हाई कोर्ट के फ़ैसले का सपा पर क्या असर पड़ेगा?

अखिलेश यादव
    • Author, अतुल चंद्रा
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के विवाद से समाजवादी पार्टी अभी उबर भी नहीं पाई थी कि इलाहबाद हाई कोर्ट के गुरुवार को आए एक फैसले ने उनके सामने एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है.

हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने इस संबंध में अदालत के सामने उठाए गए सवालों के जवाब में कहा कि गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम 1967, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, आयुध अधिनियम के अंतर्गत जो अभियुक्त जेल में बंद हैं, उनके मुक़दमे वापस लेने के लिए केंद्र सरकार की इजाज़त ज़रूरी है.

<link type="page"><caption> (मुजफ्फरनगर हिंसा मामले में गिरफ्तारी)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131031_muzaffarnagar_latest_vk.shtml" platform="highweb"/></link>

पाँच जुलाई 2012 को एक चिट्ठी लिखकर उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के अलग-अलग जेलों में इन कानूनों के अंतर्गत बंद 19 अभियुक्तों को रिहा करने की पैरवी की थी. गृह विभाग के प्रमुख सचिव ने इस आदेश पर दस्तखत किए थे.

सरकार के इस आदेश पर लखनऊ, वाराणसी, रामपुर, गोरखपुर और कानपुर के जिलाधिकारियों ने भी लिखित रूप से मुक़दमे वापस लेने का विरोध किया था. इनमें से अधिकतर पर वाराणसी के दशाश्वमेध घाट और कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशन, लखनऊ ज़िला अदालत, कानपुर नगर, बाराबंकी और रामपुर में हुए बम विस्फोटों में आरोप लगे हैं.

मगर अखिलेश यादव की सरकार ने चुनाव अभियान और सरकार बनने के बाद अल्पसंख्यकों से यह वादा किया था कि वह बेगुनाह नौजवानों को रिहा करेगी. सरकार के इस वादे के पीछे दो कारण थे. पहला आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अल्पसंख्यक वोट पर अपनी पकड़ मज़बूत करना और दूसरा, इस समुदाय को मायावती से दूर रखना.

सियासी नफ़ा-नुक़सान

भारत में मुसलमान

इस तरह के ज्यादातर मुक़दमे मायावती के कार्यकाल में ही दर्ज किए गए थे. हाई कोर्ट के गुरुवार के फैसले के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री मोहम्मद आज़म ख़ान ने पत्रकारों से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "हम अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं. यदि कोई कमी रह गई हो पैरवी में या कोई गलती हो गई हो तो कानून विभाग इसकी जाँच करेगा."

"भारत सरकार को भी इंसाफ करना चाहिए. केंद्र सरकार खाद्य सुरक्षा बिल तो ला सकती है किन्तु जीवन सुरक्षा बिल नहीं." आज़म खान ने सर्वोच्च न्यायलय भी जाने की बात की. अब लगभग ये स्पष्ट है कि इन कानूनों के तहत पकड़े गए लोगों को रिहा करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर आ गई है.

<link type="page"><caption> (दंगों का राजनीतिक गणित)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130916_riot_politics_pradeep_dp.shtml" platform="highweb"/></link>

यदि केंद्रीय गृह मंत्रालय उनको रिहा करने पर अपनी सहमति देती है तो सत्तारूढ़ कांग्रेस को इसके सियासी नफ़े-नुक़सान का आकलन करना पड़ सकता है. उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं की संख्या तकरीबन 19 फ़ीसदी है.

पिछले लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय ने उत्तर प्रदेश में रणनीतिक तरीके से वोटिंग की थी जिसके कारण कांग्रेस को 21 सीटें और समाजवादी पार्टी को 22 सीटें मिली थीं. मुरादाबाद के दंगों के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमान समाजवादी पार्टी से नाराज़ बताए जाते हैं.

उत्तर प्रदेश में लगभग 24 ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहाँ मुसलमान वोटर 20 प्रतिशत या उससे अधिक है. पिछले चुनाव में गैर-भारतीय जनता पार्टी दलों को 80 में 70 सीट मिली थी. आने वाले चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच अल्पसंख्यक मतों के लिए प्रतिस्पर्द्धा और तेज़ होने के आसार लगते हैं.

<italic><bold>(बीबीसी हिन्दी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold></italic>