उत्तर प्रदेश: खोदा सोना, निकली बदहाली

    • Author, क्रेग जैफ़्री
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक साधू ने भारी मात्रा में स्वर्ण भंडार का सपना देखा और उसके बाद उस खज़ाने की तलाश में खुदाई शुरू हो गई.

सपने हमारी ज़िंदगी का हिस्सा हैं.

नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक जेम्स वाटसन को डीएनए की दो कुंडलियों वाली संरचना सपने में दिखाई दी. अब्राहम लिंकन ने अपनी हत्या से ठीक एक दिन पहले सपना देखा कि उनकी हत्या कर दी गई है.

लेकिन अगर कोई सोने के गुप्त भंडार के बारे में सपना देखे तो उस सपने का क्या?

यह सवाल मैंने उत्तर भारत के छात्रों से पूछा. ज़्यादातर ने कहा कि वो ऐसे सपने को नजरअंदाज़ कर देते.

सपने की हकीकत

लोकेन्द्र सिंह नाम के एक युवक ने कहा, "अगर आप सपने में यकीन रखते हैं तो आपके हर दिन की शुरुआत एक बॉलीवुड फ़िल्म की तरह होगी."

ओम पाल सिंह की राय अलग थी. उन्होंने कहा, "नहीं, आपको मानना चाहिए कि सपने सच हो सकते हैं."

हम इस बात की चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि संत शोभन सरकार ने हाल में यह अद्भुत सपना देखा.

बीते साल सितंबर में शोभन सरकार ने बताया कि उन्होंने सपना देखा है कि उन्नाव के दिवंगत तालुकेदार राव राजा राम बक्श सिंह के <link type="page"><caption> डौंडियाखेड़ा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131018_indiabol_gold_ss.shtml" platform="highweb"/></link> स्थित किले में 1,000 टन सोने का भंडार धरती में दबा हुआ है.

सपने में राम बक्श ने शोभन सरकार से कहा कि इस सोने को निकाल कर भारत के आर्थिक विकास के लिए इस्तेमाल करना चाहिए.

सरकार की दिलचस्पी

उन्होंने भारत सरकार को इस कहानी के बारे में बताने का निश्चय किया. उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखा, लेकिन उनके पत्र का कोई उत्तर नहीं मिला.

आखिर सिर्फ एक व्यक्ति के सपने के आधार पर सरकार सोने की खुदाई के लिए इतना खर्च करने के लिए क्यों तैयार हो जाती?

लेकिन भारत के खाद्य और कृषि राज्य मंत्री ने <link type="page"><caption> शोभन सरकार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131019_sobhan_sarkar_profile_ap.shtml" platform="highweb"/></link> की कहानी के बारे में सुना और उन्होंने इसमें दिलचस्पी दिखाई.

मंत्री ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण को इस कहानी की सच्चाई पता लगाने के लिए कहा.

भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने पाया कि सतह के नीचे असामान्य रूप से गैर-चुंबकीय क्षेत्र है और हो सकता है कि वहां सोना हो.

इसके बाद 20 अक्तूबर को खुदाई शुरू करा दी गई और पूरे इलाके को न्यूज़ वैन, सुरक्षा बलों और हज़ारों तमाशबीनों ने घेर लिया.

कल्पना की उड़ान

इस बात को लेकर तरह तरह की योजनाएं बनने लगीं कि आखिर इस सोने का क्या किया जाएगा.

<link type="page"><caption> राम बक्श सिंह</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/11/131119_daundiya_kheda_village_situation_pk.shtml" platform="highweb"/></link> के उत्तराधिकारियों ने दावा किया कि ये खज़ाना उनका है. स्थानीय लोगों ने कहा कि सोने का इस्तेमाल स्थानीय विकास के लिए होना चाहिए.

राम बक्श सिंह की जाति के लोगों का कहना था कि सोना उन्हें मिलना चाहिए, न कि उत्तराधिकारियों या स्थानीय लोगों को.

सोने की खोज में लगे दल ने चार सप्ताह बाद खुदाई के काम को रोक दिया. सर्वेक्षण दल को इस दौरान कुछ जंग लगा लोहा, खिलौने और टूटी हुई चूड़ियां मिलीं.

हालांकि <link type="page"><caption> सोना तो नहीं मिला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131029_asi_excavation_stops_dil.shtml" platform="highweb"/></link>, लेकिन मेरे कुछ दोस्तों ने बताया कि इसी बहाने अमतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश की बदहाली की ओर लोगों का ध्यान गया है.

एक अन्य छात्र ने बताया कि भारत में सभी सोने के पीछे भाग रहे हैं. किसी की दिलचस्पी सच्चाई में या मेहनत से पैसा कमाने में नहीं है.

उप्र की बदहाली

पत्रकार तेजपाल सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 50 प्रतिशत महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में निचली जातियों के आधे लोग अशिक्षित हैं.

उन्होंने बताया, "खुदाई से इस ओर ध्यान गया है और अब राजनीति में बदलाव आ सकता है."

सोने की चाहत एक राजनीतिक समस्या भी बन गई. <link type="page"><caption> भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131025_asi_gold_unnao_va.shtml" platform="highweb"/></link> अब इस बात से इनकार कर रहा है कि वो वहां सोने की तलाश में गया था.

उसके प्रवक्ता ने बताया कि वो तो बस भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार काम कर रहे थे. लेकिन अब भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भी इस पूरे मसले से अपने हाथ पीछे खींच चुका है.

ऐसा लगता है कि नवंबर में भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के साथ किसी ने छेड़छाड़ की. जिस क्षेत्र की उसने पहचान की थी, उसमें कभी भी <link type="page"><caption> सोने की संभाव</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/01/131230_ghana_gold_dp.shtml" platform="highweb"/></link>ना नहीं बताई गई थी और उसने वास्तव में खुदाई की सिफ़ारिश की ही नहीं थी.

इस ख़बर की ओर मीडिया संगठनों का ध्यान तेज़ी से गया. सवाल यह था कि आखिर ये क्या मज़ाक हो रहा है. इंडिया टुडे पत्रिका ने इस तरह सोने की खोज के बारे में लिखा – "ताज महल ऑफ मरॉनिक मैडनेस" यानी पागलपन से भरी मूर्खता का ताज महल.

हरकत में राजनेता

राजनेता भी हरकत में आ गए. भारतीय जनता पार्टी के <link type="page"><caption> नरेन्द्र मोदी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/01/140109_modi_rally_online_booking_sk.shtml" platform="highweb"/></link> ने कहा कि सोने की खोज से भारत का मज़ाक बनाया जा रहा है.

मोदी ने कहा कि छिपे हुए खज़ाने की खोज के लिए धरती की खुदाई की जगह सरकार को चाहिए कि वो स्विस बैंक खातों में छिपाकर रखे गए राजनेताओं के अरबों रुपयों को भारत लाए.

लेकिन शोभन सरकार की लोकप्रियता काफ़ी अधिक है. इसलिए मोदी को अचानक अहसास हुआ कि वो अपने समर्थक हिंदुओं को नाराज़ कर रहे हैं. इसलिए मोदी ने शोभन सरकार से माफ़ी मांगी और उनके कामों की तारीफ़ की.

इस बीच शोभन सरकार ने खुद खोज करने का फ़ैसला किया और खुदाई मशीन लेकर पहुंच गए. सरकार ने उनकी गैरकानूनी खुदाई को रोकने का फ़ैसला किया, हालांकि बाबा को रोका न जा सका.

उन्होंने कहा, "मैं जेल जाने के लिए तैयार हूं." ऐसा लगता है कि वो सोने के अपने सपने को इतनी आसानी से छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं.

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