'मनचलों' के ख़िलाफ़ हथियार बना एक नंबर

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- Author, मनीष कुमार मिश्रा
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
लखनऊ की एक निजी कंपनी में मानव संसाधन प्रबंधक यानी एचआर मैनेजर के पद पर काम करने वाली ऋचा सिंह तब काफ़ी असहज हो जाती थीं जब आफ़िस में उनके मोबाइल पर बार-बार किसी अज्ञात व्यक्ति का फ़ोन आता था.
ऋचा बताती हैं कि इससे उनके काम पर भी काफ़ी असर पड़ता था. उनके ही इलाक़े का रहने वाला व्यक्ति उनको फ़ोन करके परेशान करता और उनकी गाड़ी का भी पीछा करता था और उसे वो बिल्कुल नहीं जानती थीं.
आख़िरकार ऋचा ने महिला टेलीफ़ोन पावर लाइन 1090 पर शिकायत दर्ज करके अपने मोबाइल पर आ रहे उस व्यक्ति के फ़ोन नंबर के बारे में जानकारी दी.
वह बताती हैं कि दो दिन के अंदर ही उनके पास फ़ोन आना बन्द हो गया. वो कहती हैं, “मेरी गाड़ी का पीछा करना भी बन्द हो गया. इससे मुझे मानसिक तौर पर काफी राहत मिली.”
'आत्मविश्वास आया'
ऋचा कहती हैं, “महिला पावर लाइन की मदद से मेरे अंदर काफ़ी आत्मविश्वास आ गया. मैंने तय किया कि मैं हर उस महिला की मदद करूंगी जो मेरी तरह ही पीड़ित होती है. अब तक मैंने 40 से ज़्यादा महिलाओं को इस हेल्पलाइन के बारे में जानकारी देकर उनकी मदद की है.”
ऋचा को महिला पावर लाइन ने अपना 'पावर ऐन्जल' बनाया है.
इसी तरह लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्रा उर्वी सिंह और उनकी सहेली ने भी महिला पावल लाइन के ज़रिए अपनी समस्याओं से छुटकारा पाया है.

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ग़ैर सरकारी संगठन आरटीआई महिला मंच की संयोजिका उवर्शी शर्मा महिला पावर लाइन के बारे में कहती हैं कि इस सेवा से महिलाओं को काफ़ी मदद मिली है, विशेष रूप से छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को.
वो कहती हैं कि महिलाओं को फ़ोन कर उन्हें परेशान करने की घटनाएं काफ़ी होती है महिलाएं संकोच के कारण इस तरह की घटनाओं को अपने परिवार वालों को बताने में संकोच करती है. लेकिन महिला पावर लाइन की सेवा शुरू होने से महिलाओं को काफ़ी राहत मिली.
महिला पावर लाइन की शुरुआत 15 नवंबर 2012 को शुरू की गई थी. इसकी रूपरेखा लखनऊ के डीआईजी नवनीत सिकेरा ने तैयार की है. ये सेवा उनकी देखरेख में काम करती है.
बीबीसी से बातचीत में सिकेरा कहते हैं कि इस महिला पावर लाइन पर केवल महिलाएं ही अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं. शिकायत करने वाली महिलाओं की पहचान गोपनीय रखी जाती है और उन्हें थाने में आने की ज़रूरत नहीं पड़ती.
146 गिरफ़्तारियां
पूरे प्रदेश में कहीं से भी कोई महिला अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है. इस सेवा की सबसे बड़ी विशेषता है कि अगर किसी महिला को कोई व्यक्ति फ़ोन या एसएमएस कर परेशान करता है तो महिला उस व्यक्ति के नंबर के बारे में महिला पावर लाइन में शिकायत कर सकती है.

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महिला पावर लाइन की टीम उस व्यक्ति के नंबर को ट्रेस कर उसे ये चेतावनी दी जाती है कि आप इस तरह की 'हरकत' न करे, आपका नंबर पुलिस की निगरानी में है.
महिला पावर लाइन के प्रभारी राघवेन्द्र सिंह बताते है कि ये सेवा सुबह 8 बजे से लेकर रात 12 बजे तक काम करती है इसमें कुल 117 कर्मचारी काम कर रहे है जिसमें अधिकतर महिलाएं है.
उनका कहना है कि अब तक 1,55,533 मामले दर्ज किए जा चुके है जो कि सभी महिलाओं के फ़ोन कॉल से जुड़े हुए है.
उनका कहना है कि अब तक 1,49,504 मामलों को निपटाया गया है. पूरे प्रदेश में 174 लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमे दर्ज किए गए है जिसमें से 146 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
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