इराक़: फ़लूजा शहर पर अल क़ायदा का क़ब्ज़ा

इराक़ सरकार ने राजधानी बग़दाद के पश्चिम में मौजूद कूटनीतिक शहर फ़लूजा पर क़ब्ज़ा खो दिया है. एक रक्षा सूत्र ने बीबीसी को बताया कि अल क़ायदा से जुड़े चरमपंथियों का फ़लूजा के दक्षिणी हिस्से पर क़ब्ज़ा हो गया है.
फ़लूजा में मौजूद एक एक इराक़ी रिपोर्टर मोहम्मद अब्दुल्ला के मुताबिक़ अल-क़ायदा से जुड़े लोगों का फ़लूजा के बाक़ी हिस्से पर क़ब्ज़ा है.
मोहम्मद अब्दुल्ला ने बताया, "पूरे शहर में बंदूक़धारी घूम रहे हैं और शहर के भीतर उनका सभी जगह कब्ज़ा है. उन्होंने पुलिस और सुरक्षाबलों को बाहर निकाल दिया है. उन्होंने पुलिस स्टेशनों को जला दिया और अंदर रखी सभी चीज़ें उठा ले गए."
यह लड़ाई उस वक़्त भड़की जब सुरक्षाकर्मियों ने शहर रामादी में सुन्नी अरबों के एक कैंप को उखाड़ दिया. सुन्नी समुदाय के लोग शियाओं के नेतृत्व वाली सरकार पर सुन्नियों के अधिकार छीनने का आरोप लगा रहे थे.
फ़लूजा और रामादी में जारी संघर्ष के चलते सरकारी सेनाएं और अल क़ायदा से जुड़े गुट जैसे इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक़ और दूसरे सुन्नी गुट एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं.
सुन्नी अरबों का आरोप है कि प्रधानमंत्री नूर उल मलीक़ी की सरकार उनके साथ कथित तौर पर भेदभाव बरतती है और वे इससे नाराज़ हैं.

देर शनिवार प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ अल-क़ायदा के चरमपंथी फ़लूजा की सड़कों पर बंदूक़ों से लैस गाड़ियों में दिखाई दिए.
क़ब्ज़े के लिए गोलीबारी
रॉयटर्स समाचार एजेंसी के मुताबिक़ इराकी सेनाएं शहर को वापस अपने क़ब्ज़े में लेने के लिए कुछ हिस्सों पर गोलीबारी कर रही थीं.
इराक़ के राष्ट्रीय टीवी चैनल पर प्रसारित प्रधानमंत्री मलीक़ी के बयान में कहा गया है कि जब तक आतंकी गुटों को ख़त्म नहीं किया जाता, तब तक सरकार चुप नहीं बैठेगी.
मंगलवार को उन्होंने अनबार प्रांत के शहरों से सेना वापस बुलाने की बात मान ली थी ताकि पुलिस सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ले पाए लेकिन जैसे ही सेना अपने पोस्टों से बाहर निकली, अल क़ायदा से जुड़े चरमपंथी रामादी, फ़लूजा औऱ तरमिया में दाखिल हो गए. उन्होंने पुलिस स्टेशनों को क़ब्ज़ा लिया, हथियार ले लिए और क़ैदियों को रिहा कर दिया.
अगले ही दिन प्रधानमंत्री ने सैनिकों की वापसी का फ़ैसला वापस ले लिया, लेकिन गुरुवार को चरमपंथी रामादी औऱ फ़लूजा की इमारतों पर काले झंडे लहरा रहे थे और लोगों से संघर्ष में शामिल होने की अपील कर रहे थे.
बुधवार को संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि 2013 में इराक़ में करीब आठ हज़ार आम नागरिक और 1000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं.
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