बिहार: पहले अपहरण फिर 'हत्या'

बिहार नक्सली हमला
इमेज कैप्शन, बिहार में नक्सल हमले अक्सर होते रहे हैं
    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

बिहार के गया ज़िले में नक्सली कार्रवाई में बुधवार रात मारे गए दो लोगों का पोस्टमार्टम शुक्रवार को कर दिया गया.

पुलिस के मुताबिक इस घटना के लिए प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा-माओवादी का हथियारबंद दस्ता ज़िम्मेदार है.

पुलिस का कहना है कि गया ज़िले के बांकेबाजार थाना क्षेत्र के महुरनिया पहाड़ी पर नक्सलियों ने जन अदालत लगाकर इस घटना को अंजाम दिया.

रिपोर्टों के अनुसार मारे गए दोनों लोग गया के डुमरी गांव के रहने वाले थे. हत्या के बाद शवों को गया और औरंगाबाद ज़िले की सीमा पर घने जंगलों में फेंक दिया था.

अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) शंभू प्रसाद ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि भाकपा-माओवादी के हथियारबंद दस्ते ने पांच ग्रामीणों का अपहरण किया था और बाद में उनमे से दो की हत्या कर दी गई. शंभू प्रसाद ने इसे दहशत पैदा करने के उद्देश्य से की गई कार्रवाई बताया.

उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस को माओवादियों द्वारा ऐसी कार्रवाई अंजाम देने की सूचना पहले से थी और घटना से पहले क्षेत्र में माओवादियों के धर-पकड के लिए अभियान भी चलाया गया था लेकिन दुर्गम क्षेत्र का फायदा उठाकर माओवादी बच निकलने में कामयाब रहे.

घटना के बाद इलाके में पुलिस बल की संख्या बढा दी गई है और गहन तलाशी अभियान जारी है.

राजनीतिक रंजिश

गौरतलब है कि स्थानीय विधायक और बिहार विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी लंबे समय से नक्सलियों के निशाने पर हैं. नक्सलियों के कड़े विरोध के बावजूद वो 2010 का विधानसभा चुनाव काफी कम मतों से जीतने में सफल हो पाए थे.

यह तीसरा मौका है जब नक्सलियों ने उदयनारायण चौधरी के समर्थकों को निशाना बनाया है. इसके पहले उन्होंने अगस्त 2010 और मार्च 2011 में ऐसा किया था.

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक लगभग दो साल पहले भी बांकेबाजार और रोशनगंज इलाके में नक्सलियों ने चार लोगों को अगवा किया था. अगवा ग्रामीणों पर एक ऐसे पुल के निर्माण के लिए लोगों को गोलबंद करने का आरोप था जिनका नक्सली विरोध कर रहे थे. लेकिन तब घटना के बाद हजारों की संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए थे और उनके विरोध को देखते हुए नक्सली अगवा ग्रामीणों को छोड़ने को मजबूर हुए थे.

बिहार में हाल के दिनों में नक्सली घटनाएं बढ़ी हैं. अक्तूबर से अब तक पांच अलग-अलग घटनाओं में नक्सली हिंसा में 23 लोग मारे जा चुके हैं.

अक्तूबर से अब तक नक्सली हिंसा में 23 लोग मारे जा चुके हैं.
इमेज कैप्शन, अक्तूबर से अब तक नक्सली हिंसा में 23 लोग मारे जा चुके हैं.

नक्सल मामलों के जानकार विश्वजीत सेन के मुताबिक राज्य सरकार अपने ऊपर मानवाधिकार विरोधी होने का ठप्पा लगने के डर से नक्सलियों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठा रही है और इससे उनका हौसला बढ़ रहा है.

बिहार: हाल की नक्सली वारदातें

03 दिसंबरः बिहार के औरंगाबाद जिले में नक्सलियों द्वारा किए गए बारूदी सुरंग के धमाके में आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. मरने वालों में एक थाना प्रभारी, एक ड्राइवर और छह पुलिस के जवान शामिल थे.

30 नवंबरः बिहार के मुंगेर जिले में जमालपुर रेल स्टेशन से पहले ट्रेन पर नक्सलियों ने हमला किया था. इस वारदात में तीन पुलिस जवान मारे गए थे और तीन अन्य जवानों सहित एक यात्री घायल हुआ था.

11 नवंबरः गया जिले में नक्सल कार्रवाई में तीन लोग मारे गए थे और दो लोग घायल हुए. नक्सलियों ने जिले के मोहनपुर प्रखंड के अमकोला गांव में वारदात को अंजाम दिया.

17 अक्तूबरः औरंगाबाद जिले में लैंडमाइन धमाके में सात लोग मारे गए. नक्सलियों ने जिले के खुदवां थाना के पथरा गांव के पास एक कार को विस्फोट से उड़ा दिया था. विस्फोट जिला मुख्यालय से करीब तीस किलोमीटर की दूरी पर किया गया. मरने वाले एक ही गांव के थे.

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