते हैं.
इन इलाक़ों में जिन नावों की क्षमता 100 लोगों को ले जाने की है उनमें 300-400 लोग सफ़र करते हैं.
अब देखना यह है कि ऐसा हादसा हो जाने के बाद भी प्रशासन जीवन रक्षक उपकरणों पर कितना ध्यान देता है.
(बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद से बातचीत पर आधारित)
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