'सैफ़ई महोत्सव में सब गरीब आते हैं'

सैफ़ई महोत्सव, मंत्रियों के विदेश दौरों और मुज़फ़्फ़रनगर में दंगा पीड़ितों की उपेक्षा को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि इस तरह के आयोजन पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए होते हैं.
अखिलेश ने पत्रकारों से कहा कि इस कार्यक्रम में आसपास के ज़िलों के सरपंच और जनप्रतिनिधि शामिल होते हैं और इस कार्यक्रम का आयोजन मेला समिति और नौजवान मिलकर करते हैं.
उन्होंने कहा, "यह आयोजन हर साल होता है. समाजवादी पार्टी की सरकार रहे न रहे, महोत्सव बड़ा ही होता है."
अखिलेश ने यह भी कहा कि इस महोत्सव में सब ग़रीब लोग आते हैं. ग़रीबों के लिए इतना बड़ा महोत्सव और कहाँ आयोजित किया जाता है?
उन्होंने मीडिया को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मीडिया ने उन कलाकारों पर भी सवाल उठाए जो मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के बारे में जानते भी नहीं.
पर्यटन और संस्कृति
अखिलेश यादव के अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देना है.

सैफ़ई महोत्सव के आयोजन में करोड़ों रूपए खर्च होने की बात पर मुख्यमंत्री बचाव करते नज़र आए. पहले उन्होंने कहा कि पाँच-छह करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. फिर कहा कि दस करोड़ रुपए से अधिक कभी भी आयोजन पर ख़र्च नहीं हुए.
अखिलेश ने एक भारतीय अख़बार में छपी उस ख़बर पर भी नाराजगी जताई जिसमें कहा गया था कि सैफ़ई महोत्सव के आयोजन पर 300 करोड़ खर्च हुए हैं.
उन्होंने कहा, "महोत्सव की समिति सारे ख़र्चे का हिसाब रखती है. सैफ़ई में कलाकार तो हर साल आते हैं."
'आधे घंटे का प्रोग्राम'
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने बड़े पैमाने परदंगा पीड़ितों की मदद की है.
अखिलेश यादव ने एक अंग्रेज़ी समाचार चैनल को निशाना बनाते हुए कहा कि उनके पत्रकार ने उनके साथ हवाई जहाज़ में पूरे दिन भ्रमण किया था. लेकिन कभी भी उनका आधे घंटे का कार्यक्रम नहीं दिखाया गया.
उन्होंने कहा कि चैनल के पत्रकार से मुझे जवाब मिला कि चैनल के मार्केटिंग और सेल्स विभाग ने आपका कार्यक्रम चलाने से मना कर दिया है.
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अंग्रेज़ी चैनल नहीं देखती. अगर कोई शब्दकोश उठाकर देखो तो पता चलता है कि उन चैनलों पर काफ़ी ग़लत शब्दों का इस्तेमाल किया गया.
भाजपा के प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नकबी ने कहा, "आज जिस तरह के उत्तर प्रदेश के हालात है, बेहतर होता कि सरकार जश्न मनाने की बजाय हालात को बेहतर बनाने के लिए काम करती. आधे से ज्य़ादा सरकार विदेश दौरे पर है, जबकि आधी सरकार जश्न मना रही है."
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